गणेश विसर्जन-विसर्जन से सर्जन की यात्रा
परम्परा बने प्रकृति और नई पीढ़ियों के संरक्षण का संकल्प
राष्ट्रसेवा और जनकल्याण को जीवन का ध्येय बनाने वाले महान चिंतक एवं युगद्रष्टा पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की जयंती पर परमार्थ निकेतन से भावभीनी श्रद्धाजंलि
ऋषिकेश, 25 सितम्बर। परमार्थ पीठाधीश्वर, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी और डा साध्वी भगवती सरस्वती जी ने अनंत चतुदर्शी की शुभकामनायें देते हुये कहा कि श्री गणेश विसर्जन अंत नहीं है, विसर्जन तो नये सर्जन की शुरुआत है। मंगलमूर्ति, प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश जी की प्रतिमा को हम श्रद्धा, प्रेम और भक्ति के साथ अपने घरों और पूजा स्थलों में स्थापित करते हैं। 14 दिनों तक उनकी पूजा-अर्चना करते हैं, प्रार्थना करते हैं, उनसे सुख, शांति, समृद्धि, बुद्धि और मंगल का आशीर्वाद मांगते हैं और फिर उसी प्रेम एवं श्रद्धा के साथ उनकी प्रतिमा का विसर्जन करते हैं।
परमार्थ निकेतन में देश विदेश से आये श्रद्धालुओं ने पूज्य स्वामी जी के साथ अनंत चतुदर्शी मनायी। इस पावन परम्परा के बीच एक महत्वपूर्ण प्रश्न हमारे सामने आता है, विसर्जन के बाद हमारे जीवन में क्या नया जन्म लेता है? क्या विसर्जन केवल एक प्रतिमा के जल में विलीन होने तक सीमित रह जाए, या यह हमारे भीतर और हमारे आसपास किसी नये जीवन, नयी चेतना और नये संकल्प के सर्जन का माध्यम बने?
इसी भाव के साथ परमार्थ निकेतन से पूज्य स्वामी जी ने संदेश दिया कि हमारी परम्पराएँ ऐसी हों जो प्रकृति को भी बचाएँ, संस्कृति को भी सहेजें और आने वाली पीढ़ियों को भी सुरक्षित रखें।
आज आवश्यकता है कि हम अपनी श्रद्धा को प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी से जोड़ें। गणेश जी की प्रतिमाओं के निर्माण में ऐसे प्राकृतिक एवं पर्यावरण-अनुकूल माध्यमों का प्रयोग किया जा सकता है, जिनमें किसी औषधीय पौधे, फलदार वृक्ष या उपयोगी वनस्पति का बीज सुरक्षित रूप से रखा जाए। विसर्जन के पश्चात जब प्रतिमा प्रकृति में विलीन हो, तो उसमें निहित बीज धरती में रोपा जाए और उससे एक नये पौधे का जन्म हो।
तब गणेश विसर्जन केवल मूर्ति का विसर्जन नहीं रहेगा, वह एक नये जीवन का सर्जन बन जाएगा। एक प्रतिमा जल में विलीन होगी और उसी प्रक्रिया से धरती पर एक पौधा जन्म लेगा। एक रूप समाप्त होगा और दूसरा रूप प्रकट होगा। यही तो प्रकृति का शाश्वत नियम है, विसर्जन से सर्जन, अंत से आरम्भ और परिवर्तन से नवजीवन।
इस श्रीगणेश विसर्जन पर हम केवल प्रतिमा का विसर्जन न करें, बल्कि अपने भीतर की उन वृत्तियों का भी विसर्जन करें जो हमारे जीवन और समाज को कमजोर करती हैं।
पूज्य स्वामी जी ने कहा कि इस अनंत चतुदर्शी हम अपने अहंकार का विसर्जन करें, विनम्रता का सर्जन करें। नकारात्मकता का विसर्जन करें, सकारात्मकता का सर्जन करें। नेगेटीव नेरेटीव का विसर्जन करें, प्रदूषण का विसर्जन करें और प्रकृति-संरक्षण का सर्जन करें।
परमार्थ निकेतन का आह्वान है कि इस बार गणेश विसर्जन को एक ऐसे संकल्प से जोड़ें, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए भी आशीर्वाद बन सके। प्रत्येक परिवार, विद्यालय, संस्था और समुदाय अपने स्तर पर पर्यावरण-अनुकूल गणेश उत्सव मनाने का संकल्प ले। प्राकृतिक सामग्री से निर्मित प्रतिमाओं को अपनाएँ, जलस्रोतों को प्रदूषण से बचाएँ और विसर्जन के बाद बीजों को धरती में रोपकर एक गणेश प्रतिमा से एक नये जीवन के सर्जन की यात्रा प्रारम्भ करें।
गणपति बप्पा हमें छोड़कर नहीं जाते। वे हमारे भीतर एक नई चेतना, नया संकल्प और नये जीवन का सर्जन करके जाते हैं। आइए, इस अनंत चतुर्दशी पर हम संकल्प लें, विसर्जन को सर्जन से जोड़ें, श्रद्धा को सेवा से जोड़ें, परम्परा को प्रकृति-संरक्षण से जोड़ें और आज के उत्सव को आने वाली पीढ़ियों के उज्ज्वल भविष्य से जोड़ें।


By Shashi Sharma

Shashi Sharma – Senior Woman Journalist

Shashi Sharma has been active in journalism since 1985, holding the distinction of being Uttarakhand's first female journalist.

For 36 years, starting in 1989, she rendered distinguished service to India's premier news agency, PTI. During this long tenure, she demonstrated the power of her writing on numerous significant occasions; notably, she spent two months in Tehri reporting positively on the Tehri Dam—which was then mired in controversy—and used her pen to help pave the way for its construction.

Currently, Mrs. Shashi Sharma runs the news portal *Newsok24.com* and serves as the editor of the weekly newspaper *Desh Nirdesh*; she is also a registered anchor and commentator for Delhi Doordarshan.

शशि शर्मा वरिष्ठ महिला पत्रकार शशि शर्मा उत्तराखंड की पहली महिला पत्रकार के तौर पर 1985 से पत्रकारिता में कार्यरत हैं। 1989 से 36 वर्षों तक उन्होंने भारत की शीर्ष समाचार एजेंसी पीटीआई के लिए अपनी सशक्त सेवाएं दीं। छत्तीस वर्षों की लंबी अवधि तक पीटीआई के लिए काम करते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण मौकों पर अपनी कलम का लोहा मनवाया, जिसमें दो महीने तक टिहरी में रहकर विवादों के संकट में रहे टिहरी बांध पर सकारात्मक रिपोर्टिंग कर अपनी कलम की ताकत से निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया। वर्तमान में श्रीमती शशि शर्मा Newsok24 com न्यूज पोर्टल को चला रहीं हैं और साप्ताहिक समाचार पत्र देश निर्देश की सम्पादक होने के साथ ही दिल्ली दूरदर्शन की रजिस्टर्ड एंकर और कमेंटेटर भी हैं।

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