-पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के सर्वें भवन्तु सुखिनः मंत्रों से गूंजा बीटल्स आश्रम
-डा साध्वी भगवती सरस्वती जी ने कराया गाइडेड मेडिटेशन
-विश्व शान्ति हेतु ध्यान और हरित संवर्द्धन हेतु रूद्राक्ष का पौधा किया रोपित
-राधिका दास का मंत्रमुग्ध करने वाला कीर्तन, प्रसिद्ध ड्रम वादक शिवमणि जी का ब्रह्मनाद से जोड़ने वाला ताल, रूना रिजव़ी शिवमणि जी की सुफियाना आवाज की मधुर गूंज और महर्षि महेश आश्रम की पवित्रता ने साधकों आध्यात्मिक ऊर्जा भर दिया
-परमार्थ निकेतन में आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव आयुष मंत्रालय और भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय, अतुल्य भारत की साझेदारी से आयोजित
-80 से अधिक देशों के 1500 से अधिक प्रतिभागियों का पूरे सप्ताह सहभाग

ऋषिकेश। अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव के तीसरे दिन परम पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी और डा साध्वी भगवती सरस्वती जी के पावन सान्निध्य में महर्षि महेश योगी आश्रम की पवित्र भूमि पर एक विशेष ध्यान साधना का आयोजन किया। इस पवित्र स्थल पर योग महोत्सव में विश्वभर से आए साधक और प्रतिभागी एकत्र हुए और सामूहिक ध्यान तथा मंत्रोच्चार के माध्यम से आंतरिक शांति और दिव्य ऊर्जा का अनुभव किया। डा साध्वी भगवती सरस्वती जी ने गाइडेड मेडिटेशन कराया।
विश्व शांति और सामंजस्य के लिए विशेष प्रार्थना की। साथ ही पर्यावरण संरक्षण और हरित संवर्द्धन हेतु रूद्राक्ष के पौधों का रोपण करते हुये प्रकृति के साथ सामंजस्य और संतुलन बनाए रखने का पूज्य स्वामी जी ने संदेश दिया और कहा कि यह वही दिव्य स्थल है जहाँ कभी बीटल्स ने ध्यान साधना की थी।
प्रसिद्ध कीर्तनगायक राधिका दास के कीर्तन की मधुर आवाज ने हृदय को छू लिया। प्रसिद्ध ड्रम वादक शिवमणि जी की ताल के ब्रह्मनाद ने पूरे वातावरण को प्रफुल्लित कर दिया, और रूना रिजवी शिवमणि की सुफियाना आवाज ने इस समग्र अनुभव को दिव्य बना दिया। महर्षि महेश योगी आश्रम की पवित्रता और इस संगीत-साधना के संगम ने सभी साधकों के हृदयों को गहन आध्यात्मिक ऊर्जा और आनंद भर दिया।
पूज्य स्वामीजी के श्रीमुख से गूँजें मंत्रों और हर शब्द ने साधकों के हृदय में दिव्यता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया। हर क्षण चेतना को जागृत करने वाला था, हर मंत्र सम्पूर्ण मानवता हो जोड़ने वाला और विश्व के कल्याण के लिए था।
स्वामीजी के नेतृत्व में हुआ यह मंत्रोच्चारण विश्व को जोड़ने, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को जीवित रखने, और शांति एवं करुणा की चेतना को प्रसारित करने का दिव्य प्रयास है।
परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष, अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव के प्रेरणास्रोत पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि योग, शक्ति है, भक्ति है, संगीत है और शांति भी है। योग दिलों को जोड़ता है, देशों को जोड़ता है, प्रकृति और संस्कृति को जोड़ता है। यह आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का दिव्य सेतु है।
उन्होंने वैश्विक योगी समुदाय का आह्वान करते हुये कहा कि योग की इस शक्ति से हम विश्व शांति की दिशा में कदम बढ़ाएँ। आइए भारत की दिव्य योग परंपरा और उत्तराखण्ड की पावन कंदराओं से निकलने वाली ध्यान-साधना की विधाओं को आत्मसात करते हेतु योग से जुड़ें, इसे जियें और जीवन को एक नई दिशा दें। इस पवित्र आयोजन में डॉ. साध्वी भगवती सरस्वती जी ने गाइडेड मेडिटेशन कराते हुए प्रतिभागियों को अपने भीतर की ऊर्जा और शांति से जुड़ने का मार्ग दिखाया। उन्होंने कहा कि अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव, भारत की सनातन आध्यात्मिक विरासत का जीवंत उत्सव है। जो हमें स्वयं से जोड़ता है, समाज से जोड़ता है और सम्पूर्ण मानवता को एकजुट करता है। वह भी ऐसे समय में जब विश्व बढ़ते संघर्ष और विभाजन का सामना कर रहा है, एकता और सामूहिक प्रार्थना के ये क्षण शांति, करुणा और मानवीय जुड़ाव की तत्काल आवश्यकता का शक्तिशाली स्मरण कराते हैं। यह महोत्सव एक ऐसा पवित्र मंच प्रदान करता है जहाँ विभिन्न संस्कृतियों, आस्थाओं और पृष्ठभूमियों के लोग सामंजस्य के साथ एकत्र होते हैं।
ध्यान और आध्यात्मिक साधनाओं के पश्चात, सभी प्रतिभागियों और योग जिज्ञासुओं ने माँ गंगा में पवित्र स्नान किया। मां गंगा के पवित्र जल में डुबकी लगाकर प्रतिभागियों ने अपने भीतर की ऊर्जा को संतुलित किया, और भक्ति, ध्यान एवं प्रार्थना के माध्यम से आत्मा को नव जीवन का अनुभव कराया।

तीसरे दिन की प्रभात बेला में जब हिमालय के आकाश में सूर्योदय की स्वर्णिम आभा फैल रही थी, तब प्रतिभागी शरीर को ऊर्जावान और मन को शांत करने वाली विशेष प्रातःकालीन साधनाओं के लिए एकत्र हुए।
दिन की शुरुआत योगाचार्य दुर्गेश अमोली द्वारा संचालित हठ योग सत्र से हुई, जिसने पारंपरिक योगाभ्यास के माध्यम से प्रतिभागियों को स्थिरता और संतुलन प्रदान किया।
योगाचार्य दासा दास ने “एम्पावर एंड एनर्जाइज कुंडलिनी अवेकनिंग” सत्र का संचालन किया, जिसमें आंतरिक ऊर्जा को जागृत करने और चेतना को सक्रिय करने की शक्तिशाली तकनीकों का अभ्यास कराया गया।
अंतरराष्ट्रीय योग, माइंडफुलनेस और वेलनेस विशेषज्ञ डॉ. ईडन गोल्डमैन ने “चिकित्सा विन्यास थेरेप्यूटिक फ्लो मास्टर क्लास” का संचालन किया, जिसमें योग थेरेपी के सिद्धांतों को सजग गतियों के साथ जोड़कर उपचार और शारीरिक सुदृढ़ता को बढ़ावा दिया गया।
योगाचार्य हर हरि सिंह ने “कुंडलिनी रिबर्थिंग ए रिसेट ऑफ द सेल्फ” सत्र के माध्यम से श्वास और ध्यान की परिवर्तनकारी शक्ति का अनुभव कराया, जबकि जाह्नवी क्लेयर मिसिंघम ने “विन्यास प्रैक्टिस ब्रह्म मुहूर्त” के माध्यम से साधकों को प्रातःकालीन आध्यात्मिक ऊर्जा से जुड़ने का अवसर प्रदान किया।
योग और प्राचीन युद्ध कलाओं के अद्भुत समन्वय के साथ प्राण विन्यास की संस्थापक शिवा रे ने “प्राइमल फ्लो योग एंड द आर्ट ऑफ कलरिपयट्टु” सत्र का संचालन किया। वहीं सेंसेई संदीप देसाई ने ऊर्जावान चीगोंग अभ्यास के माध्यम से श्वास, गति और ऊर्जा के सामंजस्य का अनुभव कराया।
योगाचार्य सुधांशु शर्मा के नेतृत्व में सूर्योदय मंत्रोच्चार ने सामूहिक भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत वातावरण निर्मित किया। इसके पश्चात पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी और पूज्य साध्वी भगवती सरस्वती जी के पावन सान्निध्य में परमार्थ निकेतन की पावन प्रातःकालीन बेला में सभी योग जिज्ञासुओं ने यज्ञ में आहुतियां समर्पित कर विश्व में शांति, स्वास्थ्य और सामंजस्य के लिए प्रार्थनाएँ अर्पित की गईं।
प्रातःकालीन सत्रों में योग दर्शन, शरीर के संतुलन, ऊर्जा साधना और गहन विश्रांति से जुड़े विविध विषयों पर समृद्ध विधाओं के अन्तर्गत मोटिवेशनल स्पीकर और परफॉर्मेंस ट्रेनर केटी बी हैप्पी ने “बंधास एंड बाइंड्स थर्ड एंड फोर्थ चक्र बैलेंसिंग विन्यास” सत्र का संचालन किया, योगाचार्य नीरू कठपाल ने “अयंगर आधारित संरेखण युक्त ट्विस्टिंग” सत्र में सटीक आसन अभ्यासों के माध्यम से शरीर को सुदृढ़ और संतुलित बनाने की तकनीकें सिखाईं।
परमार्थ निकेतन के अपने ऋषिकुमार योगाचार्य मयंक भट्ट ने “पारंपरिक योगिक दंड साधना” का अभ्यास कराया, जिसमें शक्ति, श्वास और प्राचीन योगिक प्रशिक्षण विधियों का अद्भुत समन्वय था।
चेन्नई योग स्टूडियो की संस्थापक रोहिणी मनोहर ने “कलारी फ्लो द रिदम ऑफ द वॉरियर” सत्र में दक्षिण भारत की युद्ध कला परंपरा को योग की गतियों के साथ जोड़ा।
गहन विश्रांति के लिए योगाचार्य साध्वी आभा सरस्वती जी ने योग निद्रा का सत्र कराया, पश्चिम में कुंडलिनी योग की प्रसिद्ध शिक्षिका किआ मिलर ने “अवेकनिंग द इनर फायर कुंडलिनी एनर्जी एक्टिवेशन” के माध्यम से सूक्ष्म ऊर्जा की परिवर्तनकारी शक्ति का अनुभव कराया।
संगीत और अभिव्यक्ति के सत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अनंद्रा जॉर्ज ने “प्लेजरफुल सेल्फ-शाइनिंग वॉइस” सत्र के माध्यम से आत्म-अभिव्यक्ति और सशक्तिकरण का उत्सव मनाया, जबकि साइमन ग्लोडे ने “हार्ट डांस” के माध्यम से संगीत, नृत्य और भक्ति का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया।
दोपहर के सत्रों में उपचार, आयुर्वेद और आत्मबोध की खोज विषय पर चिंतन मंथन किया गया। गायत्री योगाचार्य ने “क्वांटम हीलिंग” सत्र में योगिक चेतना के माध्यम से सूक्ष्म ऊर्जा आधारित उपचार की संभावनाओं को साझा किया। भारत व चीन के प्रसिद्ध योगाचार्य मोहन भंडारी ने “योग फॉर इम्युनिटी” सत्र में ऐसे अभ्यास सिखाए जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को सुदृढ़ करते हैं।
अमेरिका के योगाचार्य टॉमी रोसेन ने “स्पिरिचुअलिटी एंड इमोशनल मैच्योरिटी” विषय पर गहन चर्चा करते हुए आध्यात्मिक जागरण और भावनात्मक परिपक्वता के बीच संबंध को समझाया।
योगाचार्य रामकुमार ने “रीसेट, रिन्यू एंड रीजुवेनेट, आयुर्वेद” सत्र में आयुर्वेद के सिद्धांतों के माध्यम से जीवन में संतुलन और स्वास्थ्य को पुनर्स्थापित करने के उपाय बताए।
डॉ. संजय मंचंदा ने “द फील्ड मंत्र नेविगेटिंग द डायरेक्ट पाथ टू सेल्फ-रियलाइजेशन” सत्र में आत्मसाक्षात्कार की दिशा में आध्यात्मिक मार्गदर्शन दिया, जबकि जय हरि सिंह ने “द प्रोजेक्शन ऑफ एक्सेप्टेंस” विषय पर आत्मबोध और दृष्टिकोण की गहराई को समझाया।

ध्वनि उपचार और भक्ति साधना भी दोपहर के कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे। जोसेफ श्मिडलिन और उनके साथियों ने “क्रैडल ऑफ साउंड रेस्टोरेटिव साउंड बाथ” कराया, जबकि जेम्स कैसिडी और उनके साथियों ने “ए जर्नी द चक्राज विद मंत्र” के माध्यम से मंत्र और ध्यान की साधना कराई।
परम पूज्य स्वामीजी और साध्वी भगवती सरस्वती जी के पावन सान्निध्य में सभी ने गंगा जी की आरती की। “कीर्तन फॉर लाइफ” जीवंत संगीतमय कार्यक्रम गुरनिमित सिंह और सैक्रेड साउंड एक्सपीरियंस के संगीतकारों ने भक्ति संगीत की अद्भुत प्रस्तुति दी और जिससे सम्पूर्ण परमार्थ गंगा तट आध्यात्मिक उल्लास से युक्त हो गया।
इसके बाद प्रतिभागी “ईवनिंग गंगा कीर्तन” में एकत्र हुए, जिसमें स्टाइन डुलोंग और उनके साथियों द्वारा नारी शक्ति के नेतृत्व में कीर्तन किया। इस शांत, मधुर और हृदय को स्पर्श करने वाले संगीत ने पूरे दिन की आध्यात्मिक यात्रा को अत्यंत सुखद और शांतिपूर्ण समापन प्रदान किया।

By Shashi Sharma

Shashi Sharma Working in journalism since 1985 as the first woman journalist of Uttarakhand. From 1989 for 36 years, she provided her strong services for India's top news agency PTI. Working for a long period of thirty-six years for PTI, he got her pen ironed on many important occasions, in which, by staying in Tehri for two months, positive reporting on Tehri Dam, which was in crisis of controversies, paved the way for construction with the power of her pen. Delivered.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *