अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव, परमार्थ निकेतन, 2026 का छठा दिन- वैश्विक एकता, योग और आध्यात्मिकता का ऐतिहासिक संगम*

माननीय राज्यपाल, उत्तराखंड़, श्री गुरमीत सिंह जी और उनकी धर्मपत्नी श्रीमती गुरमीत कौर जी की गरिमामयी उपस्थिति*

*विश्व के 11 देशों के माननीय राजदूतों, उच्चायुक्तों और राजनायिकों का सहभाग*

*आज परमार्थ गंगा के तट से उठी योग की दिव्य ध्वनि पूरे विश्व में गूंज रही*

*योग से सब संभव है*

*पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने माननीय राज्यपाल, उत्तराखंड़, श्री गुरमीत सिंह जी को अंगवस्त्र और रूद्राक्ष का पौधा भेंट कर परमार्थ गंगा तट पर किया अभिनन्दन*

*इक्वाडोर, एच.ई. श्री फर्नांडो जेवियर बुचेली वर्गास, राजदूत, गयाना, एच.ई. श्री धरमकुमार सीराज, उच्चायुक्त, बेलारूस, एच.ई. श्री मिखाइल कास्को, राजदूत, मंगोलिया, एच.ई. श्री गणबोल्ड दंबाजाव, राजदूत, यूक्रेन, श्री वोलोडिमिर प्रिटुला, द्वितीय सचिव, कोस्टा रिका, सुश्री गौडी काल्वो, मंत्री (कौंसुलर), पनामा, श्रीमती अन्नाबेला चावेज प्रेस्पान, कौंसुलर, जिम्बाब्वे, श्री विक्टर मिगा, सांस्कृतिक मंत्री, इंडोनेशिया, सुश्री लूसिया, स्टाफ, चाड, श्री जिमटोला, संस्कृति मंत्री, स्विट्जरलैंड, श्री साइमन सेवन शाफर, सांस्कृतिक कौंसुलर, लातविया दूतावास की उप प्रमुख (डेप्युटी चीफ ऑफ मिशन) इंगा स्क्रुजमानेय नेपाल दूतावास के उप राजदूत डॉ. सुरेन्द्र थापा, आई. बालकृष्ण पिसुपति, कंट्री डायरेक्टर, यूएनईपी (संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम)* 

*परमार्थ निकेतन में आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव आयुष मंत्रालय और भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय, अतुल्य भारत की साझेदारी से आयोजित*

*अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव में पूरे सप्ताह, 80 से अधिक देशों के प्रतिभागी, 33 देशों के विद्यार्थी और 15 से 20 देशों देशों के राजदूत, उच्चायुक्त और राजनायिकों की गरिमामयी उपस्थिति*

*साध्वी भगवती सरस्वती जी के जन्मदिवस पर अंगवस्त्र भेंट कर माननीय राज्यपाल जी ने किया अभिनन्दन*

ऋषिकेश। पावन गंगा तट पर स्थित परमार्थ निकेतन में आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव, परमार्थ निकेतन 2026 का छठा दिन एक ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण क्षण का साक्षी बना। आज के इस विशेष अवसर पर माननीय राज्यपाल उत्तराखण्ड, श्री गुरमीत सिंह जी की गरिमामयी उपस्थिति ने पूरे महोत्सव को दिव्यता, प्रेरणा और गरिमा से आलोकित किया।

आज का दिन वास्तव में अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में अंकित होने वाला दिन है। विश्व के 80 देशों से आए 1500 योग साधकों, 75 योगाचार्यों, आध्यात्मिक मार्गदर्शकों और प्रतिभागियों के बीच माननीय राज्यपाल की उपस्थिति ने यह संदेश दिया कि योग केवल साधना नहीं, बल्कि मानवता को जोड़ने वाला एक वैश्विक सेतु है।

इस दिव्य अवसर पर परम पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी तथा पूज्य साध्वी भगवती सरस्वती जी का पावन सान्निध्य, प्रेरणा, आशीर्वाद और मार्गदर्शन भी उपस्थित जनसमूह को निरंतर ऊर्जा और दिशा प्रदान कर रहा है। उनके मार्गदर्शन में परमार्थ निकेतन का यह महोत्सव एक वैश्विक आध्यात्मिक आंदोलन के रूप में विकसित हो चुका है, जो विश्व को शांति, संतुलन और करुणा का मार्ग दिखा रहा है।

अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव 2026 के इस विशेष दिन पर विश्व के 11 देशों के माननीय राजदूतों, उच्चायुक्तों और राजनायिकों की उपस्थिति ने इस आयोजन को वास्तव में अंतरराष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया। विभिन्न महाद्वीपों का प्रतिनिधित्व करने वाले ये सम्मानित अतिथि आज मां गंगा के पावन तट पर एकत्रित हुए है जो मानवता के साझा मूल्यों, शांति, सद्भाव और आध्यात्मिकता का जीवंत प्रतीक बन गया, जो कहा रहा है कि सम्पूर्ण विश्व एक ही चेतना में समाहित हो गया हो। योग की यह साधना सीमाओं, भाषाओं और संस्कृतियों से परे जाकर मानवता को एक सूत्र में पिरोने का संदेश दे रही है।

आज का दिन वास्तव में योग के उस गहन सत्य को पुनः स्थापित कर रहा था कि योग केवल शरीर को स्वस्थ बनाने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि आत्मा, समाज और विश्व को जोड़ने वाली दिव्य जीवन पद्धति है। जब विभिन्न देशों के प्रतिनिधि, आध्यात्मिक आचार्य, युवा विद्यार्थी और योग साधक एक साथ गंगा तट पर एकत्रित हैं, यह दृश्य हमें स्मरण कराता है कि योग के माध्यम से विश्व में एकता, संतुलन और शांति स्थापित की जा सकती है।

परमार्थ निकेतन की यह पावन धरा सदैव से आध्यात्मिक चेतना, सेवा और वैश्विक सद्भाव का केंद्र रही है। आज के इस ऐतिहासिक अवसर पर यह धरा एक बार फिर पूरे विश्व को यह संदेश दे रही है कि जब मानवता योग के मार्ग को अपनाती है, तब विभाजन की दीवारें स्वतः गिरने लगती हैं और एक नई वैश्विक चेतना का उदय होता है।

आज के इस दिव्य संगम ने यह सिद्ध कर दिया कि योग केवल भारत की सांस्कृतिक धरोहर ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानवता की साझा आध्यात्मिक विरासत है। गंगा तट पर उपस्थित हजारों साधकों की सामूहिक साधना, राजनयिकों की गरिमामयी उपस्थिति और आध्यात्मिक गुरुओं के प्रेरक संदेशों ने मिलकर यह उद्घोष किया कि योग के माध्यम से ही विश्व में शांति, संतुलन और करुणा की स्थापना संभव है।

अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव 2026 का यह ऐतिहासिक दिन आने वाली पीढ़ियों के लिये प्रेरणा का स्रोत होगा जो याद दिलाता रहेगा कि जब दुनिया के विभिन्न कोनों से आए लोग एक साथ बैठकर श्वास लेते हैं, ध्यान करते हैं और भीतर की शांति को खोजते हैं, तब वास्तव में एक नए, शांतिपूर्ण और समरस विश्व की नींव रखी जाती है।

माननीय राज्यपाल, उत्तराखण्ड, श्री गुरमीत सिंह जी ने कहा कि ये क्षण बिल्कुल अलग है। हम सब माँ गंगा के पावन तट पर बैठे हैं, यह सब उस प्रभु का ही आदेश है। इन छः दिनों के भीतर निश्चित ही आप सभी के जीवन में बहुत बड़ा परिवर्तन आया होगा। योग अर्थात् एकत्व। हम सब यहाँ हिमालय की गोद में बैठे हैं और यह वही क्षण है जब हम परमात्मा से जुड़ सकते हैं।

यहाँ ईरान, इजराइल और यूएसए के लोग भी एक साथ बैठे हैं। यह पूरी दुनिया के लिए एक उत्तम संदेश है, एकता का संदेश, सद्भाव और शांति का संदेश। आपने योग में श्वास, आसन व क्रिया को सीख लिया है, अब आप शरीर, मन और आत्मा को परमात्मा से मिलाने की कला भी सीख जाएँकृयही तो योग महोत्सव का उद्देश्य है।

आप सबको शांति का संदेश पूरी धरती पर पहुँचाना है। यहाँ से आपकी सोच को माँ गंगा का जल और हिमालय की हवाएँ पूरे विश्व में लेकर जाएँगी। यहाँ पूज्य स्वामीजी ने आप सबको अपने आप से मिलाया है। योग से आत्म-अनुशासन आता है, सोच और विचारों में सकारात्मक परिवर्तन आता है।

यह तपस्थली है, देवभूमि है, ऋषियों की भूमि है, यह वास्तव में प्रभु का दरबार है। आप सब हमारे अतिथि हैं, और हम आपके भीतर परमात्मा को देखते हैं। इस धरती ने हमें आयुर्वेद और वेलबीइंग का पाठ पढ़ाया है। इस अवसर पर उन्होंने “एक पेड़ माँ के नाम” का संदेश भी दिया।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि आप सब योगी परमात्मा का प्रकाश है, परमात्मा के मंत्र है। आप अपने साथ इस प्रकाश और मंत्रों को लेकर जायें ताकि यह प्रकाश पूरी दुनिया को प्रकाशित करें।

डा साध्वी भगवती सरस्वती जी ने कहा कि भारत की संस्कृति, भारत की माटी में ज्ञान समाहित है वह अद्भुत है। भारत आने से पहले मेरे पास सब कुछ था परन्तु भारत आने के बाद गुरूकृपा से जो प्राप्त हुआ उसे शब्दों के माध्यम से उल्लेख नहीं किया जा सकता।

संस्कृति मंत्री, स्विट्जरलैंड, श्री साइमन सेवन शाफर ने कहा कि योग और डिप्लोमेसी विभिन्न देशों के बीच एक सेतु का कार्य करते हैं। योग केवल आसनों का अभ्यास नहीं है, बल्कि यह हमें नई ऊर्जा प्रदान करता है, तनाव को दूर करता है और पूरे विश्व को सद्भाव के सूत्र में बांधता है।

इक्वाडोर के राजदूत, एच.ई. श्री फर्नांडो जेवियर बुचेली वर्गास ने कहा कि योग हमें एक-दूसरे को समझने की शक्ति प्रदान करता है। मैं यहां से एकता, शांति और सद्भाव अपने साथ लेकर जाना चाहता हूँ। इस कठिन समय में परमार्थ निकेतन पूरी दुनिया में शांति का संदेश प्रसारित कर रहा है, यह वास्तव में अद्भुत है।

योगाचार्या पाउला तापिया ने कहा कि इस अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव, परमार्थ निकेतन में सहभाग करना मेरे लिये सौभाग्य की बात है। आज से 10 वर्ष पहले मैं इसी गंगा घाट पर बैठकर आरती के दौरान हनुमान चालीसा सुनी थी, तभी इस पवित्र स्थान से अद्भुत लगाव हो गया था। हमारे शरीर, वाणी, मन और आत्मा को पोषण प्रदान करने के लिये पूज्य स्वामीजी और पूज्य साध्वी जी का बहुत-बहुत धन्यवाद।

योगाचार्य स्टीवर्ट गिलक्रिस्ट ने कहा कि पूज्य स्वामीजी और पूज्य साध्वी जी, आपने जिस तरह इस महोत्सव को आयोजित किया है वह पूरी दुनिया के योगियों के लिये अद्भुत अवसर है। यहां आना अचानक नहीं होता, यह माँ गंगा का आमंत्रण है।

एच.ई. श्री फर्नांडो जेवियर बुचेली वर्गास, राजदूत, इक्वाडोरय सुश्री चांदनी सिंह, एसोसिएट, इक्वाडोर, एच.ई. श्री जुआन कार्लोस मार्सान एगुइलेरा, राजदूत, क्यूबाय एच.ई. श्री मिखाइल कास्को, राजदूत, बेलारूसय श्री सियारहेई त्रात्सियुक, प्रथम सचिव, बेलारूसय श्री अलेक्जान्द्र झित्को, प्रथम सचिव, बेलारूसय सुश्री स्वियातलाना वियारहैइचिक, कौंसुलर, बेलारूसय सुश्री गौडी काल्वो, मंत्री (कौंसुलर), कोस्टा रिकाय एच.ई. श्री सिनिशा पाविच, राजदूत, सर्बियाय एच.ई. श्रीमती दाना पाइउ, चार्ज द’अफेयर्स, मोल्दोवाय सुश्री विक्टोरिया मार्काचेउस्काया, कौंसुलर, सर्बियाय श्री आंद्रेई काश्पर, कौंसुलर, सर्बियाय श्री विक्टर मिगा, प्रथम सचिव, जिम्बाब्वेय सुश्री लूसिया, कौंसुलर, इंडोनेशियाय श्री जुआन कार्लोस रोजास अरांगो, मंत्री (कौंसुलर), सर्बियाय श्री जिमटोला, प्रथम सचिव, चाडय एच.ई. श्री धरमकुमार सीराज, उच्चायुक्त, गुयानाय श्री केशव तिवारी, द्वितीय सचिव, गुयानाय श्री सिरीयाक गनवाला, मंत्री (कौंसुलर), कांगोय श्री साइमन सेवन शाफर, सांस्कृतिक कौंसुलर, स्विट्जरलैंडय सुश्री अन्नाबेला चावेज प्रेस्पान, चार्ज द’अफेयर्स, पनामाय सुश्री एडिजा मार्लीन जिमेनेज मोरेनो, चार्ज द’अफेयर्स, पनामाय श्री अतिकलित अतनाफु नरामो, तृतीय सचिव, इथियोपियाय श्री स्यार्गेई नवाझिलाव, कौंसुलर, रूसय श्री याउहेनी उलासेउसकी, कौंसुलर, रूसय सुश्री स्वियातलाना हवारुश्का, कौंसुलरय श्री गणबोल्ड दंबाजाव, राजदूत, मंगोलियाय श्री विनोद सिंह, समन्वयक, भारत, श्री मलकीयत, एयरपोर्ट टीम, भारत, श्री लवप्रीत, एयरपोर्ट टीम, भारत, श्री मनप्रीत, एयरपोर्ट टीम, भारत, श्री संजय मिश्रा, यूरोप एवं एशिया टीम, भारत, श्री नारायण कपूर, यूरोप एवं एशिया टीम, भारतय श्री राघव शाली, यूरोप एवं एशिया टीम, भारतय श्री विपिन सिंह, अफ्रीका एवं अमेरिका टीम, भारत, श्री सुमित अग्रवाल, अफ्रीका एवं अमेरिका टीम, भारत, सुश्री अदिति, महिला राजनयिक, भारत सुश्री सोम्या, महिला राजनयिक, भारत आदि विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति।

अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव में 80 देशों का सहभाग – अफगानिस्तान, अंगोला, ऑस्ट्रेलिया, ऑस्ट्रिया, बांग्लादेश, बेलारूस, बेल्जियम, भूटान, ब्राजील, बुल्गारिया, बुर्किना फासो, कंबोडिया, कनाडा, चाड, चिली, चीन, कोलंबिया, कोस्टा रिका, क्यूबा, डेनमार्क, इक्वाडोर, मिस्र, फिजी, फ्रांस, जॉर्जिया, जर्मनी, घाना, गुयाना, गिनी-बिसाऊ, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, आयरलैंड, इजराइल, इटली, जापान, कजाख़स्तान, कोरिया, किर्गिस्तान, लाओस, मलेशिया, मलावी, मालदीव, मॉरीशस, मेक्सिको, मोल्दोवा, मंगोलिया, मोरक्को, म्यांमार, नामीबिया, नेपाल, न्यूजीलैंड, नाइजर, नाइजीरिया, नॉर्वे, ओमान, पेरू, पुर्तगाल, रोमानिया, रूस, सर्बिया, स्लोवाकिया, दक्षिण अफ्रीका, स्पेन, श्रीलंका, सूरीनाम, स्विट्जरलैंड, सीरिया, ताइवान, ताजिकिस्तान, तंजानिया, थाईलैंड, त्रिनिदाद और टोबैगो, तुर्कमेनिस्तान, यूक्रेन, यूनाइटेड किंगडम, संयुक्त राज्य अमेरिका, उज्बेकिस्तान, वियतनाम, जाम्बिया और जिम्बाब्वे।

By Shashi Sharma

Shashi Sharma – Senior Woman Journalist

Shashi Sharma has been active in journalism since 1985, holding the distinction of being Uttarakhand's first female journalist.

For 36 years, starting in 1989, she rendered distinguished service to India's premier news agency, PTI. During this long tenure, she demonstrated the power of her writing on numerous significant occasions; notably, she spent two months in Tehri reporting positively on the Tehri Dam—which was then mired in controversy—and used her pen to help pave the way for its construction.

Currently, Mrs. Shashi Sharma runs the news portal *Newsok24.com* and serves as the editor of the weekly newspaper *Desh Nirdesh*; she is also a registered anchor and commentator for Delhi Doordarshan.

शशि शर्मा वरिष्ठ महिला पत्रकार शशि शर्मा उत्तराखंड की पहली महिला पत्रकार के तौर पर 1985 से पत्रकारिता में कार्यरत हैं। 1989 से 36 वर्षों तक उन्होंने भारत की शीर्ष समाचार एजेंसी पीटीआई के लिए अपनी सशक्त सेवाएं दीं। छत्तीस वर्षों की लंबी अवधि तक पीटीआई के लिए काम करते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण मौकों पर अपनी कलम का लोहा मनवाया, जिसमें दो महीने तक टिहरी में रहकर विवादों के संकट में रहे टिहरी बांध पर सकारात्मक रिपोर्टिंग कर अपनी कलम की ताकत से निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया। वर्तमान में श्रीमती शशि शर्मा Newsok24 com न्यूज पोर्टल को चला रहीं हैं और साप्ताहिक समाचार पत्र देश निर्देश की सम्पादक होने के साथ ही दिल्ली दूरदर्शन की रजिस्टर्ड एंकर और कमेंटेटर भी हैं।

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