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सिवनी की धरती से शिव की धरती पर आगमन* *
पूज्य संतों ने किया उत्तराखंड के राज्यपाल डॉ. ढाल सिंह बिसेन का हरित अभिनंदन एवं स्वागत*

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पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी, योगगुरु स्वामी रामदेव जी एवं संतों ने दीं शुभकामनाएँ; मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी की गरिमामयी उपस्थिति में व्यक्त कीं मंगलकामनाएँ*
ऋषिकेश, 19 अक्टूबर 2026। मध्य प्रदेश की पावन धरती सिवनी से देवभूमि उत्तराखंड की आध्यात्मिक भूमि पर पधारे डॉ. ढाल सिंह बिसेन का पूज्य संतों द्वारा हरित अभिनंदन एवं आत्मीय स्वागत किया गया। उत्तराखंड के राज्यपाल के रूप में नवीन दायित्व प्राप्त होने के शुभ अवसर पर परमार्थ पीठाधीश्वर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी, योगगुरु पूज्य स्वामी रामदेव जी तथा अन्य पूज्य संतों ने उन्हें हार्दिक बधाई, शुभकामनाएँ एवं आशीर्वाद प्रदान किया। इस अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी की गरिमामयी उपस्थिति रही।
सिवनी की धरती से भगवान शिव की पावन भूमि देवभूमि उत्तराखंड तक का यह आगमन भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, आध्यात्मिक चेतना और राष्ट्रीय एकात्मता का सुंदर प्रतीक है। राज्यपाल का संवैधानिक दायित्व जनसेवा, लोककल्याण, संवैधानिक मूल्यों और सामाजिक समरसता के प्रति प्रतिबद्धता का महत्त्वपूर्ण अवसर है।
पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने डॉ. ढाल सिंह बिसेन को नवीन दायित्व के लिए शुभकामनाएँ देते हुए उनके सफल, गरिमामय एवं जनकल्याणकारी कार्यकाल की मंगलकामना की। पूज्य संतों ने आशा व्यक्त की कि उनके नेतृत्व में संवैधानिक मूल्यों, सामाजिक सद्भाव, जनहित और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को निरंतर प्रोत्साहन मिलेगा।
इस अवसर पर हरित अभिनंदन के माध्यम से प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया। भारतीय संस्कृति में प्रकृति को जीवन का आधार तथा आध्यात्मिक चेतना का अभिन्न अंग माना गया है। वृक्ष, नदियाँ, पर्वत और वन हमारी सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक विरासत के अमूल्य प्रतीक हैं। हरित अभिनंदन इसी भावना को अभिव्यक्त करता है कि विकास के प्रत्येक प्रयास में पर्यावरण संरक्षण और भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य को महत्त्व दिया जाना चाहिए।
हिमालय की दिव्य गोद में बसा देवभूमि उत्तराखंड अपनी प्राकृतिक संपदा, पवित्र नदियों, ऋषि-मुनियों की तपस्या, योग एवं ध्यान की परंपरा और सनातन संस्कृति की अमूल्य विरासत के लिए विश्वविख्यात है। माँ गंगा की पावन धारा इस भूमि को आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करती है, जबकि हिमालय की अडिगता धैर्य, दृढ़ता और संकल्प का संदेश देती है। ऐसी पुण्यभूमि की सेवा का दायित्व गौरव के साथ-साथ जनकल्याण और समाज के प्रति उत्तरदायित्व का अवसर भी है।
भारत की संत परंपरा सदैव सेवा, करुणा, सद्भाव और निःस्वार्थ समर्पण की प्रेरणा देती रही है। पूज्य संतों का आशीर्वाद इन्हीं शाश्वत मूल्यों को आत्मसात कर समाज और राष्ट्र के व्यापक हित में कार्य करने की प्रेरणा का प्रतीक है। इस अवसर पर संतों ने डॉ. ढाल सिंह बिसेन के मंगलमय कार्यकाल की कामना करते हुए उन्हें अपना स्नेह, आशीर्वाद एवं शुभकामनाएँ अर्पित कीं।
माँ गंगा की पावन धारा आपको निरंतर ऊर्जा एवं प्रेरणा प्रदान करे, हिमालय की अडिगता आपके संकल्पों को दृढ़ बनाए और देवभूमि की समृद्ध ऋषि परंपरा आपके पथ को आलोकित करे। आपका कार्यकाल जनविश्वास, सुशासन, सामाजिक सद्भाव और लोककल्याण के ऐसे प्रेरक अध्याय के रूप में प्रतिष्ठित हो, जो उत्तराखंड की भावी पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा बने।
देवभूमि उत्तराखंड के राज्यपाल के रूप में डॉ. ढाल सिंह बिसेन जी का हार्दिक अभिनंदन एवं आत्मीय स्वागत।
