अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव से पूर्व योग के रंग में रंगा परमार्थ निकेतन*

विश्व के अनेक देशों से आये साधक गंगा तट पर योग, ध्यान, सत्संग व गंगा आरती का ले रहे दिव्य अनुभव*

अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव की तैयारियों में जुटा परमार्थ निकेतन, विश्व को दे रहा योग का आमंत्रण*

योग के रंगों में रंगी यह आध्यात्मिक भूमि सम्पूर्ण विश्व को आमंत्रित कर रही है, आइए, योग के माध्यम से स्वयं से जुड़ें, प्रकृति से जुड़ें और सम्पूर्ण मानवता के साथ एकात्मता का अनुभव करें*

ऋषिकेश, 5 मार्च। देवभूमि उत्तराखण्ड, हिमालय की पावन गोद में स्थित परमार्थ निकेतन इन दिनों योग, साधना और आध्यात्मिक ऊर्जा के अद्भुत रंगों से सराबोर है। विश्व विख्यात अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव के आरम्भ से पूर्व ही यहाँ का वातावरण योगमय हो उठा है। दुनिया के विभिन्न देशों से आये योग साधक और आध्यात्मिक जिज्ञासु माँ गंगा के पावन तट पर योग, ध्यान, प्राणायाम, सत्संग और दिव्य गंगा आरती में भाग लेकर एक अद्भुत आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त कर रहे हैं।

प्रातःकाल उगते हुए सूर्य की स्वर्णिम किरणों के बीच परमार्थ गंगा तट पर साधक जब योग और ध्यान का अभ्यास करते हैं तो ऐसा प्रतीत होता है मानो सम्पूर्ण प्रकृति ही योगमय हो गयी हो। गंगा जी की कलकल धारा, हिमालय की शांत छाया इस साधना को और भी दिव्यता प्रदान करता है।

विश्व के विभिन्न देशों, अमेरिका, यूरोप, दक्षिण अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, कनाडा, इटली सहित एशिया के अनेक देशों से आये योग साधक यहाँ भारतीय योग परम्परा की गहराई और उसकी आध्यात्मिकता को अनुभव करते हैं। अनेक साधकों का अनुभव है कि ऋषिकेश में गंगा तट पर योग करना उनके लिए जीवन का एक अविस्मरणीय अनुभव है, जहाँ वे केवल शरीर का अभ्यास नहीं बल्कि आत्मा की शांति और संतुलन को भी महसूस करते हैं।

संध्या के समय पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के पावन सान्निध्य में परमार्थ गंगा तट पर होने वाली दिव्य गंगा आरती इस आध्यात्मिक अनुभव को दिव्यता प्रदान करती है और साधकों को भाव-विभोर कर देती है।

परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने की विधि नहीं बल्कि जीवन को संतुलित और सामंजस्यपूर्ण बनाने का मार्ग है। उन्होंने कहा, “योग हमें अपने भीतर झाँकने की प्रेरणा देता है। जब हम योग के माध्यम से स्वयं से जुड़ते हैं, तब हम सम्पूर्ण सृष्टि से भी जुड़ जाते हैं। अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव इसी वैश्विक एकता और आंतरिक शांति का संदेश देने का एक दिव्य अवसर है।”

उन्होंने यह भी कहा कि परमार्थ निकेतन सदैव से ही विश्व के सभी साधकों और आध्यात्मिक जिज्ञासुओं का खुले हृदय से स्वागत करता आया है। योग का संदेश ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ का संदेश है, जहाँ सम्पूर्ण विश्व एक परिवार के रूप में जुड़ता है। यही भाव इस महोत्सव के माध्यम से विश्वभर में प्रसारित किया जाता है।

अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव के लिए आश्रम में तैयारियाँ तेजी से चल रही हैं। विश्व के प्रमुख योगाचार्य, आध्यात्मिक मार्गदर्शक और योग साधक इस महोत्सव में सहभाग करने के लिए पहुंच रहे हैं। यह महोत्सव योग, ध्यान, आयुर्वेद, आध्यात्मिक संवाद और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से विश्व को भारतीय योग परम्परा की गहराई का अनुभव कराएगा।

परमार्थ निकेतन का यह पावन परिसर एक बार फिर विश्व को योग, शांति और एकता का संदेश देने के लिए तैयार है। गंगा तट पर योग के रंगों में रंगी यह आध्यात्मिक भूमि सम्पूर्ण विश्व को आमंत्रित कर रही है, आइए, योग के माध्यम से स्वयं से जुड़ें, प्रकृति से जुड़ें और सम्पूर्ण मानवता के साथ एकात्मता का अनुभव करें।


By Shashi Sharma

Shashi Sharma Working in journalism since 1985 as the first woman journalist of Uttarakhand. From 1989 for 36 years, she provided her strong services for India's top news agency PTI. Working for a long period of thirty-six years for PTI, he got her pen ironed on many important occasions, in which, by staying in Tehri for two months, positive reporting on Tehri Dam, which was in crisis of controversies, paved the way for construction with the power of her pen. Delivered.

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