उत्तरप्रदेश गौरव सम्मान से विभूषित लोकप्रिय ओजस्वी कवि डा हरिओम पवार की के 75 वें जन्मदिवस पर अमृत महोत्सव का आयोजन
योगऋषि पूज्य स्वामी रामदेव जी, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी, पूज्य साध्वी ऋतंभरा, दीदी मां, आचार्य बालकृष्ण जी का पावन सान्निध्य, उद्बोधन और आशीर्वाद
शहिदों की याद में मधुकामिनी पौधे का रोपण कर मनाया जन्मदिन
मां भारती के उन अज्ञात क्रांतिवीरों की याद में रोपित किया पौधा जिनकी सुगन्ध तो व्याप्त है परन्तु इतिहास उन्हें याद नहीं रख सका
पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने रूद्राक्ष का दिव्य पौधा उपहार स्वरूप किया भेंट
मेरठ, 24 मई। परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज एवं योगऋषि पूज्य स्वामी रामदेव जी महाराज, पूज्य साध्वी ऋतंभरा, दीदी मां, आचार्य बालकृष्ण जी, जस्टिस सुप्रीम क¨र्ट आॅफ इंडिया श्री पंकज मित्तल जी और अनेक विशिष्ट अतिथियों ने राष्ट्रभक्ति, संस्कृति और चेतना के अमर स्वर, ओजकवि श्री हरिओम पंवार जी के 75वें जन्मोत्सव अमृत महोत्सव में सहभाग कर उन्हें आशीर्वाद स्वरूप अंगवस्त्र एवं रुद्राक्ष का दिव्य पौधा भेंट कर सम्मानित किया।

यह सम्मान उनके शब्दों की तपस्या का अभिनन्दन करने का वह पुण्य क्षण था, जहाँ कविता केवल अभिव्यक्ति नहीं रही, बल्कि राष्ट्रधर्म, संस्कृति और सनातन चेतना का प्राणमंत्र बन गई। जिस कवि ने अपनी वाणी से युवाओं की नसों में राष्ट्रप्रेम का रक्त प्रवाहित किया, उन्होंने मंचों को केवल मनोरंजन नहीं बल्कि मातृभूमि की आराधना का यज्ञ बना दिया, उस तपस्वी साहित्य साधक को पूज्य संतों के करकमलों से आशीर्वाद प्राप्त हुआ।
पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने अपने प्रेरणादायक उद्बोधन में कहा कि “कविता तब दिव्य बन जाती है जब उसमें केवल शब्द नहीं, बल्कि संस्कारों की सुगंध, राष्ट्र का स्वाभिमान और मानवता की करुणा प्रवाहित हो। हरिओम पंवार जी ने अपनी लेखनी को कभी व्यक्तिगत प्रसिद्धि का साधन नहीं बनाया, बल्कि उसे राष्ट्र जागरण का दीपक बना दिया। उनकी कविताओं ने अनेकों आत्माओं को झंकृत किया है।”

उन्होंने कहा कि आज के युग में जब शब्दों का मूल्य कम होता जा रहा है, तब ऐसे कवि समाज के लिए प्रकाशस्तम्भ हैं, जो अपनी ओजस्वी वाणी से सोई हुई चेतना को जगा रहे हैं। जिस प्रकार ऋषि-मुनियों ने वेदों के मंत्रों से भारत की आत्मा को जीवित रखा, उसी प्रकार हरिओम पंवार जी ने अपनी कविताओं से भारत की सांस्कृतिक चेतना को जीवंत बनाये रखा है।
पूज्य स्वामी जी ने कहा कि हरिओम पवांर जी की कलम ऐसी चली की वह खुद कलाम बन गयी। किताबें ऐसी लिखी की वह खुद पहचान बन गयी, जिन्दगी जी तो ऐसी जी कि वह मसाल बन गयी। उनकी सभी कवितायें प्रभुभाव को समर्पित है। वे कवियों के भीष्मपितामह है, उनकी कवितायें राष्ट्र की चेतना को जागृत करने वाली दिव्य दृष्टि है।

पूज्य स्वामी रामदेव जी ने कहा कि “जिस राष्ट्र के कवि जागृत होते हैं, वह राष्ट्र कभी पराजित नहीं होता। हरिओम पंवार जी की कविता में केवल शब्दों की अग्नि नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति की तपिश, संस्कृति की गरिमा और सनातन की दिव्यता स्पंदित होती है। उन्होंने कविता को केवल साहित्य नहीं रहने दिया, बल्कि उसे जन-जन के हृदय में राष्ट्र चेतना जगाने का अभियान बना दिया।”

उन्होंने कहा कि आज भारत को ऐसे ही साहित्य साधकों की आवश्यकता है, जो युवाओं को उनकी जड़ों से जोड़ें, उन्हें संस्कृति का गौरव समझाएँ और आत्मगौरव से भर दें। हरिओम पंवार जी की वाणी में वही तेज है, जो किसी साधक की तपस्या में होता है। उनकी कविताएँ केवल सुनाई नहीं देतीं, वे भीतर तक अनुभव होती हैं।
कार्यक्रम में उपस्थित सभी श्रद्धालु, साहित्यप्रेमी और युवा उस दिव्य क्षण के साक्षी बने, जहाँ संतों की आध्यात्मिक शक्ति और कवि की साहित्य साधना एक साथ प्रवाहित हो रही थी।
यह जन्मोत्सव उन मूल्यों का अभिनंदन है, जो भारत की आत्मा को जीवित रखते हैं। यह उस तपस्या का सम्मान है, जिसने मंचों को राष्ट्रभक्ति का मंदिर बना दिया, कविताओं को चेतना का शंखनाद बना दिया और शब्दों को जनजागरण का महायज्ञ बना दिया।

आज जब संसार दिशाहीनता और सांस्कृतिक विघटन के दौर से गुजर रहा है, तब हरिओम पंवार जी जैसे कवि आशा के दीप बनकर खड़े हैं। उनकी वाणी आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देती रहेगी कि साहित्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि राष्ट्रनिर्माण की सबसे शक्तिशाली साधना है।

यह दिव्य अवसर सभी के हृदयों में एक अमिट प्रेरणा बनकर अंकित हो गया जब उन्होंने अपने जन्मदिवस पर मधुकामिनी का पौधा शहिदों के नाम रोपित किया।

By Shashi Sharma

Shashi Sharma Working in journalism since 1985 as the first woman journalist of Uttarakhand. From 1989 for 36 years, she provided her strong services for India's top news agency PTI. Working for a long period of thirty-six years for PTI, he got her pen ironed on many important occasions, in which, by staying in Tehri for two months, positive reporting on Tehri Dam, which was in crisis of controversies, paved the way for construction with the power of her pen. Delivered.

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