राजमाता जीजाबाई एवं स्वामी विवेकानन्द जी की जयंती पर भावभीनी श्रद्धाजंलि*

राष्ट्रीय युवा दिवस पर भारत की युवा शक्ति को अनेकानेक शुभकामनायें*

माघ मेला के दौरान त्रिवेणी पुष्प, प्रयागराज में पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी से भेंट व दर्शनार्थ आये प्रयागराज हाईकोर्ट के निर्वतमान सीनियर जज श्री सुधीर मेमन जी, अनेक अधिवक्तावृंद, न्यायपालिका की विशिष्ट विभूतियां*

युवा सोशल मीडिया से आगे बढ़कर ‘सोशल सेवा’ की ओर कदम बढ़ाएँ*

स्वामी चिदानन्द सरस्वती*

ऋषिकेश, प्रयागराज। राजमाता जीजाबाई एवं स्वामी विवेकानन्द जी की जयंती तथा राष्ट्रीय युवा दिवस के पावन अवसर पर परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश के अध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने समस्त देशवासियों, विशेषकर युवाओं को हार्दिक शुभकामनाएँ एवं मंगलकामनाएँ माघ मेला प्रयागराज से दी।

आज माघ मेला के दौरान परमार्थ त्रिवेणी पुष्प, प्रयागराज में दर्शनार्थ आये प्रयागराज हाईकोर्ट के निर्वतमान सीनियर जज श्री सुधीर मेमन जी, अनेक अधिवक्तावृंद, न्यायपालिका की विशिष्ट विभूतियां, उन्होेंने पूज्य स्वामी जी से कहा कि आपने प्रयागराज में त्रिवेणी पुष्प के रूप में एक नया परमार्थ निकेतन बना दिया है, जो दर्शन, संस्कार व संस्कृति का अद्भुत केन्द्र बनकर उभर रहा है। यहां पर प्रतिदिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु आते है और इस दिव्य व भव्यता के साथ दिव्य संगम आरती का दर्शन करते हैं।

पूज्य स्वामी जी के पावन सान्निध्य में श्री सुधीर मेमन जी और सभी अधिवक्तावृंद ने अमर जवान ज्योति, इण्डिया गेट के दर्शन कर शहीदों को श्रद्धाजंलि दी। इस अवसर पर स्वामी जी देवभक्ति के साथ देश भक्ति का संदेश दिया।

 

पूज्य स्वामी जी ने कहा कि राजमाता जीजाबाई, शिवाजी की माँ के साथ राष्ट्रनिर्माता संस्कारों की अमर प्रतिमा थीं। उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज को केवल जन्म ही नहीं दिया, बल्कि उन्हें राष्ट्र, धर्म और संस्कृति के संरक्षण के लिए जीने की दिशा दी। जीजाबाई जी ने शिवाजी के हृदय में साहस, स्वाभिमान, करुणा और धर्मरक्षा का जो बीज बोया, वही आगे चलकर हिंदवी स्वराज्य के विराट वटवृक्ष में परिवर्तित हुआ। उन्होंने कहा कि जीजाबाई ने संदेश दिया कि जब माँ जाग्रत होती है, तब राष्ट्र सुरक्षित होता है।

पूज्य स्वामी जी ने कहा कि आज के समय में जीजाबाई जी का जीवन प्रत्येक माता-पिता के लिए प्रेरणा है कि बच्चों को केवल सुविधाएँ ही नहीं, बल्कि संस्कार, चरित्र और राष्ट्रप्रेम की चेतना भी दें। आज भारत को ऐसी ही मातृशक्ति और संस्कारयुक्त पीढ़ी की आवश्यकता है जो स्वार्थ से ऊपर उठकर राष्ट्र के लिए समर्पित हो।

स्वामी विवेकानन्द जी की जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए पूज्य स्वामी जी ने कहा कि स्वामी विवेकानन्द जी युगद्रष्टा, युगनिर्माता और युवा चेतना के महामंत्र थे। उन्होंने भारत की आत्मा को पहचान कर उसे विश्व मंच पर गौरव के साथ प्रतिष्ठित किया। शिकागो की धरती पर दिया गया उनका उद्घोष आज भी हर भारतीय के हृदय में आत्मगौरव और आत्मविश्वास की ज्वाला प्रज्वलित करता है।

पूज्य स्वामी जी ने कहा कि स्वामी विवेकानन्द जी ने युवाओं को संदेश दिया कि “उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक रुको मत।” यह केवल वाक्य नहीं, बल्कि जीवन का मार्गदर्शन है। उन्होंने युवाओं को भयमुक्त होकर अपने कर्तव्य का निर्वाह करने, चरित्र निर्माण करने और सेवा को जीवन का मूल उद्देश्य बनाने की प्रेरणा दी। श्री रामकृष्ण मिशन के माध्यम से उन्होंने अध्यात्म और समाजसेवा के अद्भुत समन्वय का उदाहरण प्रस्तुत किया।

राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर पूज्य स्वामी जी ने कहा कि भारत का भविष्य युवाओं के हाथों में है। यदि युवा चरित्रवान, संवेदनशील, संस्कारित और राष्ट्रनिष्ठ होंगे, तो भारत स्वतः ही विकसित, समृद्ध और विश्वगुरु बनेगा। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे केवल नौकरी और सफलता तक सीमित न रहें, बल्कि अपने जीवन को समाज, राष्ट्र और मानवता की सेवा से जोड़ें।

पूज्य स्वामी जी ने कहा कि विकसित भारत का निर्माण केवल भौतिक प्रगति से नहीं, बल्कि नैतिक मूल्यों, करुणा, सहिष्णुता और आत्मिक चेतना से होगा। जब युवा अपने भीतर विवेकानन्द जी का साहस और जीजाबाई जी के संस्कार धारण करेंगे, तभी भारत सशक्त, सुरक्षित और समरस बनेगा।

पूज्य स्वामी जी ने कहा कि आज आवश्यकता है कि युवा सोशल मीडिया से आगे बढ़कर ‘सोशल सेवा’ की ओर कदम बढ़ाएँ। केवल पोस्ट करने से नहीं, बल्कि स्वयं को राष्ट्रनिर्माण के कार्यों में समर्पित हो।

आइए, हम सब मिलकर एक ऐसे भारत का निर्माण करें जो केवल विकसित ही नहीं, बल्कि दिव्य, करूणामय और धर्मनिष्ठ हो। परमार्थ निकेतन की ओर से समस्त देशवासियों को राजमाता जीजाबाई जी एवं स्वामी विवेकानन्द जी की जयंती तथा राष्ट्रीय युवा दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।


By Shashi Sharma

Shashi Sharma Working in journalism since 1985 as the first woman journalist of Uttarakhand. From 1989 for 36 years, she provided her strong services for India's top news agency PTI. Working for a long period of thirty-six years for PTI, he got her pen ironed on many important occasions, in which, by staying in Tehri for two months, positive reporting on Tehri Dam, which was in crisis of controversies, paved the way for construction with the power of her pen. Delivered.

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