*गौ पूजन, गंगा पूजन एवं पौधारोपण कर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी का आशीर्वाद लेकर अभिनेत्री श्रीमती रवीना टंडन जी हुईं परमार्थ निकेतन से विदा*
*परमार्थ परिसर में पूज्य स्वामी जी व साध्वी जी के सान्निध्य में किया रूद्राक्ष के पौधे का रोपण*
*रवीना टंडन जी ने सभी प्राणियों के साथ एक समान व्यवहार करने का किया आह्वान*
*गौ पूजन, गंगा पूजन और पौधारोपण ये भारतीय जीवन-दर्शन के तीन महत्वपूर्ण आयाम*
*स्वामी चिदानन्द सरस्वती*
ऋषिकेश, । सुप्रसिद्ध बॉलीवुड अभिनेत्री एवं पर्यावरण संरक्षण तथा सामाजिक सरोकारों के प्रति अपनी सक्रिय प्रतिबद्धता के लिए विख्यात श्रीमती रवीना टंडन जी ने परमार्थ निकेतन में आध्यात्मिकता, संस्कृति और प्रकृति के संगम का अनुपम अनुभव प्राप्त किया।
अपने प्रवास के दौरान उन्होंने गौ पूजन, गंगा पूजन एवं पौधारोपण जैसे भारतीय संस्कृति के महत्वपूर्ण संस्कारों में सहभागिता की तथा पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज का आशीर्वाद प्राप्त किया।
रवीना टंडन जी को हिमालय की गोद, मां गंगा तट के आध्यात्मिक वातावरण ने गहन शांति और आत्मिक ऊर्जा का अनुभव कराया। उन्होंने कहा कि परमार्थ निकेतन का वातावरण एक अनुभूति है, जहाँ मुझे स्वयं से जुड़ने का अवसर प्राप्त होता है।
अपने प्रवास के दौरान रवीना टंडन जी ने गौ माता का पूजन किया तथा भारतीय संस्कृति में गौ संरक्षण के महत्व पर चर्चा करते हुये सभी प्राणियों के साथ एक समान व्यवहार करने का संदेश देते हुये कहा कि गौ माता, भारतीय परम्परा का प्रतीक, करुणा, सेवा और प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन का संदेश देती हैं। उन्होंने गौ सेवा के माध्यम से समाज में सभी प्राणियों व जीवों के प्रति संवेदनशीलता और सह-अस्तित्व की भावना को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और भावनात्मक जीवनधारा हैं। मां गंगा का संरक्षण केवल पर्यावरणीय दायित्व नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक जिम्मेदारी भी है।
उन्होंने महाकुम्भ प्रयागराज में परमार्थ निकेतन शिविर की मधुर स्मृतियों को साझा करते हुए कहा कि वे अपनी बेटी राशा के साथ वहाँ आई थीं, जहाँ उन्हें पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी का स्नेह, मार्गदर्शन और आशीर्वाद प्राप्त हुआ। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि आज राशा अभिनय के साथ-साथ संगीत के क्षेत्र में भी अपनी प्रतिभा का प्रकाश बिखेर रही हैं और एक उभरते हुए सितारे के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान बना रही हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि पूज्य स्वामीजी का आशीर्वाद सदैव उनके जीवन-पथ को आलोकित करता रहेगा। रवीना टंडन जी ने यह भी कहा कि परमार्थ निकेतन से उनका आत्मिक जुड़ाव विशेष है और अपनी अगली यात्रा में वे पुनः अपनी बेटी राशा को साथ लेकर अवश्य आएंगी।
पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को व्यक्त करते हुए रवीना टंडन जी ने परमार्थ निकेतन परिसर में पौधारोपण किया। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण भविष्य की पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी का प्रतीक है। एक पौधा लगाना केवल पर्यावरणीय कार्य नहीं, बल्कि पृथ्वी और मानवता के प्रति प्रेम और कृतज्ञता का भाव है।
इस अवसर पर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि आज विश्व को केवल तकनीकी प्रगति की नहीं, बल्कि आध्यात्मिक चेतना, करुणा और पर्यावरणीय संवेदनशीलता की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जब समाज के प्रभावशाली व्यक्तित्व संस्कृति, प्रकृति और आध्यात्मिक मूल्यों से जुड़ते हैं, तब उनका सकारात्मक संदेश लाखों लोगों तक पहुँचता है और जनजागरण का माध्यम बनता है।
पूज्य स्वामी जी ने कहा कि गौ पूजन, गंगा पूजन और पौधारोपण ये भारतीय जीवन-दर्शन के तीन महत्वपूर्ण आयाम हैं। गौ पूजन करुणा और संरक्षण का संदेश देता है, गंगा पूजन प्रकृति एवं जल स्रोतों के प्रति सम्मान का प्रतीक है और पौधारोपण भविष्य के प्रति हमारी जिम्मेदारी का संकल्प है। यही भारतीय संस्कृति का वह समग्र दृष्टिकोण है जो मानव और प्रकृति के बीच संतुलन स्थापित करता है।
रवीना टंडन जी ने पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी व डा साध्वी भगवती सरस्वती जी के साथ विभिन्न सामाजिक, पर्यावरणीय एवं आध्यात्मिक विषयों पर चर्चा की तथा उनके मार्गदर्शन और आशीर्वाद को अपने लिए अत्यंत प्रेरणादायी बताया। उन्होंने कहा कि परमार्थ निकेतन में बिताया गया समय उनके लिए आत्मिक ऊर्जा, सकारात्मकता और प्रेरणा का स्रोत है।
पूज्य स्वामी जी व साध्वी जी ने रवीना टंडन जी को रुद्राक्ष का पौधा, आध्यात्मिक साहित्य आशीर्वाद स्वरूप प्रदान किया। परमार्थ निकेतन से विदा लेते समय रवीना टंडन ने माँ गंगा, हिमालय और पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा व्यक्त करते हुए शीघ्र पुनः आने की इच्छा प्रकट की।


By Shashi Sharma

Shashi Sharma Working in journalism since 1985 as the first woman journalist of Uttarakhand. From 1989 for 36 years, she provided her strong services for India's top news agency PTI. Working for a long period of thirty-six years for PTI, he got her pen ironed on many important occasions, in which, by staying in Tehri for two months, positive reporting on Tehri Dam, which was in crisis of controversies, paved the way for construction with the power of her pen. Delivered.

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