*गंगा की पवित्रता से समझौता नहीं, डीएम ने चन्द्रेश्वर नाला क्षेत्र का किया स्थलीय निरीक्षण,*

*मा0 मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रशासन का सख्त एक्शन, दूषित जल पर पूरी तरह रोक, शोधन के बाद ही होगा प्रवाह,*

*07 विभागों के वरिष्ठतम प्रतिष्ठान हो या आवासीय भवन, गंदा पानी गंगा में बहाया तो नहीं बख्शे जाएंगे,*

*गली-मोहल्लों में जाकर डीएम ने लिया जायजा, नाले-नालियों को तीन दिवस के भीतर सीवरेज नेटवर्क से जोड़ने के निर्देश*

*नाले में दूषित जल प्रवाह करते 25 घरों के पाइप-ड्रेन्स नगर आयुक्त व जल संस्थान को आज ही सीज करने के निर्देशः*

*चन्द्रेश्वर नाले की सफाई व शोधन को लेकर डीएम की सख्ती, विस्तृत रिपोर्ट एवं कार्ययोजना की तलब,*

*गंगा संरक्षण को लेकर सभी विभाग एक मंच पर, जल्द बनेगी कार्ययोजना, रिपोर्ट होगी सार्वजनिक।*

*देहरादून ।ऋषिकेश स्थित चन्द्रेश्वर नाले से बिना उपचारित गंदे पानी एवं ठोस कचरे के गंगा नदी में प्रवाहित होने संबंधी प्राप्त शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी श्री सविन बंसल ने बुधवार को चन्द्रेश्वर नाला क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने संबंधित विभागों को नाले के समुचित उपचार हेतु विस्तृत रिपोर्ट एवं कार्ययोजना शीघ्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान अधीक्षण अभियंता, सिंचाई विभाग तथा महाप्रबंधक, निर्माण वृत्त (गंगा), उत्तराखंड पेयजल निगम ने नाले का संपूर्ण नक्शा एवं प्रस्तावित एक्शन प्लान से अवगत कराया।

जिलाधिकारी ने कहा कि मा0 मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में जिला प्रशासन का यह सुनिश्चित प्रयास रहेगा कि किसी भी स्थिति में दूषित जल गंगा नदी में प्रवाहित न हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि गंगा में मिलने वाले सभी नालों का जल स्वच्छ एवं उपचारित होना अनिवार्य है। जिलाधिकारी ने कहा कि 07 विभागों के वरिष्ठतम प्रतिष्ठान हो या आवासीय भवन, गंदा पानी गंगा में बहाया तो नहीं कोई भी नही बख्सा जाएगा। इस दौरान डीएम ने नाले में वेस्ट वाटर प्रवाह करते 25 घरों के पाइप-ड्रेन्स को आज ही सीज करने के निर्देश भी दिए। 

जिलाधिकारी ने इस समस्या को अत्यंत गंभीर मानते हुए सीवर ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की क्षमता वृद्धि हेतु शीघ्र प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए तथा बिना उपचारित गंदे पानी की रोकथाम के लिए प्राथमिकता के आधार पर कार्य करने को कहा। उन्होंने कहा कि गंगा की स्वच्छता एवं पवित्रता बनाए रखने हेतु एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर शासन को प्रेषित की जाएगी, जिससे प्रदूषण की समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जा सके और आने वाली पीढ़ियों के लिए गंगा को स्वच्छ रखा जा सके।

जिलाधिकारी ने कहा कि नगर क्षेत्र में सीवरेज नेटवर्क अधिकांश क्षेत्रों को आच्छादित करता है, किंतु जहां सीवरेज कार्य प्रगति पर है अथवा प्रतिष्ठानों एवं आवासीय भवनों के कनेक्शन अभी सीवर लाइन से नहीं जुड़े हैं, वहां दूषित जल के उपचार हेतु प्राथमिकता से कार्य किया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इंटरसेप्शन एवं ड्रेनेज प्लान के अंतर्गत एसटीपी विस्तार की योजना तैयार की जा रही है तथा जिन प्रतिष्ठानों अथवा आवासीय भवनों द्वारा बिना उपचारित जल सीधे प्रवाहित किया जा रहा है, उनके विरुद्ध सख्त प्रवर्तन कार्रवाई की जाएगी। इस दौरान जिलाधिकारी ने चन्द्रेश्वर नाला क्षेत्र के वार्ड-3 में गली मुहल्ले में पैदल चलकर आवासीय भवनों एवं प्रतिष्ठानों के सीवरेज और गलियों में बह रहे नालियों निरीक्षण करते हुए नालियों को सीवरेज से कनेक्ट कराने के निर्देश भी दिए।

जिलाधिकारी ने नगर निगम के मुख्य नगर आयुक्त, उपजिलाधिकारी, सीवरेज अनुरक्षण इकाई, पेयजल निगम, जल संस्थान एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को आपसी समन्वय से इस विषय पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट प्राप्त होने के उपरांत इसे आम जनता के साथ भी साझा किया जाएगा।

सीवरेज अनुरक्षण इकाई के अधिकारियों ने अवगत कराया कि ऋषिकेश में 7.50 एमएलडी क्षमता का सीवर ट्रीटमेंट प्लांट नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत आई एंड डी एवं एसटीपी, ढालवाला-मुनिकीरेती योजना के तहत निर्मित किया गया है। सीमित भूमि उपलब्धता के कारण यह एसटीपी बहुमंजिला स्वरूप में निर्मित किया गया है, जो देश का अपनी तरह का प्रथम एसटीपी है। यह एसटीपी अक्टूबर 2020 से अनुरक्षणाधीन है।

यह 7.50 एमएलडी एसटीपी तीन नालों के शोधन हेतु निर्मित है, जिनमें श्मशान घाट नाला एवं चन्द्रेश्वर नगर नाला प्रमुख हैं, जबकि ढालवाला नाले में सीवेज के साथ-साथ प्राकृतिक स्रोतों का जल भी अधिक मात्रा में आता है। वर्षा ऋतु के दौरान ढालवाला नाले में प्रवाह एसटीपी की क्षमता से अधिक हो जाता है। ऐसी स्थिति में श्मशान घाट एवं चंद्रेश्वर नगर नाले का संपूर्ण सीवेज एसटीपी में उपच ारित किया जाता है, जबकि ढालवाला नाले के प्रवाह को क्षमता की सीमा तक ही एसटीपी में लिया जाता है।

मानसून काल एवं उसके पश्चात लगभग चार माह तक ढालवाला नाले में भूमिगत जल की मात्रा अधिक रहने के कारण जल की गुणवत्ता परीक्षण में प्रदूषण की मात्रा अत्यंत न्यून पाई जाती है। ढालवाला नाले के दोनों ओर ड्रोन सर्वे एवं परिवारों का सर्वेक्षण किया जा रहा है। प्रारंभिक रूप से 502 परिवार चिन्हित किए गए हैं, जिनमें से 38 परिवारों का सीवर सीधे नाले में तथा 84 परिवारों का ग्रे-वाटर नाले में प्रवाहित हो रहा है। सर्वेक्षण की प्रक्रिया जारी है तथा सभी आंकड़ों का सत्यापन किया जा रहा है। सीधे प्रवाहित हो रहे जल के नमूनों की जांच एनएबीएल प्रमाणित प्रयोगशाला से कराई जा रही है।

इस दौरान उप जिलाधिकारी ऋषिेकेश योगेश मेहरा, नगर आयुक्त राम कुमार बिनवाल, सीओ पुलिस पूर्णिमा गर्ग सहित अनुरक्षण इकाई, जल निगम, जल संस्थान, सिंचाई के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।


By Shashi Sharma

Shashi Sharma Working in journalism since 1985 as the first woman journalist of Uttarakhand. From 1989 for 36 years, she provided her strong services for India's top news agency PTI. Working for a long period of thirty-six years for PTI, he got her pen ironed on many important occasions, in which, by staying in Tehri for two months, positive reporting on Tehri Dam, which was in crisis of controversies, paved the way for construction with the power of her pen. Delivered.

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