मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कुशल नेतृत्व में आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ रही हैं महिलाएं

मुर्गी पालन से भारती रावत ने बदली अपनी जिंदगी, हर प्रोडक्शन साइकिल में लगभग 50 से 55 हजार रुपये

REAP परियोजना के तहत मिली वित्तीय सहायता एवं सब्सिडी से शुरू किया ब्रॉयलर पोल्ट्री फार्म

दीनदयाल उपाध्याय योजना के तहत सहकारी बैंक से मिले ब्याजमुक्त ऋण ने स्वरोजगार को दिया बढ़ावा

हरिद्वार, 21 अक्टूबर 2026

ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में राज्य सरकार की योजनाएं सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कुशल नेतृत्व में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इसी की एक प्रेरणादायक मिसाल हरिद्वार जनपद के बहादराबाद विकासखंड के लालढांग क्षेत्र स्थित चमारिया गांव निवासी श्रीमती भारती रावत हैं, जिन्होंने मुर्गी पालन व्यवसाय को अपनी आजीविका का मजबूत माध्यम बनाया है। रिप (रूरल एंटरप्राइज एक्सेलेरेशन प्रोजेक्ट) परियोजना के तहत वित्तीय सहायता एवं सब्सिडी प्राप्त कर उन्होंने वर्ष 2025 में ब्रॉयलर पोल्ट्री फार्म की शुरुआत की। आज वह इस व्यवसाय के माध्यम से हर प्रोडक्शन साइकिल में लगभग 50 से 55 हजार रुपये की आय अर्जित कर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बना रही हैं।
35 वर्षीय श्रीमती भारती रावत, पत्नी कमल रावत, ने स्वरोजगार की संभावनाओं को पहचानते हुए अपने घर के समीप स्थित कृषि भूमि पर पोल्ट्री पालन यूनिट स्थापित की। व्यवसाय को बेहतर ढंग से संचालित करने के लिए उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय योजना के अंतर्गत सहकारी बैंक से 1.60 लाख रुपये का ब्याजमुक्त ऋण प्राप्त कर पोल्ट्री शेड का निर्माण कराया। रिप परियोजना के तहत 75 हजार की सब्सिडी उपलब्ध कराई गई,जिसके सहयोग से उन्हें अपना उद्यम शुरू करने तथा उसे आगे बढ़ाने में मदद की।

2,200 से अधिक चूजों की क्षमता वाली पोल्ट्री यूनिट

भारती रावत की पोल्ट्री यूनिट में प्रत्येक उत्पादन चक्र में लगभग 2,200 ब्रॉयलर चूजों का पालन किया जाता है। वह अब तक 07 उत्पादन चक्र सफलतापूर्वक पूरे कर चुकी हैं। प्रत्येक चक्र को पूरा करने में लगभग 40 से 45 दिन का समय लगता है। इस व्यवसाय से होने वाली आय उनके परिवार के लिए नियमित आजीविका का साधन बन रही है। मुर्गी पालन के प्रति उनकी मेहनत और लगन ने उन्हें ग्रामीण क्षेत्र में एक सफल महिला उद्यमी के रूप में पहचान दिलाई है।

हैचरी से जुड़कर मिल रहा तकनीकी सहयोग और बेहतर बाजार
पोल्ट्री व्यवसाय के संचालन में भारती रावत के परिवार को हरियाणा के करनाल स्थित कल्याण हैचरी से भी सहयोग मिल रहा है। इस व्यवस्था के अंतर्गत एक दिन के वैक्सीनेटेड चूजों की आपूर्ति, पशु आहार, टीकाकरण, परिवहन, पशु चिकित्सकीय परामर्श तथा तैयार पक्षियों के विपणन में सहायता उपलब्ध कराई जाती है। इससे परिवार को मुर्गी पालन से लेकर उत्पादों की बिक्री तक आवश्यक सहयोग मिल रहा है।
इस व्यवसाय की एक विशेषता इसकी पारदर्शी विपणन व्यवस्था है। डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से विक्रेताओं एवं ठेकेदारों की मांग के अनुसार पक्षियों की बिक्री की जाती है। निर्धारित दर और मात्रा के आधार पर पक्षियों का वजन कराया जाता है। बिक्री प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखते हुए विभिन्न निर्धारित खर्चों की कटौती के बाद शेष भुगतान सीधे किसान के बैंक खाते में हस्तांतरित किया जाता है। इस व्यवस्था से बाजार तक पहुंच आसान होने के साथ-साथ बिक्री प्रक्रिया में भी सुविधा मिल रही है।

स्वरोजगार से मजबूत हो रही परिवार की आर्थिक स्थिति
श्रीमती भारती रावत के लिए मुर्गी पालन व्यवसाय केवल आय का साधन नहीं, बल्कि परिवार को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन गया है। वह इस व्यवसाय से हर प्रोडक्शन साइकिल में लगभग 50 से 55 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं और परिवार की जरूरतों को पूरा करने में योगदान दे रही हैं। सरकारी योजनाओं के माध्यम से मिले सहयोग ने उन्हें अपनी मेहनत और क्षमता के बल पर आगे बढ़ने का अवसर प्रदान किया है।
भारती रावत की सफलता की कहानी इस बात का उदाहरण है कि सरकारी योजनाओं का प्रभावी लाभ, उचित मार्गदर्शन, तकनीकी सहयोग और निरंतर मेहनत ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के नए अवसर पैदा कर सकते हैं। उनकी यह पहल न केवल परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ कर रही है, बल्कि अन्य ग्रामीण महिलाओं को भी अपना उद्यम शुरू करने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही है।

मुख्यमंत्री एवं जिलाधिकारी का जताया आभार
श्रीमती भारती रावत ने स्वरोजगार के लिए सहायता एवं मार्गदर्शन उपलब्ध कराने पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तथा जिलाधिकारी मयूर दीक्षित का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि रिप परियोजना के तहत मिली वित्तीय सहायता एवं सब्सिडी और दीनदयाल उपाध्याय योजना के अंतर्गत मिले ब्याजमुक्त ऋण से उन्हें अपना मुर्गी पालन व्यवसाय शुरू करने और परिवार की आय बढ़ाने में काफी मदद मिली है। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं के सहयोग से आज वह आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। इसके लिए उन्होंने प्रदेश सरकार एवं जिला प्रशासन का धन्यवाद करते हुए आभार व्यक्त किया।


By Shashi Sharma

Shashi Sharma – Senior Woman Journalist Shashi Sharma has been active in journalism since 1985, holding the distinction of being Uttarakhand's first female journalist. For 36 years, starting in 1989, she rendered distinguished service to India's premier news agency, PTI. During this long tenure, she demonstrated the power of her writing on numerous significant occasions; notably, she spent two months in Tehri reporting positively on the Tehri Dam—which was then mired in controversy—and used her pen to help pave the way for its construction. Currently, Mrs. Shashi Sharma runs the news portal *Newsok24.com* and serves as the editor of the weekly newspaper *Desh Nirdesh*; she is also a registered anchor and commentator for Delhi Doordarshan. शशि शर्मा वरिष्ठ महिला पत्रकार शशि शर्मा उत्तराखंड की पहली महिला पत्रकार के तौर पर 1985 से पत्रकारिता में कार्यरत हैं। 1989 से 36 वर्षों तक उन्होंने भारत की शीर्ष समाचार एजेंसी पीटीआई के लिए अपनी सशक्त सेवाएं दीं। छत्तीस वर्षों की लंबी अवधि तक पीटीआई के लिए काम करते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण मौकों पर अपनी कलम का लोहा मनवाया, जिसमें दो महीने तक टिहरी में रहकर विवादों के संकट में रहे टिहरी बांध पर सकारात्मक रिपोर्टिंग कर अपनी कलम की ताकत से निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया। वर्तमान में श्रीमती शशि शर्मा Newsok24 com न्यूज पोर्टल को चला रहीं हैं और साप्ताहिक समाचार पत्र देश निर्देश की सम्पादक होने के साथ ही दिल्ली दूरदर्शन की रजिस्टर्ड एंकर और कमेंटेटर भी हैं।

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