स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने पूर्व राजयसभा सांसद, पूर्व उपाध्यक्ष, भारतीय जनता पार्टी स्वर्गीय श्री बलबीर पुंज जी के श्रद्धाजंलि समारोह में किया सहभाग
पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के सान्निध्य में भाव-विह्वल हुआ शोकाकुल परिवार
*पूज्य स्वामी जी ने अर्पित की भावभीनी श्रद्धांजलि
डा अम्बेडकर इंटरनेशनल सेंटर, 15 जनपथ, नई दिल्ली में आयोजित

नई दिल्ली। परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने स्वर्गीय श्री बलबीर पुंज जी की श्रद्धाजंलि सभा में उपस्थित होकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि आज हम राष्ट्र को समर्पित ऐसे व्यक्तित्व को स्मरण कर रहे हैं, जिनका जीवन केवल सफलता की कहानी नहीं था बल्कि सफलता, प्रसन्नता, प्रपन्नता से युक्त जीवन का एक माडल था।
स्वर्गीय श्री बलबीर पुंज जी केवल एक राजनेता ही नहीं थे, बल्कि वे एक ऐसे इंसान थे जिन्होंने प्यार से परिवार को सम्भाला। वे एक ऐसे परिवार-स्तंभ के रूप में थे जिन्होंने प्रेम, एकता और संस्कार को परिवार की सबसे बड़ी पूँजी माना। जीवन के हर चरण में उन्होंने भगवद् गीता के मूल संदेश योगः कर्मसु कौशल निष्कामकर्म, समता और सेवा को जिया।
उनका शांत चित्त, संतुलित विचार, नम्रता और प्रत्येक व्यक्ति के प्रति सम्मान इन सबने उन्हें विलक्षण बनाया। उनके जीवन में कोई अहं नहीं, कोई वहम नहीं आज जब वे हमारे बीच शारीरिक रूप से नहीं हैं, परन्तु महान व्यक्तित्वों का मरण नहीं स्मरण होता है।
पूज्य स्वामी जी ने कहा कि कुछ व्यक्तित्व समय की सीमाओं में बंधे नहीं होते, वे काल के प्रवाह में दीपस्तंभ की भाँति मार्गदर्शन करते रहते हैं। श्री बलबीर पुंज जी ऐसेे ही एक राष्ट्र भक्त थे, जिनकी लौ केवल स्वयं को ही नहीं, अपितु पूरे परिवार को आलोकित किया। उनका जीवन केवल पद और प्रतिष्ठा का परिचायक नहीं था, वह विचारों की दृढ़ता, मूल्यों की अडिगता और राष्ट्र के प्रति अखंड समर्पण का प्रतीक था।
स्वामी जी ने कहा कि श्री बलबीर पुंज जी का चिंतन राजनीतिक सीमाओं तक सीमित नहीं था, वह राष्ट्र के सांस्कृतिक व्यक्तित्व से जुड़े हुये थे। उन्होंने कहा कि मृत्यु अंत नहीं है, वह एक रूपांतरण है। महान आत्माएँ अपने कर्मों, अपने विचारों और अपने आदर्शों के माध्यम से सदा जीवित रहती हैं। श्री बलबीर पुंज जी का जाना पूरे परिवार के लिए एक असहनीय वेदना का क्षण है। यह केवल एक प्रियजन का वियोग नहीं, बल्कि मार्गदर्शक, संरक्षक और प्रेरणा-स्रोत के विलुप्त होने का गहरा आघात है, जिसकी रिक्तता सदैव अनुभव की जाती रहेगी।

By Shashi Sharma

Shashi Sharma Working in journalism since 1985 as the first woman journalist of Uttarakhand. From 1989 for 36 years, she provided her strong services for India's top news agency PTI. Working for a long period of thirty-six years for PTI, he got her pen ironed on many important occasions, in which, by staying in Tehri for two months, positive reporting on Tehri Dam, which was in crisis of controversies, paved the way for construction with the power of her pen. Delivered.

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