परमार्थ निकेतन में कथाव्यास श्री निकुंज जी महाराज के पावन श्रीमुख से श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा हो रही प्रवाहित*

पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी का पावन सान्निध्य, आशीर्वाद व उद्बोधन*

लंदन से आये कथा यजमान रीटा बेन, श्री राकेश भाई जोशी जी और सम्पूर्ण जोशी परिवार व ईष्ट मित्र श्रीमद भागवत कथा, परमार्थ गंगा आरती, प्रातःकालीन यज्ञ और परमार्थ निकेतन में होने वाली आध्यात्मिक गतिविधियों को कर रहे आत्मसात*

संगीतकार वृंद के मधुर संगीत से पूरा वातावरण हुआ संगीतमय*

ऋषिकेश, 23 फरवरी। परमार्थ निकेतन में कथाव्यास श्री निकुंज जी महाराज के पावन श्रीमुख से श्रीमद्भागवत महापुराण की अमृतमयी कथा ज्ञान गंगा के रूप में प्रवाहित हो रही है, जिसमें लंदन से आये भक्त, श्रद्धालु आत्मिक शांति, भक्ति और जीवन दर्शन का दिव्य अनुभव प्राप्त कर रहे हैं। यह दिव्य कथा संदेेश दे रही है कि सनातन संस्कृति की जड़ें आज भी समाज के हृदय में गहराई से समाई हुई हैं। चाहे हम भारत में रह रहे हों या विदेश में, सनातन तो सभी के हृदय में समाहित है।

इस पावन अवसर पर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष, स्वामी शुकदेवानन्द ट्रष्ट के मैनेजिंग ट्रष्टी, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी का सान्निध्य, आशीर्वाद और प्रेरणादायी उद्बोधन ने सभी श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। अपने संदेश में उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा जीवन का दर्शन है, जीवन जीने की कला है। यह ग्रंथ हमें करुणा, सेवा, समर्पण और ईश्वर प्रेम का मार्ग दिखाता है। उन्होंने सभी का आह्वान करते हुये कहा कि कथा के माध्यम से प्राप्त ज्ञान को व्यवहार में उतारें और समाज व राष्ट्र निर्माण में योगदान दें।

परमार्थ निकेतन गंगा तट पर कथा करवाने हेतु विशेष रूप से लंदन से पधारे कथा यजमान रीटा बेन, श्री राकेश भाई जोशी जी तथा सम्पूर्ण जोशी परिवार अपने इष्ट मित्रों सहित पधारे हैं। वे कथा श्रवण करने के साथ ही परमार्थ निकेतन की विभिन्न आध्यात्मिक गतिविधियों, गंगा आरती, प्रातःकालीन यज्ञ, ध्यान-साधना और सत्संग को भी आत्मसात कर रहे हैं। विदेशी भूमि से आए इन भक्तों का उत्साह यह संदेश देता है कि सनातन धर्म की महिमा विश्वभर में लोगों को आकर्षित कर रही है।

प्रतिदिन सायंकाल आयोजित होने वाली परमार्थ गंगा आरती में भक्तों की भावपूर्ण उपस्थिति से सम्पूर्ण वातावरण दिव्यता से ओत-प्रोत हो उठता है। माँ गंगा के तट पर दीपों की ज्योति, वेद मंत्रों की गूँज और भजनों की मधुर ध्वनि मन को अद्भुत शांति प्रदान करती है। ऐसा प्रतीत होता है मानो स्वयं प्रकृति भी इस आध्यात्मिक उत्सव में सम्मिलित होकर भक्ति की धारा में बह रही हो।

संगीतकार वृंद के मधुर भजनों और वाद्य यंत्रों की स्वर लहरियों ने कथा स्थल को संगीतमय बना रही है। भजन श्रद्धालुओं के हृदय को छूते हुआ उन्हें भक्ति रस में सराबोर कर रहा है। परमार्थ निकेतन का स्वर्गतुल्य दिव्य वातावरण, संगीत, कथा और साधना का यह संगम उपस्थित जनसमूह के लिए अविस्मरणीय अनुभव है।

कथाव्यास श्री निकुंज जी महाराज अपनी सरल, मधुर और प्रभावशाली वाणी में भागवत के प्रसंगों के माध्यम से जीवन के गूढ़ सत्य का दर्शन करा रहे हैं। उन्होंने बताया कि जब हम अपने जीवन में भगवान के नाम, सेवा और सत्संग को स्थान देते हैं, तब भीतर की नकारात्मकता स्वतः समाप्त हो जाती है। भागवत कथा हमें संदेश देती है कि सच्चा सुख बाहरी भोगों में नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धता और ईश्वर के साथ संबंध में निहित है।

श्रीमती रीटा बेन व श्री रमेश भाई जोशी जी ने कहा कि हमारा परम सौभाग्य है कि परमार्थ निकेतन के दिव्य प्रांगण में हमें नौ दिनों तक कथा श्रवण करने का परम सौभाग्य प्राप्त हो रहा रहे।

भागवत ज्ञान गंगा समाज को सकारात्मक ऊर्जा, नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक जागरण की ओर प्रेरित करने का एक सशक्त माध्यम है। परमार्थ निकेतन में प्रवाहित हो रही श्रीमद्भागवत कथा श्रद्धालुओं के जीवन में नई आशा, विश्वास और आध्यात्मिक प्रकाश का संचार कर रही है। इस तरह के आयोजन सनातन संस्कृति की दिव्यता का जीवंत उदाहरण है, जो मानवता को प्रेम, सेवा और सद्भाव का संदेश देते हैं। ऐसी पावन कथाएँ समाज को जोड़ने, संस्कारों को सुदृढ़ करने और राष्ट्र को आध्यात्मिक रूप से सशक्त बनाने का माध्यम हैं।


By Shashi Sharma

Shashi Sharma Working in journalism since 1985 as the first woman journalist of Uttarakhand. From 1989 for 36 years, she provided her strong services for India's top news agency PTI. Working for a long period of thirty-six years for PTI, he got her pen ironed on many important occasions, in which, by staying in Tehri for two months, positive reporting on Tehri Dam, which was in crisis of controversies, paved the way for construction with the power of her pen. Delivered.

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