-लोक संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन में सेवा संकल्प फाउंडेशन की भूमिका की सराहना

-उत्तराखंड की लोक कलाओं, हस्तशिल्प और परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प

-रिवर्स पलायन में 44% वृद्धि, किसानों की आय बढ़ाने में देश में प्रथम स्थान

-पर्यटन, स्टार्टअप, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में उत्तराखंड को राष्ट्रीय पहचान

-लोक कलाकारों को पेंशन, आर्थिक सहायता और गुरु-शिष्य परंपरा से प्रशिक्षण

-‘विकल्प रहित संकल्प’ के साथ सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण हेतु सरकार प्रतिबद्ध

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी परेड ग्राउंड में सेवा संकल्प फाउंडेशन द्वारा आयोजित चार दिवसीय उत्तरायणी कौथिक महोत्सव के समापन कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। इस अवसर पर उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित लोक कलाकारों, साहित्यकारों, कला-प्रेमियों एवं बड़ी संख्या में उपस्थित जनता का स्वागत एवं अभिनंदन किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सेवा संकल्प फाउंडेशन द्वारा आयोजित यह महोत्सव उत्तराखंड की समृद्ध लोक-सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत बनाए रखने का सराहनीय प्रयास है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों के माध्यम से लोक संस्कृति को एक सूत्र में पिरोकर भावी पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य किया जा रहा है।

उन्होंने महोत्सव के सफल आयोजन के लिए सेवा संकल्प फाउंडेशन, इसकी संस्थापक श्रीमती गीता धामी एवं समस्त आयोजन समिति को साधुवाद देते हुए कहा कि इस प्रकार के सांस्कृतिक आयोजन राज्य की पहचान को और अधिक सशक्त करते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन आयोजनों के माध्यम से लोक कलाओं, पारंपरिक वेशभूषा, हस्तशिल्प एवं कारीगरी को नजदीक से जानने और समझने का अवसर प्राप्त होता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जागर, बेड़ा, मांगल, खुदेड़, छोपाटी जैसे लोकगीतों तथा छोलिया, पांडव और झोड़ा-छपेली जैसे लोकनृत्य उत्तराखंड की सांस्कृतिक आत्मा हैं, जिन्हें संरक्षित करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने चार दिवसीय आयोजन में लगे स्टॉलों के माध्यम से पारंपरिक हस्तशिल्प, जैविक उत्पादों एवं उत्तराखंडी व्यंजनों के सुंदर प्रदर्शन की भी सराहना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण के साथ-साथ ‘वोकल फॉर लोकल’, ‘मेक इन इंडिया’, ‘मेड इन इंडिया’ और ‘स्टार्टअप इंडिया’ जैसी पहलों के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में उत्तराखंड सरकार द्वारा भी राज्य के समग्र विकास के लिए अनेक योजनाएं और नीतियां प्रभावी रूप से लागू की गई हैं।

उन्होंने बताया कि ‘एक जनपद, दो उत्पाद’ योजना और ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ ब्रांड के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई जा रही है। इसके साथ ही स्टेट मिलेट मिशन, फार्म मशीनरी बैंक, एप्पल मिशन, कीवी मिशन, नई पर्यटन नीति, नई फिल्म नीति, होम स्टे, वेड इन उत्तराखंड और सौर स्वरोजगार योजना जैसी पहलों से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बीते साढ़े चार वर्षों में उत्तराखंड ने अनेक उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। पलायन निवारण आयोग की रिपोर्ट के अनुसार राज्य में रिवर्स पलायन में 44 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। किसानों की आय बढ़ाने में उत्तराखंड ने देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है तथा युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने में भी राज्य अग्रणी बनकर उभरा है।

उन्होंने बताया कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में उत्तराखंड को ‘अचीवर्स’ और स्टार्टअप रैंकिंग में ‘लीडर्स’ की श्रेणी प्राप्त हुई है। सिंगल विंडो सिस्टम को ‘टॉप अचीवर्स’ श्रेणी में पुरस्कृत किया गया है। नीति आयोग के सतत विकास लक्ष्य सूचकांक 2023-24 में उत्तराखंड ने देश में प्रथम स्थान हासिल किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य खनन तत्परता सूचकांक में उत्तराखंड को श्रेणी-सी में देश में दूसरा स्थान मिला है। लॉजिस्टिक्स परफॉर्मेंस में भी राज्य को अचीवर्स श्रेणी में स्थान मिला है। राष्ट्रीय मतदाता दिवस पर मिले पुरस्कार ने उत्तराखंड की निष्पक्ष और पारदर्शी निर्वाचन व्यवस्था को प्रमाणित किया है।

पर्यटन क्षेत्र में उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड को बेस्ट वाइल्डलाइफ और बेस्ट एडवेंचर डेस्टिनेशन के राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। राष्ट्रीय पर्यटन पुरस्कार 2024 में जाखोल, हर्षिल, गुंजी और सूपी गांवों को सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांव घोषित किया गया है। वर्ल्ड रिस्पॉन्सिबल टूरिज्म अवार्ड में राज्य को ‘वन टू वॉच’ पुरस्कार मिला है।

कृषि और मत्स्य क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में मत्स्य विकास के लिए उत्तराखंड को सर्वश्रेष्ठ राज्य का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है। हाल ही में हैदराबाद में आयोजित अंतरराष्ट्रीय विमानन सम्मेलन में राज्य को ‘बेस्ट स्टेट फॉर प्रोमोशन ऑफ एविएशन इकोसिस्टम’ सम्मान से नवाजा गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार लोक कलाकारों के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। लोक कलाकारों की सत्यापित सूची तैयार कर कोरोना काल में लगभग 3,200 कलाकारों को प्रतिमाह आर्थिक सहायता दी गई। 60 वर्ष से अधिक आयु के वृद्ध एवं अस्वस्थ लोक कलाकारों को पेंशन प्रदान की जा रही है। गुरु-शिष्य परंपरा के अंतर्गत लोक प्रशिक्षण कार्यशालाओं का आयोजन भी किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि सरकार लोक सांस्कृतिक लिपियों के प्रकाशन, आर्ट गैलरियों की स्थापना तथा साहित्य और संस्कृति के संरक्षण के लिए भी निरंतर प्रयासरत है। साहित्यकारों को सम्मान और ग्रंथ प्रकाशन हेतु अनुदान प्रदान किया जा रहा है तथा स्थानीय भाषाओं और बोलियों के संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि सेवा संकल्प फाउंडेशन जैसी संस्थाएं भविष्य में भी उत्तराखंड की लोक संस्कृति और परंपराओं को सहेजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रहेंगी।

सेवा संकल्प फाउंडेशन की फाउंडर ट्रस्टी श्रीमती गीता धामी ने कहा कि बीते 4 दिनों से इस महोत्सव के माध्यम से उत्तराखंड की लोक संस्कृति को जीवंत रखने का कार्य किया गया है। इस महोत्सव में उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, पारंपरिक उत्पाद, जीवनशैली को सुंदर रूप में प्रस्तुत किया गया। उन्होंने कहा इस महोत्सव का शुभारंभ शंखनाद से हुआ था। इस कार्यक्रम का सफल आयोजन सभी की मेहनत का फल है।

श्रीमती गीता धामी ने कहा कि उत्तरायणी कौथिक में पूरे राज्य से लोग आए। यह मात्र संस्था का नहीं बल्कि पूरे राज्य का आयोजन है। जिसमें पूरे राज्य से लोगों ने प्रतिभाग किया है। हमने इस कौथिक के माध्यम से पूरे राज्य की संस्कृति एक मंच पर दिखाया। उन्होंने कहा युवा पीड़ी को इतिहास से जोड़ते हुए उनका भविष्य बनाना है। उन्होंने कहा हमने अपने भविष्य को अपनी जड़ों से जोड़े रखना है।

श्रीमती गीता धामी ने कहा कि आधुनिकता के साथ संस्कृति का संरक्षण भी बेहद जरूरी है। जब तक संस्कृति जीवित है, तब तक हमारी पहचान और सम्मान है। हमारी सनातन संस्कृति ही सबसे पुरातन संस्कृति है। हमें गर्व है कि हम उत्तराखंड और भारत के लोग हैं। उन्होंने सभी से उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों की अधिक से अधिक खरीदारी करने की बात कही। उन्होंने कहा जिससे हम राज्य के अर्थव्यवस्था को बढ़ा सके और उत्तराखंड को आत्मनिर्भर उत्तराखंड बनाएं।

श्रीमती गीता धामी ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश ने विकास की नई ऊंचाइयों को छुआ है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य में सबसे पहले समान नागरिक संहिता लागू हुआ, सख्त नकल विरोधी लागू कर हजारों लोगों को रोजगार दिया है। आज उत्तराखंड नए आयाम स्थापित कर रहा है।

कार्यक्रम में पूर्व राज्यपाल, पूर्व मुख्यमंत्री पद्म भूषण भगत सिंह कोश्यारी, कैबिनेट मंत्री श्री सतपाल महाराज, अध्यक्ष केन्द्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड पद्मश्री प्रसून जोशी, राज्यसभा सांसद कल्पना सैनी, विधायक श्री खजान दास, विधायक दुर्गेश्वर लाल, विधायक अनिल नौटियाल, विधायक भोपाल राम टम्टा, विधायक सुरेश गढ़िया, श्री सुरेश चौहान, श्री अजेय कुमार, श्रीमती बिशना देवी, श्रीमती अपर्णा जोशी, डीजीपी श्री दीपम सेठ, दायित्वधारी राज्य मंत्री श्री हेमराज बजरंगी, श्रीमती मधु भट्ट, डॉ. गीता खन्ना, गीताराम गौड़, विश्वास डाबर, श्याम अग्रवाल, श्रीमती विनोद उनियाल, नेहा शर्मा, हरक सिंह, मुकेश कुमार, ज्योति गैरोला, एवं अन्य लोग मौजूद रहे।


By Shashi Sharma

Shashi Sharma – Senior Woman Journalist

Shashi Sharma has been active in journalism since 1985, holding the distinction of being Uttarakhand's first female journalist.

For 36 years, starting in 1989, she rendered distinguished service to India's premier news agency, PTI. During this long tenure, she demonstrated the power of her writing on numerous significant occasions; notably, she spent two months in Tehri reporting positively on the Tehri Dam—which was then mired in controversy—and used her pen to help pave the way for its construction.

Currently, Mrs. Shashi Sharma runs the news portal *Newsok24.com* and serves as the editor of the weekly newspaper *Desh Nirdesh*; she is also a registered anchor and commentator for Delhi Doordarshan.

शशि शर्मा वरिष्ठ महिला पत्रकार शशि शर्मा उत्तराखंड की पहली महिला पत्रकार के तौर पर 1985 से पत्रकारिता में कार्यरत हैं। 1989 से 36 वर्षों तक उन्होंने भारत की शीर्ष समाचार एजेंसी पीटीआई के लिए अपनी सशक्त सेवाएं दीं। छत्तीस वर्षों की लंबी अवधि तक पीटीआई के लिए काम करते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण मौकों पर अपनी कलम का लोहा मनवाया, जिसमें दो महीने तक टिहरी में रहकर विवादों के संकट में रहे टिहरी बांध पर सकारात्मक रिपोर्टिंग कर अपनी कलम की ताकत से निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया। वर्तमान में श्रीमती शशि शर्मा Newsok24 com न्यूज पोर्टल को चला रहीं हैं और साप्ताहिक समाचार पत्र देश निर्देश की सम्पादक होने के साथ ही दिल्ली दूरदर्शन की रजिस्टर्ड एंकर और कमेंटेटर भी हैं।

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