राष्ट्रीय ध्वज अंगीकरण दिवस पर परमार्थ निकेतन में लहराया तिंरगा
राष्ट्रीय ध्वज अंगीकरण दिवस पर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी का संदेश तिरंगा, भारत की आत्मा, स्वाभिमान और एकता का जीवंत प्रतीक
भारतीय तिरंगा केवल तीन रंगों का संयोजन नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की आकांक्षाओं, बलिदानों, संघर्षों, संस्कारों और संकल्पों का जीवंत प्रतीक

ऋषिकेश। आज 22 जुलाई, 1947 का दिन भारतीय इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय है। इसी दिन संविधान सभा ने भारत के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को स्वतंत्र भारत के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाया था। स्वतंत्रता प्राप्ति से लगभग तीन सप्ताह पूर्व लिया गया यह ऐतिहासिक निर्णय भारत की राष्ट्रीय अस्मिता, स्वाधीनता और लोकतांत्रिक मूल्यों की घोषणा था। प्रत्येक वर्ष 22 जुलाई को राष्ट्रीय ध्वज अंगीकरण दिवस के रूप में मनाया जाता है, जो हमें तिरंगे के गौरव, उसके आदर्शों और उसके प्रति अपने कर्तव्यों का स्मरण कराता है।
परमार्थ पीठाधीश्वर, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि भारतीय तिरंगा केवल तीन रंगों का संयोजन नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की आकांक्षाओं, बलिदानों, संघर्षों, संस्कारों और संकल्पों का जीवंत प्रतीक है। यह हमें राष्ट्र प्रथम की भावना, विविधता में एकता, सत्य, सेवा, समर्पण और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का संदेश देता है।
तिरंगे के तीन रंगों का संदेश अद्भुत है। केसरिया रंग राष्ट्र के लिए त्याग, साहस, पराक्रम और निःस्वार्थ सेवा का प्रतीक है। यह हमें व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर राष्ट्रहित में कार्य करने की प्रेरणा देता है। श्वेत रंग सत्य, शांति, पवित्रता, पारदर्शिता और सद्भाव का प्रतीक है। यह हमें ईमानदारी, नैतिकता और सामाजिक समरसता के मार्ग पर चलने का संदेश देता है। हरा रंग समृद्धि, विकास, कृषि, पर्यावरण संरक्षण और जीवन के संतुलन का प्रतीक है। यह प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन जीने और सतत विकास के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
तिरंगे के मध्य स्थित गहरे नीले रंग का अशोक चक्र, सारनाथ स्थित अशोक स्तंभ के धर्मचक्र से प्रेरित है। इसमें 24 तीलियाँ हैं, जो निरंतर गतिशीलता, धर्म, न्याय, कर्तव्य, प्रगति और जीवन की सतत यात्रा का संदेश देती हैं। यह हमें याद दिलाता है कि ठहराव नहीं, बल्कि निरंतर कर्म और विकास ही राष्ट्र की उन्नति का मार्ग है।
पूज्य स्वामी जी ने कहा कि आज जब भारत वैश्विक मंच पर नई ऊँचाइयों को प्राप्त कर रहा है, तब तिरंगा केवल हमारी पहचान नहीं, बल्कि हमारे आत्मविश्वास, वैज्ञानिक प्रगति, सांस्कृतिक विरासत, लोकतांत्रिक मूल्यों और विश्व बंधुत्व की भावना का प्रतिनिधि बन चुका है। अंतरिक्ष से लेकर ओलंपिक, सीमा सुरक्षा से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों तक, जहाँ-जहाँ तिरंगा लहराता है, वहाँ भारत की प्रतिष्ठा और करोड़ों भारतीयों का गौरव भी लहराता है।

राष्ट्रीय ध्वज अंगीकरण दिवस केवल एक ऐतिहासिक तिथि है जो राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों को पुनः जागृत करने का अवसर है। यह दिन हमें प्रेरित करता है कि हम तिरंगे के आदर्शों साहस, सत्य, शांति, सेवा, समर्पण, एकता, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रप्रेम को अपने विचारों, संस्कारों और कर्मों में आत्मसात करें।

आइए, इस राष्ट्रीय ध्वज अंगीकरण दिवस पर हम संकल्प लें कि भारत की एकता, अखंडता, लोकतांत्रिक मूल्यों, सांस्कृतिक विरासत और प्रकृति के संरक्षण के लिए सदैव समर्पित रहेंगे तथा तिरंगे की गरिमा बनाए रखेंगे।


By Shashi Sharma

Shashi Sharma Working in journalism since 1985 as the first woman journalist of Uttarakhand. From 1989 for 36 years, she provided her strong services for India's top news agency PTI. Working for a long period of thirty-six years for PTI, he got her pen ironed on many important occasions, in which, by staying in Tehri for two months, positive reporting on Tehri Dam, which was in crisis of controversies, paved the way for construction with the power of her pen. Delivered.

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