
Santoshi, हरिद्वार के संतोषी माता मंदिर से निकल कर देवी शाकुम्भरी मंदिर तक जाती है पांडवों द्वारा निर्मित गुफा।
Santoshi, Starting from Santoshi Mata Temple in Haridwar, the cave built by the Pandavas leads to the Devi Shakumbhari Temple.

गौरी कुंड में शिव आराधना के दौरान यहीं भोजन पकाती थीं मां पार्वती।
नवरात्र सम्पन्न होने पर भंडारे का आयोजन किया गया।
Santoshi, देवी माता के नवें दिन यानि दुर्गा नवमी पर हर साल की तरह इस वर्ष भी हरिद्वार में बिल्केश्वर मंदिर के निकट वैदिक काल से स्थापित भगवान गणपति की पुत्री संतोषी माता एवं माता अन्नपूर्णा के मंदिर में नवरात्र सम्पन्न होने पर भंडारे का आयोजन किया गया।
निरंजनी अखाड़े की छत्रछाया में आने वाले इस मंदिर को लेकर कथा है कि बिल्वकेश्वर महादेव मंदिर से भी आगे स्थित गौरी कुंड नामक स्थान पर रहते हुए माता पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए जब तप साधना की तो अन्न पूर्णा मां के नाम से प्रख्यात इस मंदिर के स्थान पर जिसे वर्तमान में संतोषी माता का मंदिर कहा जाता है, पर मां पार्वती अपना भोजन स्वयं तैयार करतीं थीं।
मंदिर के संचालक विद्वान और सुशिक्षित पुजारी काशी गिरी के अनुसार जब पांडव अज्ञात वास में थे तो उन्होंने इस स्थान पर सुरंग खोदी जिसमें इस मंदिर में शीला पर स्फूर्त उकेरी हुई मूर्तियां मिली जिनमें बीच में गणपति दाईं ओर मां पार्वती और बाईं ओर संतोषी माता की प्रतिमा है।
इसी मंदिर में एक रहस्यमई गुफा भी है जो वर्तमान में बंद हैं कहा जाता है कि ये गुफा सहारनपुर के पास स्थित, प्रख्यात देवी शाकुम्भरी के मंदिर तक जाती है, अनेकों वर्ष पहले इस गुफा से एक युवक और युवती ने मंदिर की गुफा को चोरी छिपे पार करना चाहा लेकिन उनके बारे में बाद में कोई जानकारी नहीं मिल सकी, तभी से एहतियातन इस गुफा को बंद कर दिया गया।
आईये जानते हैं स्वयं मंदिर के पुजारी काशी गिरी जी का क्या कहना है।
मंदिर के परम भक्त विजय भंडारी और उनका पूरा परिवार तथा नगर क्षेत्र का व्यापार मंडल प्रत्येक नवरात्र सम्पन्न होने पर भंडारे का आयोजन करता आ रहा है।

