प्रवासी भारतीय दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ*

महान पर्यावरणविद् सुंदरलाल बहुगुणा जी की जयंती पर उनकी साधना को नमन*

प्रवासी भारतीयों ने यह सिद्ध किया है कि दूरी केवल भौगोलिक होती है, भावनात्मक नहीं। हजारों मील दूर रहते हुए भी उनका मन गंगा के तट पर बहता है, हिमालय की शांति में विश्राम करता है और भारत माता की मिट्टी से शक्ति पाता है*

ऋषिकेश, 9 जनवरी। परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने प्रवासी भारतीय दिवस के अवसर पर कहा कि यह दिवस भारत की जीवंत संस्कृति, आत्मिक चेतना और वैश्विक जुड़ाव का उत्सव है। उन्होंने कहा कि प्रवासी भारतीयों ने सीमाओं को पार करते हुए भी भारत को अपने हृदय में सदा जीवित रखा है, इसलिए यह दिन केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि उस भावनात्मक रिश्ते का महोत्सव है जो भारत को अपने संतानों से जोड़ता है।

स्वामी जी ने कहा कि यह दिन उन करोड़ों भारतीयों की साधना, सेवा और संकल्प का जश्न है, जिन्होंने विश्व के कोने-कोने में जाकर अपने परिश्रम, प्रतिभा, संस्कृति और संस्कारों से भारत का गौरव बढ़ाया है। प्रवासी भारतीय भारत के संदेश के संवाहक और संस्कृति के राष्ट्रदूत हैं, जो “वसुधैव कुटुम्बकम्” के संदेश को विश्वभर में प्रसारित कर रहे हैं।

भारतीय प्रवासी समुदाय आज वैश्विक मंच पर भारत की सबसे सशक्त पहचान बन चुका है। वे केवल आर्थिक योगदानकर्ता नहीं हैं, बल्कि भारत के चिंतन के संवाहक हैं। उन्होंने जहाँ-जहाँ कदम रखा, वहाँ भारतीय संस्कृति की सुगंध फैलायी, योग, आयुर्वेद, अध्यात्म, सेवा, सहिष्णुता और “वसुधैव कुटुम्बकम्” के आदर्शों को जीवंत किया।

प्रवासी भारतीय आज भारत और विश्व के बीच एक सशक्त सेतु हैं। वे हमारी सभ्यता के दूत हैं, हमारी परंपराओं के रक्षक हैं और हमारी आधुनिक उपलब्धियों के वैश्विक प्रचारक हैं।

प्रवासी भारतीयों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उन्होंने आधुनिकता को अपनाया, पर अपनी जड़ों को नहीं छोड़ा। उन्होंने विदेशी भूमि पर भी दीपावली के दीप जलाए, होली के रंग बिखेरे, गुरुपर्व की सेवा निभाई, पर्वों की सौहार्द्रता को जिया। इस समन्वय ने भारत को विश्व में एक समावेशी, सहिष्णु और आध्यात्मिक राष्ट्र के रूप में स्थापित किया।

आज जब विश्व अनेक चुनौतियों से गुजर रहा है, तब भारतीय प्रवासी समुदाय ने यह सिद्ध किया है कि भारतीयता केवल पासपोर्ट की पहचान नहीं, बल्कि चेतना की पहचान है। संकट की घड़ी में चाहे प्राकृतिक आपदाएँ हों, महामारी हो या सामाजिक चुनौतियाँ, प्रवासी भारतीय सदैव सेवा, सहयोग और संवेदना के साथ आगे आए हैं।

भारत सरकार द्वारा प्रवासी भारतीयों को और अधिक निकट लाने हेतु किए गए प्रयास इस संबंध को और सशक्त बना रहे हैं। ओवरसीज सिटिजनशिप ऑफ इंडिया, प्रवासी भारतीय सहायता केंद्र, निवेश और नवाचार के मंच, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, शिक्षा और स्टार्टअप सहयोग, ये सभी पहल इस बात का प्रमाण हैं कि भारत अपने प्रवासी परिवार को केवल याद नहीं करता, बल्कि उसे साथ लेकर आगे बढ़ना चाहता है।

आज का भारत एक नया आत्मविश्वास लेकर विश्व मंच पर खड़ा है। यह आत्मविश्वास केवल सीमाओं के भीतर नहीं, बल्कि प्रवासी भारतीयों के हृदयों में भी धड़कता है। जब कोई प्रवासी वैज्ञानिक खोज करता है, जब कोई उद्यमी वैश्विक कंपनी खड़ी करता है, जब कोई कलाकार भारतीय संस्कृति को मंच देता है, जब कोई शिक्षक भारतीय मूल्यों को अगली पीढ़ी तक पहुँचाता है, तब भारत स्वयं गौरवान्वित होता है।

प्रवासी भारतीयों ने यह सिद्ध किया है कि दूरी केवल भौगोलिक होती है, भावनात्मक नहीं। हजारों मील दूर रहते हुए भी उनका मन गंगा के तट पर बहता है, हिमालय की शांति में विश्राम करता है और भारत माता की मिट्टी से शक्ति पाता है।

स्वामी जी ने कहा कि प्रवासी भारतीय दिवस हमें यह भी स्मरण कराता है कि भारत केवल एक राष्ट्र नहीं, बल्कि एक विचार है, एक ऐसा विचार जो सीमाओं से परे है, भाषाओं से परे है और समय से परे है। यह विचार सेवा, सत्य, सह-अस्तित्व और समरसता का विचार है।

आज आवश्यकता है कि हम अपने प्रवासी भाइयों और बहनों को केवल सम्मान न दें, बल्कि उनकी वैश्विक दृष्टि, उनके अनुशासन, उनकी नवाचार क्षमता और उनके समर्पण से सीखें भी। साथ ही, हम उन्हें भारत की आध्यात्मिक शक्ति, सांस्कृतिक गहराई और मानवीय संवेदनशीलता से और अधिक जोड़ें।

युवा पीढ़ी के प्रवासी भारतीय आज भारत के भविष्य के सेतु हैं। वे तकनीक, शोध, उद्यमिता और रचनात्मकता के माध्यम से भारत को नई ऊँचाइयों तक ले जा सकते हैं। भारत को भी चाहिए कि वह उन्हें अवसर, विश्वास और सहयोग प्रदान करे, ताकि वे गर्व से कह सकें “हम जहाँ भी हैं, भारत हमारे साथ है।”

प्रवासी भारतीय दिवस हमें यह संदेश देता है कि भारत की शक्ति उसकी सीमाओं में नहीं, बल्कि उसके लोगों के हृदयों में है चाहे वे देश में हों या विदेश में। भारत आप पर गर्व करता है और भारत आपके साथ मिलकर एक उज्ज्वल, समरस और सशक्त भविष्य का निर्माण करना चाहता है।

महान पर्यावरणविद् सुंदरलाल बहुगुणा जी की जयंती पर आज की परमार्थ गंगा आरती उन्हें समर्पित करते हुये कहा कि उन्होंने चिपको आंदोलन के माध्यम से प्रकृति संरक्षण को जनआंदोलन बनाया। उनका संघर्ष, त्याग और समर्पण हमें पृथ्वी के प्रति उत्तरदायी बनने की प्रेरणा देता है। उनकी जयंती पर इस हरित प्रहरी की साधना को नमन।


By Shashi Sharma

Shashi Sharma Working in journalism since 1985 as the first woman journalist of Uttarakhand. From 1989 for 36 years, she provided her strong services for India's top news agency PTI. Working for a long period of thirty-six years for PTI, he got her pen ironed on many important occasions, in which, by staying in Tehri for two months, positive reporting on Tehri Dam, which was in crisis of controversies, paved the way for construction with the power of her pen. Delivered.

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