गंगा की तेज धार के बीच श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षा कवच बने BEG एवं Centre, रुड़की के जांबाज जवान

31 जुलाई से अब तक 44 श्रद्धालुओं का किया सफल रेस्क्यू

हरिद्वार,  जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी मीरा रावत ने अवगत कराया है कि “हर-हर महादेव” के जयकारों से गूंजते हरिद्वार में गंगा की तेज धार और आस्था के सैलाब के बीच लाखों शिवभक्त कांवड़ यात्रा में शामिल हैं। विशाल आस्था के इस पर्व के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए भारतीय सेना के बंगाल इंजीनियर ग्रुप एवं सेंटर (BEG एवं Centre), रुड़की के प्रशिक्षित जवान एवं गोताखोर लगातार रेस्क्यू ड्यूटी पर तैनात हैं।
31 जुलाई 2026 से अब तक BEG एवं Centre, रुड़की के जवानों द्वारा गंगा की तेज धार में फंसे 44 श्रद्धालुओं का सफल रेस्क्यू किया जा चुका है। तेज बहाव, गहरी धारा और लगातार बढ़ती श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच सेना के जवान पूरी मुस्तैदी के साथ सुरक्षा व्यवस्था में जुटे हुए हैं।
किसी श्रद्धालु के गंगा में असंतुलित होने अथवा तेज बहाव की चपेट में आने की सूचना मिलते ही जवान तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू करते हैं। लाइफ जैकेट, रेस्क्यू रोप और लाइफ रिंग जैसे सुरक्षा उपकरणों के साथ जवान संकट में फंसे श्रद्धालुओं तक पहुंचकर उन्हें सुरक्षित बाहर निकाल रहे हैं।
गंगा की धार तेज, लेकिन जवानों का हौसला उससे भी ऊंचा
हरिद्वार से लेकर रुड़की तक गंगा के किनारे श्रद्धालुओं की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने में सेना के जवान महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। रुड़की के सोलानी पार्क से लेकर हरिद्वार के हाथी पुल क्षेत्र तक श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए जवान पूरी मुस्तैदी से तैनात हैं।
इन जवानों के लिए यह केवल ड्यूटी नहीं, बल्कि मानव जीवन की रक्षा का संकल्प है। लाखों की भीड़ और गंगा की तेज धार के बीच उनका एकमात्र लक्ष्य संकट में फंसे प्रत्येक श्रद्धालु को सुरक्षित बाहर निकालना है।
प्रशासन और सेना का मजबूत सुरक्षा तंत्र
कांवड़ यात्रा को सुरक्षित, सुव्यवस्थित एवं सफल बनाने के लिए जिला प्रशासन एवं पुलिस द्वारा व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई है। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर के नेतृत्व में प्रशासन एवं पुलिस द्वारा सुरक्षा व्यवस्थाओं पर लगातार नजर रखी जा रही है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी मीरा रावत द्वारा भी आपदा एवं बचाव संबंधी व्यवस्थाओं के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जा रही है।
पुलिस, जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन एवं भारतीय सेना के बीच बेहतर समन्वय से श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए मजबूत सुरक्षा तंत्र तैयार किया गया है।
44 रेस्क्यू—कर्तव्य, साहस और इंसानियत की मिसाल
31 जुलाई से 08 अगस्त 2026 तक 44 श्रद्धालुओं का सफल रेस्क्यू BEG एवं Centre, रुड़की के जवानों की तत्परता, प्रशिक्षण एवं साहस का प्रमाण है।
सीमा पर देश की रक्षा करने वाले यही सैनिक जब गंगा की लहरों के बीच किसी अनजान व्यक्ति की जिंदगी बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालते हैं, तो यह केवल सैन्य कर्तव्य नहीं, बल्कि मानवता एवं सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण बन जाता है।
गंगा की धार भले ही कितनी भी तेज हो, इन जांबाज जवानों का हौसला उससे कहीं ऊंचा है।
BEG एवं Centre, रुड़की के इन जांबाज ‘जलवीरों’ को सलाम।


By Shashi Sharma

Shashi Sharma Working in journalism since 1985 as the first woman journalist of Uttarakhand. From 1989 for 36 years, she provided her strong services for India's top news agency PTI. Working for a long period of thirty-six years for PTI, he got her pen ironed on many important occasions, in which, by staying in Tehri for two months, positive reporting on Tehri Dam, which was in crisis of controversies, paved the way for construction with the power of her pen. Delivered.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *