चम्पावत ।*एनएचपीसी बनबसा सभागार में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में बजट-पूर्व संवाद कार्यक्रम सम्पन्न*

*जनभागीदारी, आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था और संतुलित विकास पर हुआ व्यापक मंथन*

एनएचपीसी बनबसा सभागार में माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आयोजित बजट-पूर्व संवाद कार्यक्रम में राज्य के समग्र विकास, आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था तथा जनभागीदारी को केंद्र में रखते हुए व्यापक विचार-विमर्श किया गया।

कार्यक्रम का संचालन अपर सचिव माननीय मुख्यमंत्री श्री मनमोहन मैनाली द्वारा किया गया।

इस अवसर पर सचिव वित्त श्री दिलीप जावलकर ने राज्य की आर्थिक प्रगति पर प्रकाश डालते हुए बताया कि पिछले पाँच वर्षों में उत्तराखण्ड के कैपिटल आउटले में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और यह राशि ₹7,534 करोड़ से बढ़कर ₹14,765 करोड़ तक पहुँच गई है। इसी अवधि में राज्य की जीडीपी वर्ष 2021-22 के ₹2,54,000 करोड़ से बढ़कर वर्तमान में ₹4,74,000 करोड़ हो गई है, जो लगभग 60 प्रतिशत वृद्धि को दर्शाती है। इसे राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

संवाद कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से आए जनप्रतिनिधियों, विभागीय अधिकारियों, विशेषज्ञों तथा हितधारकों ने अपने सुझाव प्रस्तुत किए।

ग्रामीण विकास को गति देने के लिए अनुदान में वृद्धि, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने, सीवर लाइन एवं शौचालय निर्माण, पंचायतों को सशक्त बनाने हेतु रिक्त भूमि के उपयोग तथा जिला पंचायत सदस्यों के लिए मानदेय एवं अध्ययन भ्रमण की व्यवस्था जैसे सुझाव दिए गए।

शहरी विकास के अंतर्गत नगर निकायों के बजट और संसाधनों में वृद्धि, पर्यावरण संरक्षण के लिए सोलर पैनल स्थापना, सड़कों और नालियों के बेहतर रखरखाव तथा रजिस्ट्री शुल्क का आंशिक हिस्सा नगर निगमों को उपलब्ध कराने के सुझाव रखे गए।

कृषि एवं उद्यान क्षेत्र में बागवानी और वैल्यू क्रॉप्स को बढ़ावा देने, कीवी और ब्लूबेरी जैसे फलों के उत्पादन को प्रोत्साहित करने, पोस्ट-हार्वेस्ट प्रबंधन और प्रोसेसिंग पर ध्यान केंद्रित करने, किसानों तथा विभागीय कार्मिकों के तकनीकी प्रशिक्षण, दूरस्थ क्षेत्रों के कृषकों को विशेष सहायता तथा फल उत्पादन सब्सिडी को 30 प्रतिशत से बढ़ाकर 80 प्रतिशत किए जाने के सुझाव सामने आए। उद्योग विकास के अंतर्गत पर्वतीय क्षेत्रों में उपलब्ध खाली भूमि पर उद्योग स्थापित कर स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन एवं पलायन रोकने, एमएसएमई को वित्तीय सहायता, सेवा क्षेत्र आधारित उद्योगों को बढ़ावा तथा औद्योगिक आधारभूत संरचना को मजबूत करने पर बल दिया गया।

महिला सशक्तिकरण के लिए प्रत्येक जनपद में प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने, महिलाओं को ब्याज-मुक्त ऋण उपलब्ध कराने तथा अस्पतालों की कैंटीन जैसी सेवाओं में महिलाओं को प्राथमिकता से रोजगार देने के सुझाव प्रस्तुत किए गए।

पर्यटन क्षेत्र में हैली सेवा का विस्तार, वैकल्पिक मार्गों का निर्माण, सस्टेनेबल टूरिज्म को बढ़ावा, छोटे पर्यटन स्थलों का विकास, नेचर टूरिज्म एवं ट्रैकिंग को प्रोत्साहन तथा एग्री-टूरिज्म के माध्यम से स्थानीय समुदाय को पर्यटन से जोड़ने की बात कही गई। इसके अतिरिक्त राज्य में सड़क निर्माण एवं चौड़ीकरण, ऊर्जा संकट के समाधान हेतु ऊर्जा नेटवर्क सुदृढ़ीकरण, कृषि आधारित उद्योगों पर जीएसटी में कमी, मंडी शुल्क में कमी, ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण एवं सौंदर्यीकरण, नगर निकायों को अधिक संसाधन उपलब्ध कराने तथा जिला पंचायतों को विकास कार्यों के लिए पर्याप्त बजट देने जैसे सुझाव भी प्राप्त हुए।

मुख्यमंत्री श्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं की सुरक्षा और स्वच्छता को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक गाँव में पिंक टॉयलेट जैसी सुविधाओं की दिशा में कार्य करेगी। उन्होंने वर्ष 2047 तक उत्तराखण्ड को हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि छोटा राज्य होने के बावजूद उत्तराखण्ड ने वित्तीय प्रबंधन में देशभर में अग्रणी स्थान प्राप्त किया है, जो गर्व का विषय है।

उन्होंने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए आश्वस्त किया कि प्राप्त सुझावों का गंभीरता से परीक्षण कर उन्हें आगामी बजट में यथासंभव सम्मिलित किया जाएगा, ताकि राज्य का संतुलित, समावेशी और सतत विकास सुनिश्चित हो सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट राज्य की दिशा तय करता है और यह नागरिकों की सहभागिता से ही प्रभावी बनता है। प्रत्येक वर्ग की अपेक्षाओं को ध्यान में रखते हुए सरकार निर्णय ले रही है। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि जिनके सुझाव अभी प्राप्त नहीं हुए हैं, वे भी अपने विचार प्रेषित करें, ताकि सभी की आवश्यकताओं पर ध्यान दिया जा सके।

उन्होंने कहा रजत जयंती वर्ष में राज्य ने अनेक उपलब्धियाँ हासिल की हैं और अब नए संकल्प के साथ विकसित उत्तराखण्ड की दिशा में आगे बढ़ना है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यदि सभी लोग अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करेंगे तो राज्य प्रगति के नए आयाम स्थापित करेगा और प्रत्येक निर्णय जनता की आकांक्षाओं के अनुरूप आगे बढ़ता रहेगा।

कार्यक्रम के दौरान श्री आर०के० सुधांशु प्रमुख सचिव वन, श्री दिलीप जावलकर, सचिव वित्त, श्री धीराज गर्ब्याल, सचिव पर्यटन, श्री नरेन्द्र सिंह भण्डारी, अपर सचिव नियोजन, श्री मनुज गोयल, अपर सचिव तकनीकि शिक्षा, श्री विनोद गोस्वामी, निदेशक शहरी विकास, श्री मनमोहन मैनाली, अपर सचिव मा० मुख्यमंत्री, श्री दीपक रावत, आयुक्त, कुमाऊँ मण्डल, श्री मनीष कुमार, जिलाधिकारी चम्पावत, श्री कृष्ण नाथ गोस्वामी, अपर जिलाधिकारी चम्पावत, डॉ० जी०एस० खाती, मुख्य विकास अधिकारी चम्पावत, श्री सौरभ गहरवार, महानिदेशक/आयुक्त, उद्योग,

श्री मनबर सिंह राणा, संयुक्त निदेशक, पचायती राज विभाग, श्रीमती पूनम चंद, अपर निदेशक पर्यटन, श्री संदीप भट्ट, उप मुख्य परियोजना अधिकारी, उरेडा, श्री पी०के० सिंह, संयुक्त निदेशक, कृषि कुमायूँ हल्द्वानी, श्री अशोक कुमार जोशी, निदेशक, डेयरी विकास, श्री अवीनाश कुमार, सहायक निदेशक, मत्स्य विभाग अल्मोड़ा, श्री महेन्द्र पाल, निदेशक, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण, श्री प्रदीप कुमार पाण्डे, ए०सी०ई०ओ०,

यू०एस०आर०एल०एम०, देहरादून,

श्री मेहरबान सिंह बिष्ट, अपर सचिव, ऊर्जा विभाग, श्री संदीप भट्ट, उप मुख्य परियोजना अधिकारी, उरेडा, डॉ बी०वी०आर०सी० पुरुषोत्तम, सचिव डेयरी,श्री अशोक कुमार जोशी, निदेशक डेयरी, श्री दिनेश कुमार, निदेशक उद्यान, डॉ० वी०एन० खाली, निदेशक उच्च शिक्षा हल्द्वानी, डॉ० एम०एस० मंडरवाल, रजिस्ट्रार, कुमाऊँ विश्वविद्यालय नैनीताल, डॉ० अनिल कुमार, एम०डी०, यू०पी०सी०एल०, श्री आनन्द सिंह अधिकारी, अध्यक्ष जिला पंचायत, चम्पावत, हेमा गैड़ा, अध्यक्ष, जिला पंचायत, अल्मोड़ा, श्री अजय वर्मा, महापौर अल्मोड़ा, श्री गजराज सिंह बिष्ट, महापौर, हल्द्वानी, श्रीमती कल्पना देवलाल, महापौर, पिथौरागढ़, श्री सुरेश खेतवाल, जिला पंचायत अध्यक्ष, बागेश्वर, श्रीमती रेखा देवी, अध्यक्ष, नगर पंचायत बनबसा, श्रीमती प्रेमा पाण्डेय, अध्यक्ष, नगर पालिका परिषद, चम्पावत, श्री गोविन्द वर्मा, अध्यक्ष, नगर पालिका परिषद, लोहाघाट, श्री विपिन कुमार, अध्यक्ष, नगर पालिका परिषद, टनकपुर,श्री विकास वर्मा, माननीय महापौर, रूद्रपुर, समस्त जिला स्तरीय अधिकारी, चम्पावत,विभिन्न विभागों / संगठनों के प्रतिनिधिगण,विभिन्न विभागों / संगठनों के हितधारक, बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।


By Shashi Sharma

Shashi Sharma Working in journalism since 1985 as the first woman journalist of Uttarakhand. From 1989 for 36 years, she provided her strong services for India's top news agency PTI. Working for a long period of thirty-six years for PTI, he got her pen ironed on many important occasions, in which, by staying in Tehri for two months, positive reporting on Tehri Dam, which was in crisis of controversies, paved the way for construction with the power of her pen. Delivered.

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