हरिद्वार। पम्पलेट में लिखा है कि देश की वर्तमान सरकार के असली चेहरा 20 जुलाई को दूर हो गया होगा। देश की राजधानी दिल्ली में उस दिन लाखों छात्र-नौजवानों के साथ इस सरकार ने जो बर्ताव किया उसने साबित कर दिया कि यह एक फासीवादी सरकार है, यह अपने खिलाफ उठने वाले हर विरोध प्रदर्शन को बर्दाश्त नहीं कर सकती, यह अपने खिलाफ हर विरोध प्रदर्शन को लाठी-गोली से निपटाती है।आखिर छात्रो-नौजवानों की मांग क्या थी? बस यही न कि केन्द्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मांग रहे थे। उस शिक्षा मंत्री का जो आये दिन ‘पेपर लीक’ रोकने में असमर्थ रहा है, छात्र-नौजवान ‘पेपर लीक’ के असली दोषी यानी प्रधानमंत्री के इस्तीफे नहीं मांग रहे थे। असली दोषी इसलिए कि इस सरकार में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के अलावा किसी मंत्री की कोई औकात नहीं है, किसी फासीवादी सरकार में यह हो भी नहीं सकता। उसमें ‘सर्वोच्च नेता’ ही सब कुछ होता है।छात्रों-नौजवानों की शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बदले लाठी-डंडे मिले, मुक्के मिले, सरकार की ओर से गोलियां नहीं चली हालांकि संसद के गेट के भीतर सुरक्षा बल गोलियां चलाने को तैयार खड़े थे। छात्रों-नौजवानों की सिर्फ साफ-सुथरी परीक्षा तथा सम्मानजनक रोजगार न दे सकने वाली सरकार उन पर गोलियां चलाने को तैयार थी। 20 जुलाई को देश की राजधानी में उमड़े लाखों छात्र-नौजवानों पर शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मांगने आये थे, पर असल में उन्हें भविष्य की अनिश्चितता और चिंता वहां ले आई थी।
आज छात्र-नौजवानों की शिक्षा-रोजगार सब कुछ संकट में है, चारों ओर अनिश्चितता का आलम है। भविष्य अंधकारमय नजर आता है। इससे भी आगे आज उनके लिए स्पष्ट है कि ऐसी शासक न केवल छात्रों-नौजवानों के अंधकारमय भविष्य से चिंतित नहीं हैं बल्कि वे अपनी सत्ता में मगन हैं। उनके और उनके बच्चों का भविष्य मंगलमय है, उनकी एकमात्र चिंता अपनी सत्ता में किसी भी तरह से बने रहने तक है। 20 जुलाई को छात्रों-नौजवानों ने अपने निहत्थे अनुभव से जाना कि देश की वर्तमान सरकार का चरित्र कैसा है, उम्मीद है कि उनके मां-बाप भी अब उन चरित्र से वाकिफ हो जायेंगे जो अभी तक हिन्दू मुसलमान के चक्कर में कबूतर की तरह आंख मूंदे हुए थे। उन्हें अब अच्छी तरह समझ लेना चाहिए कि वर्तमान सत्ताधारियों का हिन्दू-मुसलमान का सारी राजनीति उन्हें धोखा देने के लिए है। कि ये ‘हिन्दू राष्ट्र’ के नाम पर असल में टाटा-बिड़ला, अडानी, अंबानी का काम कर रहे हैं। कि वे आम मजदूरों-किसानों, मध्यम वर्गीय लोगों की आंखों पर बड़ी धूर्तपंतियों पर धुल झोंक रहे हैं। इनता हिन्दू धर्म से कोई लेना-देना नहीं है। इन्होनें राम मंदिर की बात दोहरा कर वोट तो लिया, वे भेड़ की खाल में भेड़िये हैं, वे ‘हिन्दू फासीवादी’ हैं जो हिन्दुओं के नाम पर अपना फासीवादी नियंत्रण कायम करना चाहते हैं। यह फासीवादी नियंत्रण केवल बड़े पूंजीपतियों की सेवा करेगा और धर्म के नाम पर आम लोगों का खून निचोड़ेगा।इन ठगों का यह फासीवादी चरित्र अब क्रमशः उजागर होता जा रहा है। हालिया समय में किसानों-मजदूर और छात्र-नौजवान इनके मायाजाल को तोड़ कर सड़क पर उतर रहे हैं, इनके खिलाफ खड़े हुए हैं, अक्सर उन्होंने इन्हें पीछे हटने को मजबूर किया है।इस समय देश भर के छात्र-नौजवान सड़कों पर है। वे उत्तेजित हैं। वे अपने भविष्य को लेकर आशंकित हैं, पर उनके लिए संघर्ष करने को उदात्त माँ है, लेकिन उन्हें अपने संघर्ष के लक्ष्य को दिशांकित करना होगा। उन्हें शिक्षा व्यवस्था में आमूल-चूल परिवर्तन तथा इसे दिशाधारित करना होगा इसके लिए उन्हें प्रसिद्ध भगत सिंह से प्रेरणा लेकर उनके द्वारा घोषित लक्ष्य को अपना लक्ष्य बनाना होगा वर्तमान सरकार से लड़ाई को उन्हें व्यवस्था परिवर्तन की लड़ाई में बदलना होगा। इस लड़ाई में देश के आम मजदूर-मेहनतकश उनके साथ हैं।