माँ जानकी जी प्राकट्य दिवस*

त्याग, धैर्य और पवित्रता की दिव्य प्रेरणा का पर्व*

ऋषिकेश। आज मां जानकी जी के दिव्य प्राकट्य दिवस के अवसर पर परमार्थ निकेतन में विशेष यज्ञ का आयोजन किया। परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमारों में विश्व शान्ति व समृद्धि हेतु विशेष यज्ञ किया।

पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने इस दिव्य अवसर संदेश दिया कि माँ जानकी, धैर्य की वह निःशब्द शक्ति हैं जो हर पीड़ा को तप बनाकर प्रकाश में बदल देती है।

परमार्थ निकेतन में माँ जानकी प्राकट्य दिवस अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक गरिमा के साथ मनाया गया। गंगा तट पर दिव्य गंगा आरती के दौरान भक्ति, वैदिक मंत्रोच्चार, रामनाम संकीर्तन के साथ प्राकट्य उत्सव मनाया। देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं, संतों, ऋषिकुमारों ने माँ सीता के आदर्शों को अपने जीवन में धारण करने का संकल्प लिया।

स्वामी जी ने कहा कि माँ जानकी भारतीय संस्कृति की आत्मा हैं। वे नारी गरिमा, संयम, करुणा और आंतरिक शक्ति की जीवंत अभिव्यक्ति हैं। उनका जीवन संघर्षों से भरा था, किंतु उन्होंने कभी अपनी मर्यादा, करुणा और धैर्य का त्याग नहीं किया। यही कारण है कि वे सनातन संस्कृति में आदर्श नारीत्व की सर्वाेच्च प्रतीक हैं।

आज के समय में जब समाज तनाव, असंतुलन और मूल्यहीनता की चुनौतियों से जूझ रहा है, माँ जानकी का जीवन हमें भीतर की शक्ति से जुड़ने की प्रेरणा देता है। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों को भी तपस्या बना दिया। वनवास, परीक्षा और संघर्षों के बीच भी उन्होंने प्रेम, क्षमा और सत्य का मार्ग नहीं छोड़ा।

माँ जानकी आज की नारी के लिए चेतना की पुकार हैं। आज जब आधुनिकता के नाम पर अपनी पहचान, मर्यादा और मूल्यों से दूर होने की होड़ लगी है, माँ जानकी का जीवन हमें ठहरकर सोचने को विवश करता है। वे सिखाती हैं कि कोमलता कमजोरी नहीं, बल्कि सबसे बड़ी ताकत है; धैर्य पराजय नहीं, बल्कि विजय की तैयारी है।

 

वनवास हो, विपत्ति हो या अन्याय, उन्होंने कभी सत्य और स्वाभिमान से समझौता नहीं किया। उन्होंने परिस्थितियों के आगे सिर नहीं झुकाया, बल्कि अपने चरित्र की ऊँचाई से इतिहास को झुका दिया। यही संदेश आज की हर बेटी के लिए है, अपनी संस्कृति से जुड़े रहो, अपने संस्कारों को जियो और अनीति के सामने अडिग खड़ी रहो।

माँ जानकी प्रेरित करती हैं कि नारी स्वयं को पहचाने, अपनी गरिमा को माने और समाज में परिवर्तन की शक्ति बने। जब नारी जागेगी, तभी परिवार, समाज और राष्ट्र जागृत होगा।

माँ जानकी प्राकट्य दिवस, आत्मचिंतन और जीवन मूल्यों को पुनः जागृत करने का पावन अवसर है। माँ जानकी के आदर्शों को आत्मसात कर एक संवेदनशील, संस्कारित और समरस समाज के निर्माण में सहभागी बनें।


By Shashi Sharma

Shashi Sharma Working in journalism since 1985 as the first woman journalist of Uttarakhand. From 1989 for 36 years, she provided her strong services for India's top news agency PTI. Working for a long period of thirty-six years for PTI, he got her pen ironed on many important occasions, in which, by staying in Tehri for two months, positive reporting on Tehri Dam, which was in crisis of controversies, paved the way for construction with the power of her pen. Delivered.

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