परमार्थ निकेतन, अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव की तैयारियों के बीच दे रहा है प्रकृति संरक्षण और सिंगल यूज प्लास्टिक से मुक्त विश्व का संदेश*

प्रकृति की रक्षा ही संस्कृति की रक्षा है, और संस्कृति की रक्षा ही हमारी संतति के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला है*

धरती को बचाना है तो अपने व्यवहार को बदलना होगा*

स्वामी चिदानन्द सरस्वती*

ऋषिकेश, 6 मार्च। देवभूमि उत्तराखंड की पावन धरती, परमार्थ निकेतन में इन दिनों अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव की तैयारियाँ पूरे उत्साह और ऊर्जा के साथ चल रही हैं। विश्व के अनेक देशों से आने वाले योगाचार्य, साधक और योग जिज्ञासु यहाँ एकत्रित होकर योग, ध्यान और आध्यात्मिकता के माध्यम से मानवता को एकता का संदेश देने हेतु आ रहे हैं। इस महोत्सव की एक और महत्वपूर्ण विशेषता है, प्रकृति के संरक्षण और सिंगल यूज प्लास्टिक से मुक्त विश्व का सशक्त संकल्प भी इसकी विशेषता है।

परमार्थ निकेतन सदैव से केवल आध्यात्मिक साधना का केन्द्र ही नहीं रहा, बल्कि यह प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण के लिए भी एक प्रेरणास्रोत रहा है। इसी भावना के साथ इस वर्ष योग महोत्सव की तैयारियों के दौरान यहाँ आने वाले पर्यटकों, श्रद्धालुओं और योग साधकों को कपड़े का झोला भेंट कर एक महत्वपूर्ण संदेश दिया जा रहा है, धरती को बचाना है तो अपने व्यवहार को बदलना होगा।

आज पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और पर्यावरणीय संकट की चुनौती से जूझ रही है। नदियाँ प्रदूषित हो रही हैं, जंगल सिकुड़ रहे हैं और पृथ्वी का संतुलन धीरे-धीरे बिगड़ता जा रहा है। इन समस्याओं के पीछे केवल बड़े उद्योग या नीतियाँ ही नहीं, बल्कि हमारी रोजमर्रा की छोटी-छोटी आदतें भी जिम्मेदार हैं। हम अक्सर सुविधा के लिए प्लास्टिक की थैलियाँ, बोतलें और पैकेजिंग का उपयोग कर लेते हैं, लेकिन यह भूल जाते हैं कि वही प्लास्टिक सदियों तक पृथ्वी को प्रदूषित करता रहता है।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि परमार्थ निकेतन द्वारा दिये जा रहे कपड़े के झोले केवल एक उपहार नहीं है, बल्कि यह जिम्मेदारी का प्रतीक है, एक ऐसा संकल्प कि हम अपने दैनिक जीवन में छोटे-छोटे परिवर्तन करके पृथ्वी के भविष्य को सुरक्षित बना सकते हैं। जब एक व्यक्ति प्लास्टिक की जगह कपड़े का झोला अपनाता है, तो वह केवल एक वस्तु का चयन नहीं करता, बल्कि वह प्रकृति के प्रति अपनी चेतना और संवेदनशीलता का परिचय देता है।

स्वामी जी ने कहा कि “प्रकृति, संस्कृति और संतति की सुरक्षा के लिए हमें अपनी दिनचर्या में परिवर्तन करना होगा।” यदि हम चाहते हैं कि आने वाली पीढ़ियाँ स्वच्छ नदियाँ, हरित पर्वत और शुद्ध वातावरण में जीवन जी सकें, तो हमें आज ही अपनी जीवनशैली को अधिक जागरूक और पर्यावरण-अनुकूल बनाना होगा।

स्वामी जी ने कहा कि योग का वास्तविक अर्थ भी यही है संतुलन। जिस प्रकार योग हमारे शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करता है, उसी प्रकार हमें प्रकृति के साथ भी संतुलित संबंध बनाना होगा। यदि हम पृथ्वी के संसाधनों का असीमित दोहन करेंगे, तो अंततः उसका दुष्प्रभाव हमारे जीवन पर ही पड़ेगा।

यह समय केवल चिंता करने का नहीं, बल्कि संकल्प लेने का है। यदि हम सभी अपनी दिनचर्या में कुछ छोटे-छोटे परिवर्तन करें, जैसे सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग बंद करना, कपड़े के झोले अपनाना, जल और ऊर्जा की बचत करना, पौधारोपण करना और प्रकृति के प्रति संवेदनशील रहना तो ये छोटे छोटे कदम मिलकर एक बड़ा परिवर्तन ला सकते हैं।

अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव में अवसर पर परमार्थ निकेतन से उठ रहा यह संदेश केवल ऋषिकेश या उत्तराखण्ड तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे विश्व के लिए एक प्रेरणा है। योग की इस पावन भूमि से यह आह्वान किया जा रहा है कि पृथ्वी केवल हमारे लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी है।

आइए, हम सभी मिलकर यह संकल्प लें कि हम अपनी जीवनशैली में ऐसे परिवर्तन करेंगे जो प्रकृति के अनुकूल हों क्योंकि जब हम पृथ्वी की रक्षा करते हैं, तब वास्तव में हम मानवता के भविष्य की रक्षा कर रहे होते हैं।


By Shashi Sharma

Shashi Sharma – Senior Woman Journalist

Shashi Sharma has been active in journalism since 1985, holding the distinction of being Uttarakhand's first female journalist.

For 36 years, starting in 1989, she rendered distinguished service to India's premier news agency, PTI. During this long tenure, she demonstrated the power of her writing on numerous significant occasions; notably, she spent two months in Tehri reporting positively on the Tehri Dam—which was then mired in controversy—and used her pen to help pave the way for its construction.

Currently, Mrs. Shashi Sharma runs the news portal *Newsok24.com* and serves as the editor of the weekly newspaper *Desh Nirdesh*; she is also a registered anchor and commentator for Delhi Doordarshan.

शशि शर्मा वरिष्ठ महिला पत्रकार शशि शर्मा उत्तराखंड की पहली महिला पत्रकार के तौर पर 1985 से पत्रकारिता में कार्यरत हैं। 1989 से 36 वर्षों तक उन्होंने भारत की शीर्ष समाचार एजेंसी पीटीआई के लिए अपनी सशक्त सेवाएं दीं। छत्तीस वर्षों की लंबी अवधि तक पीटीआई के लिए काम करते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण मौकों पर अपनी कलम का लोहा मनवाया, जिसमें दो महीने तक टिहरी में रहकर विवादों के संकट में रहे टिहरी बांध पर सकारात्मक रिपोर्टिंग कर अपनी कलम की ताकत से निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया। वर्तमान में श्रीमती शशि शर्मा Newsok24 com न्यूज पोर्टल को चला रहीं हैं और साप्ताहिक समाचार पत्र देश निर्देश की सम्पादक होने के साथ ही दिल्ली दूरदर्शन की रजिस्टर्ड एंकर और कमेंटेटर भी हैं।

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