परमार्थ निकेतन में योग टीचर ट्रेनिंग कोर्स के नए बैच का शुभारंभ
🌸योग के साथ सनातन संस्कृति, सेवा, साधना और प्रकृति से जुड़ने का संदेश
✨भारत की धरती से योगमय जीवन जीने की कला लेकर जाएँ
🙏🏿स्वामी चिदानन्द सरस्वती
💥शहीद भगतसिंह जी की जयंती पर परमार्थ निकेेतन से भावभीनी श्रद्धाजंलि

ऋषिकेश, 28 सितम्बर। पावन गंगा तट पर स्थित परमार्थ निकेतन में आज योग टीचर ट्रेनिंग कोर्स के नए बैच का शुभारंभ परमार्थ पीठाधीश्वर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी एवं डॉ. साध्वी भगवती सरस्वती जी की पावन सान्निध्य में हुआ। विश्व के विभिन्न देशों से आए योग साधकों ने इस अवसर पर योग, ध्यान, प्राणायाम और भारतीय जीवन-दर्शन की उस समृद्ध परंपरा से जुड़ने का संकल्प लिया, जिसने हजारों वर्षों से मानवता को शरीर, मन और आत्मा के संतुलन का मार्ग दिखाया है।

इस अवसर पर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि भारत केवल योग सीखने की भूमि नहीं है, बल्कि योग को जीने की भूमि है। भारत की धरती से जब कोई साधक योग का ज्ञान लेकर लौटे, तो उसके साथ केवल कुछ आसन और प्राणायाम की तकनीकें ही न हो, बल्कि भारत की सनातन जीवन-दृष्टि, करुणा, सेवा, शांति, प्रकृति के प्रति सम्मान और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ का भाव भी हो।

उन्होंने कहा कि योग का वास्तविक अर्थ केवल शरीर को मोड़ना या आसनों का अभ्यास करना नहीं है। योग अर्थात् अपने भीतर से जुड़ना, प्रकृति से जुड़ना और समस्त सृष्टि से अपने संबंध को अनुभव करना। योग हमें संदेश देता है कि जीवन केवल ‘मैं’ तक सीमित नहीं है; जीवन में ‘हम’ का विस्तार ही भारतीय संस्कृति की सुंदरता है।

योग भारत की प्राचीन धरोहर होते हुए भी पूरी मानवता की साझा विरासत है। भारत ने योग को कभी केवल अपने लिए सीमित नहीं रखा; ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ की भावना के साथ योग का ज्ञान समस्त मानवता के कल्याण के लिए समर्पित किया है, इसी भावना के साथ इस साधना को आगे बढ़ाते रहें।

डॉ. साध्वी भगवती सरस्वती जी ने कहा कि योग हमें स्वयं के साथ एक गहरे और सुंदर संबंध की ओर ले जाता है। योग की यात्रा बाहर से भीतर और भीतर से पूरे अस्तित्व की ओर जाने की यात्रा है। उन्होंने कहा कि भारत आने वाले साधकों के लिए यह अवसर केवल योग सीखने का नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति के उस अनुभव को समझने का है जिसमें आध्यात्मिकता और दैनिक जीवन अलग-अलग नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन परंपरा हमें सिखाती है कि जीवन में स्वास्थ्य के साथ शांति, सफलता के साथ संतुलन और ज्ञान के साथ करुणा भी आवश्यक है। योग इन सभी को जोड़ने वाला एक सुंदर सेतु है।

योग टीचर ट्रेनिंग कोर्स के इस प्रशिक्षण में देश-विदेश से आए साधक योगासन, प्राणायाम, ध्यान, योग दर्शन, शरीर-विज्ञान और शिक्षण पद्धतियों का अध्ययन करने के साथ-साथ भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं को भी निकट से अनुभव कर रहे हैं। विश्व विख्यात माँ गंगा जी की आरती, यज्ञ, प्रार्थना, ध्यान, सत्संग, सेवा और प्रकृति के सान्निध्य के माध्यम से वे योग को केवल एक विषय के रूप में नहीं, बल्कि जीवन-पद्धति के रूप में समझने का प्रयास कर रहे हैं।

गंगा के पावन तट पर गूँजते मंत्रों, प्रार्थनाओं और योग की साधना के बीच योग टीचर ट्रेनिंग कोर्स के नए बैच का यह शुभारंभ एक ऐसे संकल्प के साथ हुआ कि योग केवल कक्षाओं तक सीमित न रहे, बल्कि जीवन का हिस्सा बने और भारत की सनातन ज्ञान-परंपरा से निकला यह प्रकाश पूरे विश्व को शांति, स्वास्थ्य और सद्भाव से प्रकाशित करे।

योग टीचर ट्रेनिंग कोर्स के विद्यार्थियों को योगाचार्य साध्वी आभा सरस्वती जी, योगाचार्य, गंगा नंदिनी जी, डॉ. इंदु शर्मा जी, योगाचार्य गायत्री जी, आचार्य मयंक जी, डॉ. राठौर जी, डॉ. श्री एवं श्रीमती लेले जी (आयुर्वेद), डॉ. गेरी आदि प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं।
एमिली लू वेरामेसा, रायन किंग, प्रशांत आनंद, नादिया मोंटेसीनोस, अमेरिका, सोनल वर्मा, संजना सोनी, अर्चना रविचंद्रन, संजुक्ता पांडे, भारत, माइकेला वित्नेरोवा, चेक गणराज्य, ब्रैंडन रोड्रिगो जेरेज़ ग्वाटेमाला, तेतियाना मारुश्चक, स्वीडन, डेविड आर्तुरो हर्नांडेज़ लेयवा, मेक्सिको, संतोशिनी मासाइपेता, डेनिएला रेयेस आंद्रादे, मेक्सिको, प्रकाश खनाल, नेपाल, मिरेया कैबरेरा ओर्तेगा, मेक्सिको, सैमुअल जेम्स, आयरलैंड, माइकेला चाहोवा, चेक गणराज्य आदि योग जिज्ञासु प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।
शहीद भगत सिंह को उनकी जयंती पर आज की परमार्थ निकेतन गंगा जी की आरती उन्हें समर्पित की। जिन्होंने अपने अदम्य साहस और शौर्य से आजादी के आंदोलन को नई धार दी। राष्ट्र के सम्मान के लिए सर्वस्व न्योछावर करने का उनका जज्बा भारत के नौजवानों की हिम्मत और हौसले का प्रतीक है।
हरित क्रांति के जनक एवं किसान कल्याण के लिए समर्पित, प्रतिष्ठित कृषि वैज्ञानिक, भारत रत्न डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन जी की पुण्यतिथि पर उन्हें भावभीनी श्रद्धाजंलि।
भारत रत्न स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर जी को उनकी जयंती पर श्रद्धाजंलि अर्पित करते हुये पूज्य स्वामी जी ने कहा कि उनका स्वर भारतीय संगीत की आत्मा बनकर सदा हमारे बीच गूंजता रहेगा।
स्वर कोकिला लता मंगेशकर जी की अप्रतिम और अद्वितीय आवाज सदियों तक भारत और दुनिया भर के संगीत प्रेमियों के दिलों में बसी रहेगी। उनके सुरों ने संगीत जगत को नए प्राण देकर समृद्ध किया।


By Shashi Sharma

Shashi Sharma – Senior Woman Journalist

Shashi Sharma has been active in journalism since 1985, holding the distinction of being Uttarakhand's first female journalist.

For 36 years, starting in 1989, she rendered distinguished service to India's premier news agency, PTI. During this long tenure, she demonstrated the power of her writing on numerous significant occasions; notably, she spent two months in Tehri reporting positively on the Tehri Dam—which was then mired in controversy—and used her pen to help pave the way for its construction.

Currently, Mrs. Shashi Sharma runs the news portal *Newsok24.com* and serves as the editor of the weekly newspaper *Desh Nirdesh*; she is also a registered anchor and commentator for Delhi Doordarshan.

शशि शर्मा वरिष्ठ महिला पत्रकार शशि शर्मा उत्तराखंड की पहली महिला पत्रकार के तौर पर 1985 से पत्रकारिता में कार्यरत हैं। 1989 से 36 वर्षों तक उन्होंने भारत की शीर्ष समाचार एजेंसी पीटीआई के लिए अपनी सशक्त सेवाएं दीं। छत्तीस वर्षों की लंबी अवधि तक पीटीआई के लिए काम करते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण मौकों पर अपनी कलम का लोहा मनवाया, जिसमें दो महीने तक टिहरी में रहकर विवादों के संकट में रहे टिहरी बांध पर सकारात्मक रिपोर्टिंग कर अपनी कलम की ताकत से निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया। वर्तमान में श्रीमती शशि शर्मा Newsok24 com न्यूज पोर्टल को चला रहीं हैं और साप्ताहिक समाचार पत्र देश निर्देश की सम्पादक होने के साथ ही दिल्ली दूरदर्शन की रजिस्टर्ड एंकर और कमेंटेटर भी हैं।

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