चार साल बाद टूटा गतिरोध, बढ़ा मेजबानी का दायरा

लेक फेस्टिवल की गतिविधियां इस बार सिर्फ टिहरी में नहीं, कई अन्य जगह भी

-नरेंद्रनगर, घनसाली, प्रतापनगर, धनोल्टी, देवप्रयाग भी इस बार मेजबान

-2021 के बाद नहीं हुआ था आयोेजन, कोरोना के कारण लगा था ब्रेक

कोटी कालोेनी। इस बार का टिहरी लेक फेस्टिवल कई मायनों में खास है। सबसे खास बात चार वर्षों से चले आ रहे गतिरोध के टूटने से जुड़ी है। कोविड-19 की वजह से इस आयोजन पर ग्रहण लग गया था। मगर राज्य सरकार ने ठानी, तो इस बार गतिरोध टूट गया। एक और अहम बात काबिलेगौर है। इस बार सिर्फ टिहरी शहर ही इस आयोजन का मेजबान नहीं है, बल्कि मेजबानी का दायरा कई अन्य शहरों तक फैल गया है। यह पहली बार हो रहा है कि नरेंद्रनगर, घनसाली, प्रतापनगर, धनोल्टी और देवप्रयाग जैसे स्थान भी इस आयोजन की मेजबानी कर रहे हैं।

दरअसल, राज्य सरकार बडे़ आयोजनों को किसी एक जगह पर केंद्रित न रखकर उसे विभिन्न स्थानों पर आयोजित करा रही है। इसका सबसे बड़ा फायदा इस रूप में आता है कि ज्यादा से ज्यादा क्षेत्रों को बडे़ आयोजन से एक्सपोजर मिलता है। राष्ट्रीय खेलों का उदाहरण हमारे सामने है, जिसे देहरादून के अलावा, हरिद्वार, हल्द्वानी, रूद्रपुर से लेकर टिहरी, पिथौरागढ़ जैसे स्थानों में भी आयोजित किया गया।

टिहरी लेक फेस्टिवल के इतिहास में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ, जबकि देवप्रयाग, नरेंद्रनगर, प्रतापनगर, धनोल्टी और घनसाली जैसे क्षेत्रों को इस आयोजन से जोड़ा गया हो। इन जगहों पर ट्रैकिंग के इवेंट से लेकर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी विशेष आयोजन किया जा रहा है। एक तरह से कह सकते हैं कि पहली बार टिहरी लेक फेस्टिवल में टिहरी शहर नहीं, बल्कि पूरा जिला मेजबान बतौर अपनी भूूमिका निभा रहा है। टिहरी की डीएम नितिका खंडेलवाल का कहना है कि टिहरी जिले के कई क्षेत्र ऐसे हैं, जो पर्यटन के मानचित्र पर और भी ज्यादा चमक सकते हैं। टिहरी लेक फेस्टिवल में ज्यादा से ज्यादा क्षेत्रों की सहभागिता से अच्छे व सार्थक परिणाम मिलेंगे।

कोट–

-टिहरी उत्तराखंड का ऐसा जिला है, जो पर्यटन के क्षेत्र में व्यापक संभावनाएं समेटे हुए हैं। टिहरी झील का आकर्षण तो जगजाहिर है। देश-दुनिया के लोग यहां पर खिंचे चले आ रहे हैं। सरकार यहां पर सुविधाओं का लगातार विस्तार कर रही है। ताकि टिहरी पर्यटन के मानचित्र पर अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर पाए।


By Shashi Sharma

Shashi Sharma Working in journalism since 1985 as the first woman journalist of Uttarakhand. From 1989 for 36 years, she provided her strong services for India's top news agency PTI. Working for a long period of thirty-six years for PTI, he got her pen ironed on many important occasions, in which, by staying in Tehri for two months, positive reporting on Tehri Dam, which was in crisis of controversies, paved the way for construction with the power of her pen. Delivered.

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