ठोस अपशिष्ट प्रबंधन से निपटने के लिए जमीनी स्तर पर जनप्रतिनिधियों और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक: डॉ पराग मधुकर धकाते, सदस्य सचिव, पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड

– ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 में चार स्तरीय पृथक्करण, डिजिटल निगरानी और बल्क वेस्ट जनरेटर की जवाबदेही पर जोर

– वैज्ञानिक एवं डेटा-आधारित दृष्टिकोण को जमीनी स्तर तक पहुंचाने और जनप्रतिनिधियों की नेतृत्वकारी भूमिका पर जोर

– ग्राम पंचायत से केंद्रीय स्तर तक प्रभावी निगरानी और ऑनलाइन ट्रैकिंग की व्यवस्था

– उत्तराखंड के 1,314 वार्डों में 100 प्रतिशत डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण

– उत्तराखंड में दिसंबर 2026 तक पुराने कचरे और डंपसाइट रेमेडिएशन में तेजी लाने का लक्ष्य

– चारधाम एवं पर्यटन क्षेत्रों के लिए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की विशेष योजना पर जोर: श्री प्रवीण कुमार, अपर निदेशक, शहरी विकास

बुधवार को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी), देहरादून द्वारा सचिवालय मीडिया सेंटर में ‘ठोस अपशिष्ट प्रबंधन’ विषय पर प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। इसमें ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026, लीगेसी वेस्ट/डंपसाइट रेमेडिएशन, कचरा पृथक्करण, वायु प्रदूषण नियंत्रण और स्थानीय निकायों की भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी गई।

पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के सदस्य सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण के साथ कचरे की मात्रा में वृद्धि हो रही है। ऐसे में वैज्ञानिक एवं डेटा-आधारित दृष्टिकोण को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के साथ जनप्रतिनिधियों और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। प्रभावी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और स्वच्छ वायु के लक्ष्य को केवल सरकारी प्रयासों से नहीं, बल्कि सामूहिक भागीदारी से हासिल किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के तहत 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी नए नियमों में कचरे को चार धाराओं—गीला, सूखा, सैनिटरी और विशेष देखभाल वाला कचरा—में अलग करने पर जोर दिया गया है। साथ ही बल्क वेस्ट जनरेटर्स की जिम्मेदारियां बढ़ाई गई हैं और एक्सटेंडेड बल्क वेस्ट जनरेटर्स रिस्पांसिबिलिटी (EBWGR) की व्यवस्था की गई है। नियमों में कचरे के संग्रहण, परिवहन, प्रसंस्करण और निपटान की ऑनलाइन निगरानी तथा डिजिटल पंजीकरण और रिपोर्टिंग का प्रावधान है। इसका उद्देश्य पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के साथ कचरे को संसाधन के रूप में उपयोग कर सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देना है। लैंडफिल को अंतिम विकल्प के रूप में रखते हुए पुनर्चक्रण और पुन: उपयोग को प्राथमिकता दी गई है।

डॉ. धकाते ने जोर देकर कहा कि उत्तराखंड में 108 शहरी स्थानीय निकायों के अंतर्गत 1,314 वार्डों में 100 प्रतिशत डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण की व्यवस्था है। राज्य में लगभग 1,515 वाहन उपलब्ध हैं और अतिरिक्त वाहनों की खरीद प्रक्रिया जारी है। चार-धारा पृथक्करण के लिए नए वाहनों में चार कंपार्टमेंट की व्यवस्था की जा रही है। राज्य में 1,225 वार्डों में स्रोत पर कचरा पृथक्करण शुरू किया जा चुका है। प्रतिदिन लगभग 1,930.85 मीट्रिक टन कचरा उत्पन्न होता है, जिसमें से 1,804.59 मीट्रिक टन (93.46 प्रतिशत) का प्रतिदिन प्रसंस्करण किया जा रहा है। राज्य में 61 लीगेसी वेस्ट/डंपसाइट चिन्हित हैं। इनमें लगभग 23.34 लाख मीट्रिक टन पुराने कचरे में से 12.70 लाख मीट्रिक टन (54.41 प्रतिशत) का उपचार किया जा चुका है। दिसंबर 2026 तक पुराने कचरे के उपचार और डंपसाइट रेमेडिएशन में तेजी लाने का लक्ष्य है। राज्य में 85 MRF, 663 NADEP/कम्पोस्ट पिट और 87 प्लास्टिक कॉम्पैक्टर संचालित हैं तथा 1,058 बल्क वेस्ट जनरेटर्स की पहचान की गई है। कचरा संग्रहण और परिवहन की निगरानी के लिए व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम (VLTS) लागू किया जा रहा है। प्रथम चरण में सभी नगर निगमों को इसके दायरे में लाया जा रहा है।

श्री प्रवीण कुमार, अपर निदेशक, शहरी विकास ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन संबंधी निर्देशों का भी उल्लेख किया गया। न्यायालय ने अनुपालन, BWGs की जवाबदेही, डिजिटल पंजीकरण, निगरानी और अनधिकृत डंपिंग पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया है। भारत ‘जीरो डंपसाइट’ के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रहा है। डंपसाइट रेमेडिएशन के माध्यम से पुराने कचरे का वैज्ञानिक उपचार कर उसे सड़क निर्माण सामग्री, भरान सामग्री, रिसाइकल योग्य वस्तुओं और RDF जैसे उपयोगी संसाधनों में परिवर्तित किया जा रहा…

– ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 में चार स्तरीय पृथक्करण, डिजिटल निगरानी और बल्क वेस्ट जनरेटर की जवाबदेही पर जोर

– वैज्ञानिक एवं डेटा-आधारित दृष्टिकोण को जमीनी स्तर तक पहुंचाने और जनप्रतिनिधियों की नेतृत्वकारी भूमिका पर जोर

– ग्राम पंचायत से केंद्रीय स्तर तक प्रभावी निगरानी और ऑनलाइन ट्रैकिंग की व्यवस्था

– उत्तराखंड के 1,314 वार्डों में 100 प्रतिशत डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण

– उत्तराखंड में दिसंबर 2026 तक पुराने कचरे और डंपसाइट रेमेडिएशन में तेजी लाने का लक्ष्य

– चारधाम एवं पर्यटन क्षेत्रों के लिए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की विशेष योजना पर जोर: श्री प्रवीण कुमार, अपर निदेशक, शहरी विकास

 

बुधवार को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी), देहरादून द्वारा सचिवालय मीडिया सेंटर में ‘ठोस अपशिष्ट प्रबंधन’ विषय पर प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। इसमें ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026, लीगेसी वेस्ट/डंपसाइट रेमेडिएशन, कचरा पृथक्करण, वायु प्रदूषण नियंत्रण और स्थानीय निकायों की भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी गई।

पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के सदस्य सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण के साथ कचरे की मात्रा में वृद्धि हो रही है। ऐसे में वैज्ञानिक एवं डेटा-आधारित दृष्टिकोण को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के साथ जनप्रतिनिधियों और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। प्रभावी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और स्वच्छ वायु के लक्ष्य को केवल सरकारी प्रयासों से नहीं, बल्कि सामूहिक भागीदारी से हासिल किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के तहत 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी नए नियमों में कचरे को चार धाराओं—गीला, सूखा, सैनिटरी और विशेष देखभाल वाला कचरा—में अलग करने पर जोर दिया गया है। साथ ही बल्क वेस्ट जनरेटर्स की जिम्मेदारियां बढ़ाई गई हैं और एक्सटेंडेड बल्क वेस्ट जनरेटर्स रिस्पांसिबिलिटी (EBWGR) की व्यवस्था की गई है। नियमों में कचरे के संग्रहण, परिवहन, प्रसंस्करण और निपटान की ऑनलाइन निगरानी तथा डिजिटल पंजीकरण और रिपोर्टिंग का प्रावधान है। इसका उद्देश्य पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के साथ कचरे को संसाधन के रूप में उपयोग कर सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देना है। लैंडफिल को अंतिम विकल्प के रूप में रखते हुए पुनर्चक्रण और पुन: उपयोग को प्राथमिकता दी गई है।

डॉ. धकाते ने जोर देकर कहा कि उत्तराखंड में 108 शहरी स्थानीय निकायों के अंतर्गत 1,314 वार्डों में 100 प्रतिशत डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण की व्यवस्था है। राज्य में लगभग 1,515 वाहन उपलब्ध हैं और अतिरिक्त वाहनों की खरीद प्रक्रिया जारी है। चार-धारा पृथक्करण के लिए नए वाहनों में चार कंपार्टमेंट की व्यवस्था की जा रही है। राज्य में 1,225 वार्डों में स्रोत पर कचरा पृथक्करण शुरू किया जा चुका है। प्रतिदिन लगभग 1,930.85 मीट्रिक टन कचरा उत्पन्न होता है, जिसमें से 1,804.59 मीट्रिक टन (93.46 प्रतिशत) का प्रतिदिन प्रसंस्करण किया जा रहा है। राज्य में 61 लीगेसी वेस्ट/डंपसाइट चिन्हित हैं। इनमें लगभग 23.34 लाख मीट्रिक टन पुराने कचरे में से 12.70 लाख मीट्रिक टन (54.41 प्रतिशत) का उपचार किया जा चुका है। दिसंबर 2026 तक पुराने कचरे के उपचार और डंपसाइट रेमेडिएशन में तेजी लाने का लक्ष्य है। राज्य में 85 MRF, 663 NADEP/कम्पोस्ट पिट और 87 प्लास्टिक कॉम्पैक्टर संचालित हैं तथा 1,058 बल्क वेस्ट जनरेटर्स की पहचान की गई है। कचरा संग्रहण और परिवहन की निगरानी के लिए व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम (VLTS) लागू किया जा रहा है। प्रथम चरण में सभी नगर निगमों को इसके दायरे में लाया जा रहा है।

श्री प्रवीण कुमार, अपर निदेशक, शहरी विकास ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन संबंधी निर्देशों का भी उल्लेख किया गया। न्यायालय ने अनुपालन, BWGs की जवाबदेही, डिजिटल पंजीकरण, निगरानी और अनधिकृत डंपिंग पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया है। भारत ‘जीरो डंपसाइट’ के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रहा है। डंपसाइट रेमेडिएशन के माध्यम से पुराने कचरे का वैज्ञानिक उपचार कर उसे सड़क निर्माण सामग्री, भरान सामग्री, रिसाइकल योग्य वस्तुओं और RDF जैसे उपयोगी संसाधनों में परिवर्तित किया जा रहा…


By Shashi Sharma

Shashi Sharma – Senior Woman Journalist

Shashi Sharma has been active in journalism since 1985, holding the distinction of being Uttarakhand's first female journalist.

For 36 years, starting in 1989, she rendered distinguished service to India's premier news agency, PTI. During this long tenure, she demonstrated the power of her writing on numerous significant occasions; notably, she spent two months in Tehri reporting positively on the Tehri Dam—which was then mired in controversy—and used her pen to help pave the way for its construction.

Currently, Mrs. Shashi Sharma runs the news portal *Newsok24.com* and serves as the editor of the weekly newspaper *Desh Nirdesh*; she is also a registered anchor and commentator for Delhi Doordarshan.

शशि शर्मा वरिष्ठ महिला पत्रकार शशि शर्मा उत्तराखंड की पहली महिला पत्रकार के तौर पर 1985 से पत्रकारिता में कार्यरत हैं। 1989 से 36 वर्षों तक उन्होंने भारत की शीर्ष समाचार एजेंसी पीटीआई के लिए अपनी सशक्त सेवाएं दीं। छत्तीस वर्षों की लंबी अवधि तक पीटीआई के लिए काम करते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण मौकों पर अपनी कलम का लोहा मनवाया, जिसमें दो महीने तक टिहरी में रहकर विवादों के संकट में रहे टिहरी बांध पर सकारात्मक रिपोर्टिंग कर अपनी कलम की ताकत से निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया। वर्तमान में श्रीमती शशि शर्मा Newsok24 com न्यूज पोर्टल को चला रहीं हैं और साप्ताहिक समाचार पत्र देश निर्देश की सम्पादक होने के साथ ही दिल्ली दूरदर्शन की रजिस्टर्ड एंकर और कमेंटेटर भी हैं।

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