सामूहिक चेतना, सेवा और करुणा का दिव्य संगम*
परमार्थ निकेतन में इंडियन स्पिरिचुअल कॉन्फेडरेशन का दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन*
साध्वी भगवती सरस्वती जी, डॉ. विनय सहस्रबुद्धे जी, डॉ. राजेश रंजन जी और अन्य विभूतियों ने उद्घाटन सत्र का शुभारम्भ किया*
पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के पावन सान्निध्य में समापन सत्र का आगाज*
सेवा में एकजुटता, चेतना में एकत्व, मानवता के लिए करुण का दिव्य संदेश*
चेतना में एकत्व सनातन संस्कृति का मूल संदेश*
स्वामी चिदानन्द सरस्वती*
*करुणा सनातन धर्म की आत्मा और उसका प्राण*
*साध्वी भगवती सरस्वती*
ऋषिकेश। भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं, संस्कृति और वैश्विक कल्याण की भावना को एक सशक्त सामूहिक स्वर देने के उद्देश्य से इंडियन स्पिरिचुअल कॉन्फेडरेशन द्वारा 28 फरवरी से 1 मार्च 2026 तक दो दिवसीय राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश में किया। कलेक्टिव कॉन्ट्रिब्यूशन टू केयर विषय पर आधारित यह सम्मेलन सेवा, समन्वय और आध्यात्मिक एकता का जीवंत उदाहरण है।
इंडियन स्पिरिचुअल कॉन्फेडरेशन की स्थापना भारतीय आध्यात्मिक संगठनों को एक मंच प्रदान कर भारतीय संस्कृति, सनातन मूल्यों और आध्यात्मिक ज्ञान को वैश्विक स्तर पर संरक्षित, प्रोत्साहित और प्रसारित करने के उद्देश्य से की गई। वर्षों से अनेक संस्थाएँ शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, मानसिक संतुलन, आपदा राहत, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक पुनर्जागरण जैसे क्षेत्रों में मौन किंतु प्रभावी सेवा कार्य कर रही हैं। इस सम्मेलन के माध्यम से इन प्रयासों को एक साझा पहचान, समन्वित दिशा और अंतरराष्ट्रीय दृष्टि प्रदान की जाएगी।
सम्मेलन का केंद्रीय संदेश भारतीय संस्कृति के मूल सिद्धांतों, सेवा, निस्वार्थ कर्म, करुणा, दया और लोक कल्याण, सर्वजन हिताय पर आधारित है। यह आयोजन विचार-विमर्श के साथ ‘एक साथ चलने’ की भावना को मूर्त रूप देने का प्रयास है, जहाँ सभी संगठन “मैं” से ऊपर उठकर “हम” की चेतना में कार्य करने हेतु संकल्पित हैं।
पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि चेतना में एकत्व सनातन संस्कृति का मूल संदेश है। यह अनुभूति कराती है कि समस्त सृष्टि में वही एक परम चेतना प्रवाहित है, वही आत्मा सबमें विद्यमान है। जब हम स्वयं को दूसरों से अलग नहीं, बल्कि जुड़ा हुआ अनुभव करते हैं, तभी प्रेम, करुणा और सहअस्तित्व का भाव जागृत होता है। “अहं ब्रह्मास्मि” और “वसुधैव कुटुम्बकम्” सर्वे भवन्तु सुखिनः जैसे महावाक्य इसी एकत्व की घोषणा करते हैं। यह दृष्टि भेदभाव मिटाकर समरसता स्थापित करती है। चेतना का यह एकत्व ही सेवा को साधना बनाता है, संबंधों को पवित्र करता है और मानवता को शांति, संतुलन तथा दिव्यता की ओर अग्रसर करता है।
साध्वी भगवती सरस्वती जी ने कहा कि करुणा सनातन धर्म की आत्मा और उसका प्राण है। भारतीय संस्कृति में धर्म का सार दया, प्रेम और परोपकार में निहित है। “अहिंसा परमो धर्मः” तथा “सर्वे भवन्तु सुखिनः” जैसे मंत्र हमें समस्त प्राणियों के सुख की कामना करने का संदेश देते हैं। जब हृदय करुणा से भरा होता है, तब सेवा स्वाभाविक बन जाती है और मानवता ही परिवार प्रतीत होती है। करुणा हमें स्वार्थ से ऊपर उठाकर लोकमंगल की दिशा में प्रेरित करती है। यही भावना समाज में शांति, समरसता और सहअस्तित्व स्थापित करती है। वास्तव में करुणा ही सनातन संस्कृति की शाश्वत शक्ति और विश्वकल्याण का आधार है।
इस दो दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन में 28 फरवरी की सुबह योग, प्रातःकालीन यज्ञ जैसे आध्यात्मिक विधाओं के साथ दिन का शुभारंभ हुआ। पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी और डा साध्वी भगवती सरस्वती जी के पावन सान्निध्य में देश – विदेश से आयी विभूतियों ने दीप प्रज्जवलित कर मंगलाचरण के साथ औपचारिक उद्घाटन का शंखनाद किया।
इसके पश्चात डॉ. राजेश रंजन, उप महानिदेशक, इण्डियन काउंसिल, वित, भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद, विदेश मंत्रालय, भारत सरकार का विशेष संबोधन रहा।
मुख्य वक्तव्य प्रख्यात चिंतक डॉ. विनय सहस्रबुद्धे द्वारा “सेवा और करुणा के माध्यम से भारतीय आध्यात्मिकता का सॉफ्ट पावर स्वरूप” विषय पर सम्बोधित किया।
इसके उपरांत परम पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के आशीर्वचन ने सम्मेलन को आध्यात्मिक प्रेरणा प्रदान की।
दिन में ‘एक्सप्रेस टॉक्स’ सत्रों में विभिन्न संस्थाएँ अपनी आगामी वार्षिक योजनाएँ, मूल्य-आधारित शिक्षा, अनुप्रयुक्त भगवद्गीता और वेदांत शिक्षण, अंतरराष्ट्रीय सहयोग तथा विश्व ध्यान दिवस जैसे वैश्विक अभियानों पर विचार साझा किये। सायंकाल पावन गंगा जी की आरती के साथ दिन का समापन हुआ।
1 मार्च को सम्मेलन का केंद्र बिंदु समन्वय और सहयोग है। आज बुक आॅफ सोलिडारिटी पर विमर्श एवं अंतिम रूप प्रदान किया। यह पुस्तक भारतीय आध्यात्मिकता की प्रामाणिक व्याख्या प्रस्तुत कर विश्व में फैली भ्रांतियों को दूर करने और करुणा, समरसता एवं वैश्विक एकात्मता का संदेश देने का माध्यम बन कर उभरेगी।
साथ ही इंडियन स्पिरिचुअल कॉन्फेडरेशन के सदस्य संगठनों द्वारा एक संयुक्त रिक्वेस्ट एंड रिकमेंडेशन डॉक्यूमेंट तैयार किया गया, जिसमें नीति-स्तर पर आवश्यक सहयोग, साझा चुनौतियाँ और भारत सरकार के साथ रचनात्मक संवाद के सुझाव शामिल किये गये। यह दस्तावेज भारतीय आध्यात्मिक संगठनों की सामूहिक आवाज के रूप में कार्य करेगा।
यह सम्मेलन भारतीय आध्यात्मिक संगठनों के बीच समन्वय, सहयोग और साझा दृष्टि को सुदृढ़ करेगा। इससे सेवा कार्यों को वैश्विक पहचान मिलेगी और “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना व्यवहारिक रूप में साकार होगी।
यह आयोजन चेतनाओं का पावन संगम है, जहाँ सेवा साधना बनती है, करुणा संस्कृति बनती है और मानवता परिवार बन जाती है। भारतीय अध्यात्म का यही संदेश है, सबका कल्याण, सबका मंगल, सबका उत्थान।
इस अवसर पर आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन, ब्रह्मचारी प्रज्ञा चैतन्य जी, ऑल वल्र्ड गायत्री परिवार, श्री प्रमोद भटनागर जी एवं श्री जितेन्द्र मिश्रा जी, इंटरनेशनल सोसायटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस (इस्कॉन), श्री मोहन विलास दास जी एवं डॉ. नवल कपूर जी, आर्ष विद्या गुरुकुलम, श्री जय कुमार जी (ऑनलाइन सहभागी), मोक्षाटन योग संस्थान, श्री धीराज सरस्वती जी, श्री अमित गर्ग जी (इंडियन योग एसोसिएशन से भी संबद्ध), हार्टफुलनेस इंस्टिट्यूट, श्रीमती अर्पिता बापट, गीता परिवार, श्री प्रदीप जी, डॉ. आशु गोयल, चिन्मय मिशन, सुश्री तृष्णा गुलराजानी, यूनाइटेड कॉन्शियसनेस, श्री विक्रांत सिंह तोमर जी, एस-व्यासा विश्वविद्यालय, डॉ. एच. आर. नागेंद्र जी (ऑनलाइन सहभागी), रामकृष्ण मिशन, स्वामी दयामृत्यानंद जी, एसजीआरएस स्पिरिचुअल ट्रस्ट, श्री राकेश दुबे जी, रामभाऊ म्हालगी प्रबोधिनी दृ श्री विनय सहस्रबुद्धे जी (पूर्व अध्यक्ष, इंडियन स्पिरिचुअल कॉन्फेडरेशन), इंडियन स्पिरिचुअल कॉन्फेडरेशन (आईएससी), डॉ. राजेश रंजन, उप महानिदेशक, परमार्थ निकेतन, साध्वी भगवती सरस्वती जी (अंतरराष्ट्रीय निदेशक), परमार्थ निकेतन, गंगा नंदिनी जी आदि अनेक विभूतियों ने सहभाग किया।


By Shashi Sharma

Shashi Sharma Working in journalism since 1985 as the first woman journalist of Uttarakhand. From 1989 for 36 years, she provided her strong services for India's top news agency PTI. Working for a long period of thirty-six years for PTI, he got her pen ironed on many important occasions, in which, by staying in Tehri for two months, positive reporting on Tehri Dam, which was in crisis of controversies, paved the way for construction with the power of her pen. Delivered.

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