-माँ गंगा के पावन तट, परमार्थ निकेतन में प्रातः काल सैक्रेड सनराइज चेंटिंग के साथ हुआ इंटरनेशनल योग फेस्टिवल 2026 का भव्य शुभारम्भ
-80 से अधिक देशों से 1500 से अधिक योग साधक और योग जिज्ञासुओं का समागम
-प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय योगाचार्या शिवा रे ने अपने विशेष सत्र के माध्यम से योग, लय और ऊर्जा का अद्भुत संगम से किया आनंदित
-प्रसिद्ध ड्रम वादक शिवमणि जी का परमार्थ निकेतन में आगमन
-भारत की प्राचीन विद्या मल्लखंभ देख योग साधक हुए रोमांचित
-योग महोत्सव में मल्लखंभ, योग, प्राणायाम, ध्यान, सूर्य नमस्कार, कलारिपयट्टु, योग निद्रा, हठ योग और नाद योग जैसी अनेक प्राचीन विद्याएँ का अद्भुत समावेश
-पूरे सप्ताह सांध्यकालीन कार्यक्रमों में प्रसिद्ध ड्रम वादक शिवमणि और श्रीमती रूना रिजवी की प्रस्तुति, राधिका दास का दिव्य कीर्तन, सुधांशु शर्मा तथा साइमन ग्लोड के भजन, और पद्मश्री सुप्रसिद्ध आध्यात्मिक गायक कैलाश खेर एवं कैलासा बैंड का लाइव कॉन्सर्ट, गुरनिमित सिंह की मधुर प्रस्तुतियाँ तथा परमार्थ निकेतन के ऋषिकुमारों द्वारा योग प्रदर्शन आकर्षण का केंद्र होंगे

-विश्वभर से साधक हिमालय की गोद में एकत्र होकर योग, ध्यान और प्रार्थना में लीन होते हैं, तब एक संदेश गूंजता है योग ही वह शक्ति है जो विभाजनों को मिटाकर मानवता को एकत्व प्रदान कर सकती है : स्वामी चिदानन्द सरस्वती

ऋषिकेश। विश्व प्रसिद्ध इंटरनेशनल योग फेस्टिवल 2026 का परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश में अत्यंत उत्साह और आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ शुभारम्भ हुआ। एक सप्ताह तक चलने वाले इस महोत्सव में 80 से अधिक देशों से 1500 से अधिक योग साधक, योग जिज्ञासु तथा 25 से अधिक राजदूत, उच्चायुक्त, राष्ट्राध्यक्ष और राजनयिकों का सहभाग अत्यंत गौरव का विषय है। इंटरनेशनल योग फेस्टिवल के प्रथम दिन गंगा जी की आरती के दौरान योग साधकों ने संगीत, योग, मल्लखंभ के अनोखे संगम का भरपूर आनंद लिया। पावन माँ गंगा के तट पर प्रातःकाल से लेकर सायंकाल तक आयोजित योग सत्रों, आध्यात्मिक प्रवचनों, वैदिक अनुष्ठानों और प्रेरणादायक संगीत के साथ महोत्सव का प्रथम दिन अत्यंत दिव्य और प्रेरणादायक रहा, यह आध्यात्मिक और वैश्विक एकता के वातावरण की एक दिव्य शुरुआत है।इस महोत्सव की शुरुआत वर्ष 1989 में हुई थी, जब उत्तर प्रदेश सरकार और परमार्थ निकेतन के सहयोग से आयोजित किया गया था। वर्ष 1999 से यह महोत्सव परमर्थ निकेतन में 18 योग जिज्ञासुओं के साथ इस महोत्सव की शुरूआत पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने की थी जिसकी निदेशक डा साध्वी भगवती सरस्वती जी हैं। आज यह विश्व के सबसे प्रतिष्ठित योग सम्मेलनों में से एक है।सभी प्रतिभागियों ने पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी और पूज्य साध्वी भगवती सरस्वती जी के पावन सान्निध्य में विश्व शांति यज्ञ में आहुतियाँ समर्पित कीं। इस अवसर पर विश्व शांति के लिए विशेष प्रार्थना की गई, विशेष रूप से मध्य पूर्व के देशों में शांति, सद्भाव और मानवता की स्थापना के लिए सामूहिक सर्वमंगल की प्रार्थना समर्पित की।अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव के प्रेरणास्रोत, परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि सांसों की पवित्र लय के साथ अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव 2026 का दिव्य और ऊर्जामय शुभारम्भ आज हुआ। हिमालय की गोद और माँ गंगा के पवित्र तट पर आरम्भ हुआ यह महोत्सव पूरी मानवता को एक सूत्र में जोड़ने वाला वैश्विक आध्यात्मिक संगम है।विश्व के विभिन्न देशों से आए हजारों योग साधक, आध्यात्मिक गुरु और योग जिज्ञासु यहाँ एकत्र होकर योग, ध्यान, प्राणायाम और साधना के माध्यम से शांति, संतुलन और समरसता का संदेश दे रहे हैं। इस महोत्सव का उद्देश्य केवल योग का अभ्यास कराना ही नहीं, बल्कि मानव चेतना को जागृत करना और मानवता को एकत्व प्रदान करना है।पावन गंगा तट पर गूंजते मंत्र, ध्यान की गहराई, योग की साधना और भक्ति की मधुर ध्वनियाँ मिलकर ऐसा दिव्य वातावरण निर्मित कर रही हैं, जहाँ प्रत्येक साधक अपने भीतर की शांति और दिव्यता से जुड़ने का अनुभव कर रहा है।आज जब दुनिया विभाजन, तनाव और संघर्ष की चुनौतियों से जूझ रही है, तब यह महोत्सव एक शक्तिशाली संदेश देता है, योग केवल अभ्यास नहीं, बल्कि मानवता को एक परिवार के रूप में जुड़ने का मार्ग है। योग हमें संदेश देता है कि हम अलग-अलग नहीं, बल्कि एक ही चेतना के अंश हैं। डा साध्वी भगवती सरस्वती जी, निदेशक इंटरनेशनल योग फेस्टिवल, ने कहा कि आज विश्व में जो भी चुनौतियाँ, अन्याय या असंतुलन दिखाई दे रहा हैं, उनके प्रति जो क्रोध या निराशा हमारे भीतर उठती है, उसे अपने हृदय के द्वार पर दस्तक समझें। यह संकेत है कि कहीं न कहीं संतुलन बिगड़ा हुआ है।फिर ऐसी साधना विकसित करें, जिसके माध्यम से आप उस क्रोध या निराशा को ईश्वर अथवा प्रकृति को समर्पित कर सकें। जब हम उसे समर्पित करते हैं, तो वही भाव धीरे-धीरे परिवर्तित होकर प्रेम की व्यापक और शक्तिशाली ऊर्जा में रूपांतरित हो जाता है।यही वह मार्ग है, जिसके लिए हमें मां गंगा ने बुलाया है, ताकि हम उस दिव्य और शक्तिशाली प्रेम के माध्यम बन सकें। अपने जीवन में किसी व्यक्ति, किसी उद्देश्य या किसी सत्य को खोजिए जिससे आप सच्चा प्रेम करते हों, और उसी प्रेम को प्रेरणा बनाकर अपने जागरूक कर्मों को संसार की सेवा में प्रवाहित कीजिए।अमेरिका से आये योगाचार्य टॉमी रोसेन ने कहा कि एक समय मुझे चिंता होती थी कि मैं महापुरूषों जैसा नहीं बन सकता। तब मुझे यह समझाया गया कि यदि मैं नियमित रूप से अपनी योग साधना करूँ और अपने हृदय के केंद्र से जुड़ूँ, तो स्वयं स्पष्ट हो जाएगा कि मैं इस संसार की सेवा किस प्रकार सबसे बेहतर ढंग से कर सकता हूँ। वही मेरा धर्म बन जाएगा।उन्होंने आगे कहा कि इंटरनेशनल योग फेस्टिवल में उपस्थित प्रत्येक साधक के पास यह अनमोल अवसर है कि वह यह खोज सके कि हम स्वयं की, अपने परिवार की, अपने समुदाय की और पूरे विश्व की सेवा किस प्रकार कर सकते हैं।शिवा रे ने सत्र की शुरुआत एक केंद्रित साधना के साथ की और कहा कि इंटरनेशनल योग फेस्टिवल, जो परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश में हो रहा है, योगिक ज्ञान और आध्यात्मिक परंपरा का अद्भुत केंद्र है। उन्होंने इस पावन स्थल के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए सभी प्रतिभागियों को अपने भीतर स्थिरता और जागरूकता से जुड़ने का आह्वान किया।उन्होंने कहा, “धर्म और धारणा दोनों ही ‘धृ’ धातु से उत्पन्न शब्द हैं, जिसका अर्थ है धारण करना या संभालना। प्रत्येक व्यक्ति के भीतर एक विशिष्ट बीज होता है, जिसे उसका स्वधर्म कहा जाता है। उसी प्रकार भारत की भी विश्व में एक विशेष और महत्वपूर्ण भूमिका है, दुनिया को यह मार्ग दिखाने की कि हम आधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग अपनी प्राचीन और गहन आध्यात्मिक बुद्धिमत्ता के आधार पर कैसे करें।इंटरनेशनल योग फेस्टिवल हमें यह स्मरण कराता है कि योग भले ही दुनिया के अलग-अलग देशों और संस्कृतियों में विभिन्न रूपों में दिखाई देता हो, लेकिन उसकी जड़ें एक ही हैं। जैसे अलग-अलग वृक्ष ऊपर से भिन्न दिखाई देते हैं, परंतु उनकी जड़ें आपस में जुड़ी होती हैं, वैसे ही पूरी मानवता भी एक ही चेतना से जुड़ी हुई है।उन्होंने कहा कि हमें अपनी जड़ों की ओर लौटना होगा, माँ गंगा और प्रकृति के साथ अधिक सामंजस्य में जीना होगा और अपने स्वधर्म के अनुसार कार्य करते हुए समस्त प्राणियों के बीच सामंजस्य और शांति स्थापित करने में योगदान देना होगा। यही संदेश पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी प्रतिदिन मां गंगा जी की आरती के माध्यम से हम सभी को आशीर्वाद स्वरूप प्रदान करते हैं।योगाचार्या आनंद मेहरोत्रा ने कहा, जीवन में वास्तविक परिवर्तन केवल किसी विश्वास प्रणाली से नहीं, बल्कि आंतरिक क्रिया और साधना से आता है, जो साधक के भीतर गहरा रूपांतरण लाती है। उन्होंने कहा कि हम सभी परमार्थ निकेतन व पूज्य स्वामी जी के अत्यंत आभारी हैं, जिसने इंटरनेशनल योग फेस्टिवल का आयोजन कर इसे हमारा आध्यात्मिक घर बनाया है। यहीं से हम वह सकारात्मक परिवर्तन प्रारम्भ कर सकते हैं, जिसे हम संसार में देखना चाहते हैं।महोत्सव के प्रथम दिन की शुरूआत माँ गंगा के पावन तट पर आनन्द्रा जॉर्ज द्वारा पवित्र मंत्रोच्चार, भजन और सैक्रेड सनराइज चैंटिंग के साथ हुई। हिमालय की गोद में गूँजते मंत्रों ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।प्रातःकालीन सत्रों में योगाचार्य दासा दास के साथ हठ योग, प्राणायाम और ईरान की योगाचार्य आध्या, द्वारा पारंपरिक हठ योग, हठ विन्यास अभ्यास तथा कैवल्यधाम योग संस्थान की प्रसिद्ध प्राणायाम विशेषज्ञ संध्या दीक्षित द्वारा “प्राणायाम की शक्ति” विषय पर विशेष सत्र आयोजित किए गए।योगाचार्य सेंसई संदीप देसाई के मार्गदर्शन में ताई-ची फ्लो सत्र ने प्रतिभागियों को संतुलन और आंतरिक शांति का अनुभव कराया।मैट से मिशन तक, कर्मयोग के रूप में जीवन जीना इस विषय पर एक विशेष प्रेरणादायक सत्र आयोजित किया गया। इस विशेष संवाद का संचालन ईडन गोल्डमैन ने किया, जिसमें योग और आध्यात्मिक जगत की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियाँ डा साध्वी भगवती सरस्वती जी, ईशान तिगुनायत, विश्वप्रसिद्ध योगाचार्या शिवा रे, आनंद मेहरोत्रा, तथा टॉमी रोसेन आदि ने अपने उत्कृष्ट विचार रखें।इस संवाद सत्र में वक्ताओं ने बताया कि योग केवल शारीरिक अभ्यास नहीं है, बल्कि यह सेवा, करुणा, जागरूकता और जीवन के प्रत्येक क्षण में सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग है।

दिन भर प्रतिभागियों ने योग की अनेक विधाओं का अनुभव किया, जिनमें मंत्र योग, चक्र बैलेंसिंग विन्यास, विन्यास योग, हृदय-केंद्रित ध्यान सत्र, कुंडलिनी योग तथा योग दर्शन पर गहन चर्चा शामिल रही।साथ ही नाद योग और साउंड हीलिंग पर आधारित विशेष “सेक्रेड साउंड एक्सपीरियंस” में प्रतिभागियों ने मंत्र, संगीत और ध्वनि के माध्यम से गहन ध्यान का अनुभव किया। संध्या में परमार्थ निकेतन की विश्व प्रसिद्ध गंगा आरती के पश्चात प्रतिभागियों ने भारत की प्राचीन योग परंपरा मल्लखंब का आनंद लिया।इस विशेष कार्यशाला का संचालन द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित योगेश मालवीय तथा योगी कोमलेश्वर जी ने किया। परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमारों ने योगाचार्य मयंक भट्ट के नेतृत्व में रोमांचक प्रस्तुति दी।

By Shashi Sharma

Shashi Sharma Working in journalism since 1985 as the first woman journalist of Uttarakhand. From 1989 for 36 years, she provided her strong services for India's top news agency PTI. Working for a long period of thirty-six years for PTI, he got her pen ironed on many important occasions, in which, by staying in Tehri for two months, positive reporting on Tehri Dam, which was in crisis of controversies, paved the way for construction with the power of her pen. Delivered.

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