*मुख्यमंत्री धामी ने गोरखा दशैं-दीपावली महोत्सव एवं राजकीय मेले में किया प्रतिभाग*

* *गोरखा समाज की वीरता, शौर्य और राष्ट्रभक्ति पर पूरे देश को गर्व : मुख्यमंत्री*

* *गोरखा समाज उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि पूरे भारतवर्ष का गौरव : मुख्यमंत्री*

* *गोरखा समाज की भाषा, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री*

* *सीमांत क्षेत्रों में कनेक्टिविटी, व्यापार और आधारभूत सुविधाओं का विस्तार सरकार की प्राथमिकता : मुख्यमंत्री*

* *प्रदेश की 3 लाख से अधिक महिलाएं बनीं लखपति दीदी, महिला सशक्तीकरण को मिल रही नई गति : मुख्यमंत्री*

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को महिंद्रा ग्राउंड, गढ़ी कैंट, देहरादून में वीर गोरखा कल्याण समिति द्वारा आयोजित गोरखा दशैं-दीपावली महोत्सव एवं राजकीय मेला-2026 में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने गोरखा समाज के लोगों को दशैं एवं दीपावली पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह महोत्सव गोरखा समाज की गौरवशाली संस्कृति, समृद्ध परंपराओं और सामाजिक एकजुटता का प्रतीक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दशैं का पर्व मां दुर्गा की आराधना के साथ अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश देता है, जबकि दीपावली अंधकार पर प्रकाश और निराशा पर आशा की विजय का प्रतीक है। ये दोनों पर्व समाज को सत्य, न्याय, सदाचार, प्रेम और आपसी सद्भाव के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन हमारी विरासत को संरक्षित रखने के साथ ही नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, परंपराओं और सामाजिक मूल्यों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। मुख्यमंत्री ने इस भव्य आयोजन के लिए वीर गोरखा कल्याण समिति के पदाधिकारियों एवं पूरी आयोजन टीम की सराहना करते हुए उनके प्रयासों के लिए आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री ने गोरखा समाज की वीरता, साहस और राष्ट्रभक्ति की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस समाज का इतिहास अदम्य शौर्य, त्याग और बलिदान की गौरवशाली गाथाओं से भरा हुआ है। गोरखा समाज केवल उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि संपूर्ण भारत का गौरव है। देश की सीमाओं की रक्षा में गोरखा वीरों ने सदैव अद्वितीय साहस, निष्ठा और कर्तव्यपरायणता का परिचय दिया है। उन्होंने कहा कि गोरखा समाज का आदर्श वाक्य “कायर हुनुभन्दा मर्नु राम्रो” अर्थात कायर बनकर जीने से बेहतर वीरता के साथ प्राण न्योछावर करना, उनके अदम्य साहस और स्वाभिमान की भावना को अभिव्यक्त करता है। मातृभूमि की रक्षा के लिए सर्वस्व समर्पित करने की यह भावना पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरखा समाज ने देश की सीमाओं की सुरक्षा के साथ-साथ उत्तराखंड के निर्माण और विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। शिक्षा, खेलकूद, कला, साहित्य और समाजसेवा सहित विभिन्न क्षेत्रों में समाज के लोगों ने अपनी प्रतिभा, परिश्रम और समर्पण से प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने उत्तराखंड की प्रगति में गोरखा समाज के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि राज्य की विकास यात्रा में इस समाज की भूमिका सदैव महत्वपूर्ण रहेगी।

मुख्यमंत्री ने भारत और नेपाल के पारंपरिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध केवल भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये गहरे सांस्कृतिक, सामाजिक और पारिवारिक जुड़ाव पर आधारित हैं। भारत और नेपाल के बीच रोटी-बेटी का आत्मीय संबंध सदियों से कायम है। उन्होंने कहा कि सीमांत क्षेत्र से आने के कारण उन्होंने स्वयं बचपन से ही दोनों देशों के बीच साझा संस्कृति, पारिवारिक संबंधों और आपसी आत्मीयता को नजदीक से अनुभव किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार गोरखा समाज के सर्वांगीण विकास, उसकी भाषा, कला और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण तथा संवर्धन के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। इसी उद्देश्य से हल्द्वानी स्थित उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय में नेपाली भाषा के अध्ययन के लिए डिप्लोमा एवं प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त नेपाली भाषा और साहित्य को संस्थागत स्तर पर प्रोत्साहन देने के लिए नेपाली अकादमी को उत्तराखंड भाषा संस्थान के दायरे में लाने की पहल की गई है। सरकार का उद्देश्य है कि युवा पीढ़ी अपनी भाषा, साहित्य और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी रहे तथा अपनी विरासत को आगे बढ़ाने में गौरव का अनुभव करे।

मुख्यमंत्री ने महिला सशक्तीकरण को राज्य सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल बताते हुए कहा कि महिलाओं की उन्नति से ही परिवार, समाज और प्रदेश की वास्तविक प्रगति सुनिश्चित होती है। इसी सोच के अनुरूप राज्य सरकार ने सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था लागू की है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड स्वतंत्र भारत में समान नागरिक संहिता लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना है। यह महिलाओं को समान अधिकार और न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए लखपति दीदी अभियान प्रभावी रूप से संचालित किया जा रहा है। उन्हें प्रसन्नता है कि राज्य की 3 लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बनकर न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत और नेपाल के बीच सांस्कृतिक एवं पारिवारिक संबंधों को और मजबूत बनाने के साथ ही सीमांत क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं तथा आवागमन के साधनों का विस्तार करना भी केंद्र और राज्य सरकार की प्राथमिकता है। इसी क्रम में भारत-नेपाल सीमा पर महाकाली नदी पर प्रस्तावित पंचेश्वर बहुउद्देशीय परियोजना जलविद्युत उत्पादन, सिंचाई और क्षेत्रीय विकास की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। पिथौरागढ़ जनपद के धारचूला क्षेत्र में छारछुम पुल परियोजना के माध्यम से दोनों देशों के सीमावर्ती क्षेत्रों के बीच आवागमन और व्यापारिक संपर्क को बेहतर बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि बनबसा में लगभग 368 करोड़ 28 लाख रुपये की लागत से एकीकृत चेक पोस्ट का निर्माण किया जा रहा है। इसके साथ ही सीमावर्ती क्षेत्र में ड्राई पोर्ट विकसित करने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे व्यापारिक गतिविधियों और परिवहन सुविधाओं को बढ़ावा मिलेगा। भारतमाला परियोजना के अंतर्गत राष्ट्रीय राजमार्ग-9 पर सितारगंज-टनकपुर मार्ग से बनबसा स्थित भारत-नेपाल सीमा तक लगभग 246 करोड़ 86 लाख रुपये की लागत से चार लेन कनेक्टिविटी विकसित की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन परियोजनाओं का उद्देश्य सीमांत क्षेत्रों में सड़क, पुल, व्यापार और परिवहन सुविधाओं को सुदृढ़ करना तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर उपलब्ध कराना है। सीमांत क्षेत्र केवल देश की सुरक्षा की दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं हैं, बल्कि ये हमारी सांस्कृतिक पहचान और आर्थिक विकास के भी प्रमुख केंद्र हैं। इसलिए इन क्षेत्रों का समग्र विकास सरकार की विशेष प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि गोरखा समाज के सहयोग, सहभागिता और समर्पण से उत्तराखंड विकास के नए आयाम स्थापित करेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार समाज के सम्मान, विकास और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करती रहेगी। उन्होंने प्रदेश को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के सरकार के विकल्प रहित संकल्प को पूरा करने में सभी से सहयोग और सहभागिता का आह्वान किया।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री श्री सतपाल महाराज सहित गोरखा समाज के गणमान्य व्यक्ति, वीर गोरखा कल्याण समिति के पदाधिकारी, सदस्य एवं बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।


By Shashi Sharma

Shashi Sharma – Senior Woman Journalist Shashi Sharma has been active in journalism since 1985, holding the distinction of being Uttarakhand's first female journalist. For 36 years, starting in 1989, she rendered distinguished service to India's premier news agency, PTI. During this long tenure, she demonstrated the power of her writing on numerous significant occasions; notably, she spent two months in Tehri reporting positively on the Tehri Dam—which was then mired in controversy—and used her pen to help pave the way for its construction. Currently, Mrs. Shashi Sharma runs the news portal *Newsok24.com* and serves as the editor of the weekly newspaper *Desh Nirdesh*; she is also a registered anchor and commentator for Delhi Doordarshan. शशि शर्मा वरिष्ठ महिला पत्रकार शशि शर्मा उत्तराखंड की पहली महिला पत्रकार के तौर पर 1985 से पत्रकारिता में कार्यरत हैं। 1989 से 36 वर्षों तक उन्होंने भारत की शीर्ष समाचार एजेंसी पीटीआई के लिए अपनी सशक्त सेवाएं दीं। छत्तीस वर्षों की लंबी अवधि तक पीटीआई के लिए काम करते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण मौकों पर अपनी कलम का लोहा मनवाया, जिसमें दो महीने तक टिहरी में रहकर विवादों के संकट में रहे टिहरी बांध पर सकारात्मक रिपोर्टिंग कर अपनी कलम की ताकत से निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया। वर्तमान में श्रीमती शशि शर्मा Newsok24 com न्यूज पोर्टल को चला रहीं हैं और साप्ताहिक समाचार पत्र देश निर्देश की सम्पादक होने के साथ ही दिल्ली दूरदर्शन की रजिस्टर्ड एंकर और कमेंटेटर भी हैं।

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