श्री मदन दिलावर जी, राजस्थान सरकार में स्कूल शिक्षा, पंचायती राज एवं संस्कृत शिक्षा विभाग, कैबिनेट मंत्री दर्शनार्थ आये परमार्थ निकेतन
पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी और मानस कथा व्यास संत मुरलीधर जी के पावन सान्निध्य में की दिव्य गंगा आरती
परमार्थ निकेतन में आयोजित पर्यावरण को समर्पित मासिक मानस कथा की दिव्यता व भव्यता देख हुये गद्गद
भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा में भी अयोध्या जैसा दिव्य व भव्य मंन्दिर बने इस पर हुई चर्चा
ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन में राजस्थान सरकार में स्कूल शिक्षा, पंचायती राज एवं संस्कृत शिक्षा विभाग के कैबिनेट मंत्री श्री मदन दिलावर जी का आगमन अत्यंत प्रेरणादायी एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण रहा। इस अवसर पर उन्होंने पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी, डा साध्वी भगवती सरस्वती जी एवं मानस कथा व्यास संत श्री मुरलीधर जी के पावन सान्निध्य में दिव्य गंगा आरती में सहभाग कर माँ गंगा का आशीर्वाद प्राप्त किया। गंगा तट पर प्रवाहित हो रही आध्यात्मिक चेतना, वैदिक मंत्रों की दिव्यता और भक्तिभाव से ओतप्रोत वातावरण ने सभी के हृदय को भावविभोर कर दिया।

परमार्थ निकेतन में आयोजित पर्यावरण को समर्पित मासिक मानस कथा की भव्यता, आध्यात्मिकता और जनजागरण के संदेश को देखकर माननीय मंत्री जी अत्यंत गद्गद हो उठे। उन्होंने कहा कि आज के समय में पौधारोपण के साथ युवा पीढ़ी में संस्कारों का रोपण, संस्कृति का संरक्षण और आध्यात्मिक चेतना का संवर्धन भी अत्यंत आवश्यक है और यह दिव्य मानस कथा इन संदेशों को प्रसारित कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि आने वाली पीढ़ियों को केवल आधुनिक शिक्षा दी जायेगी और उन्हें अपनी जड़ों, अपनी संस्कृति एवं सनातन मूल्यों से नहीं जोड़ा जायेगा, तो समाज का संतुलन कमजोर हो जायेगा।

पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि भारत की संस्कृति केवल पुस्तकों में सीमित ज्ञान नहीं है, बल्कि जीवन जीने की कला है। हमारी संस्कृति प्रकृति को पूजती है, नदियों को माँ मानती है, वृक्षों में देवत्व देखती है और सम्पूर्ण सृष्टि को परिवार मानने का संदेश देती है। आज जब सम्पूर्ण विश्व जलवायु परिवर्तन, बढ़ते तापमान और पर्यावरणीय संकट से जूझ रहा है, तब भारतीय संस्कृति और सनातन जीवनदृष्टि सम्पूर्ण मानवता के लिये मार्गदर्शक बन सकती है।

इस अवसर पर राजस्थान सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ते तापमान, जल संकट और पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी सार्थक चर्चा हुई। पूज्य स्वामी जी ने कहा कि पृथ्वी को बचाने के लिये केवल योजनायें पर्याप्त नहीं होंगी, बल्कि जनमानस में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का भाव जागृत करना होगा। वृक्ष केवल पर्यावरण की आवश्यकता नहीं, बल्कि जीवन के प्राण हैं। एक वृक्ष केवल ऑक्सीजन नहीं देता, वह आने वाली पीढ़ियों को जीवन देता है।
पूज्य स्वामी जी ने संस्कृत शिक्षा के महत्व पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की आत्मा है। संस्कृत में हमारे वेद, उपनिषद, गीता, आयुर्वेद, योग और सनातन ज्ञान की अमूल्य धरोहर सुरक्षित है। यदि संस्कृत बचेगी, तो भारत की सांस्कृतिक चेतना सुरक्षित रहेगी। उन्होंने कहा कि राजस्थान सरकार शिक्षा के साथ-साथ संस्कृति आधारित मूल्यों को भी बढ़ावा देने हेतु निरंतर कार्य कर रही है

चर्चा के दौरान भगवान श्री कृष्ण की जन्मभूमि मथुरा में भी श्रीराम मन्दिर की तर्ज पर दिव्य एवं भव्य मंदिर निर्माण की आवश्यकता पर विचार-विमर्श करते हुये कहा कि भारत की आध्यात्मिक विरासत केवल इतिहास नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा है, जिसे संरक्षित और सशक्त करना समय की आवश्यकता है।

संत मुरलीधर जी ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में कहा कि रामचरितमानस केवल कथा नहीं, बल्कि मानव जीवन को दिशा देने वाला दिव्य ग्रंथ है। जब मानस कथा पर्यावरण, सेवा और मानवता के संदेश के साथ जुड़ती है, तब वह केवल धार्मिक आयोजन नहीं रहती, बल्कि समाज परिवर्तन का माध्यम बन जाती है।

पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने माननीय कैबिनेट मंत्री राजस्थान सरकार श्री मदन दिलावर जी को रूद्राक्ष का पौधा भेंट किया।

By Shashi Sharma

Shashi Sharma Working in journalism since 1985 as the first woman journalist of Uttarakhand. From 1989 for 36 years, she provided her strong services for India's top news agency PTI. Working for a long period of thirty-six years for PTI, he got her pen ironed on many important occasions, in which, by staying in Tehri for two months, positive reporting on Tehri Dam, which was in crisis of controversies, paved the way for construction with the power of her pen. Delivered.

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