
हरिद्वार। शिव सदन में श्रीमद्भागवत कथा के प्रथम दिन भव्य पोथी शोभायात्रा निकाली गई, जिससे पूरा परिसर ‘राधे-राधे’ और ‘श्रीहरि’ के जयघोष से भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने सिर पर श्रीमद्भागवत पोथी धारण कर अपनी श्रद्धा प्रकट की।

कथा व्यास 18 पुराणों के प्रबुद्ध ज्ञाता परम पूज्य श्री मोहन शरण जी महाराज ने कथा की महिमा बताते हुए कहा कि हरि नाम लेने मात्र से जीवन सार्थक हो जाता है। मनुष्य जीवन केवल सांसारिक सुखों के लिए नहीं, बल्कि ईश्वर भक्ति और सत्कर्मों के लिए मिला है। श्रीमद्भागवत कथा साक्षात श्रीकृष्ण का विग्रह है; इसका श्रवण सुख-समृद्धि देने के साथ-साथ पितरों को मोक्ष प्रदान करता है।
कथा के मुख्य यजमान भीलवाड़ा (राजस्थान) से पधारे श्री महावीर सोनी और श्री बद्रीलाल सोनी ने कहा कि हरिद्वार की पावन भूमि पर संतों के श्रीमुख से कथा सुनना आत्मा को शांति देता है। प्रभु का नाम और सत्कर्म ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है।
इस अवसर पर राजस्थान और हरिद्वार से आए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और भागवत कथा के दिव्य प्रसंगों का रसपान किया।
