राष्ट्रीय सैनिक संस्था” का अठारहवाँ राष्ट्रीय अधिवेशन
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी का पावन सान्निध्य, उद्बोधन एवं आशीर्वाद
माननीय राज्यपाल उत्तराखंड गुरमीत सिंह जी, जैन संत आचार्य लोकेश मुनि जी, वरिष्ठ जनप्रतिनिधि विजय गोयल जी, पूर्व केंद्रीय मंत्री तथा अनेक विशिष्ट अतिथियों की गरिमामय उपस्थिति
श्री राजनाथ सिंह जी, रक्षा मंत्री, भारत सरकार, श्री आरिफ मोहम्मद खान साहब, राज्यपाल, बिहार एवं श्री वी. के. सिंह जी, राज्यपाल, मिजोरम ने वर्चुअल रूप से सहभाग कर संबोधित किया
श्री तेजेन्द्र पाल त्यागी जी, अध्यक्ष, राष्ट्रीय सैनिक संस्था के नेतृत्व में आयोजित
“सैनिक वेतन के लिये नहीं, वतन के लिये जीते हैं”
“सोच बदलती है तो समाज बदलता है, और समाज बदलता है तो संसार बदलता है”
“अब हमें महाभारत की नहीं, महान भारत बनाने की आवश्यकता है”
स्वामी चिदानन्द सरस्वती

नई दिल्ली, 24 फरवरी। राष्ट्रसेवा, शौर्य, समर्पण एवं बलिदान की दिव्य परंपरा को नमन करते हुए राष्ट्रीय सैनिक संस्था का अठारहवाँ राष्ट्रीय अधिवेशन आज सत्याग्रह मंडप, राजघाट स्थित गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति परिसर में अत्यंत गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। देश के विभिन्न राज्यों से आए पूर्व सैनिकों, वीरांगनाओं, सैन्य अधिकारियों, समाजसेवियों तथा गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति ने इस अधिवेशन को राष्ट्रीय एकता और सैनिक सम्मान का विराट मंच बना दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगान, शहीदों की आरती एवं शंखनाद के साथ हुआ, जिससे संपूर्ण परिसर राष्ट्रभक्ति की भावनाओं से ओतप्रोत हो उठा। इस अवसर पर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष, स्वामी शुकदेवानन्द ट्रष्ट के मैनेजिंग ट्रष्टी, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी का पावन सान्निध्य प्राप्त हुआ। साथ ही माननीय राज्यपाल उत्तराखंड गुरमीत सिंह जी, जैन संत आचार्य लोकेश मुनि जी, वरिष्ठ जनप्रतिनिधि विजय गोयल जी, पूर्व केंद्रीय मंत्री, श्री पवन सिन्हा जी, संस्थापक, पवन चिंतन धारा, श्री राजन छिब्बर जी, सलाहकार, स्कोडा समूह तथा अनेक विशिष्ट अतिथियों की गरिमामय उपस्थिति रही।

अपने प्रेरक एवं ओजस्वी उद्बोधन में स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने सैनिकों के त्याग और तपस्या को राष्ट्र की आत्मा बताते हुए कहा, “सैनिक वेतन के लिये नहीं, वतन के लिये जीते हैं। उनका जीवन अनुशासन, समर्पण और राष्ट्रप्रेम की जीवंत मिसाल है।” उन्होंने कहा कि सैनिक केवल सीमाओं की रक्षा नहीं करते, बल्कि वे राष्ट्र की संस्कृति, संस्कार और स्वाभिमान के भी रक्षक हैं। उनके त्याग के कारण ही देश सुरक्षित, स्वतंत्र और समृद्ध है।
स्वामी जी ने आगे कहा, “सोच बदलती है तो समाज बदलता है, और समाज बदलता है तो पूरा संसार बदलता है। आज आवश्यकता है कि हम नकारात्मकता और विभाजन से ऊपर उठकर सकारात्मकता, सेवा और समरसता को अपनाएँ।” उन्होंने सभी का आह्वान करते हुए कहा कि आज का समय संघर्ष और टकराव का नहीं, बल्कि राष्ट्रनिर्माण का है। “अब हमें महाभारत की नहीं, महान भारत बनाने की आवश्यकता है।”
माननीय राज्यपाल गुरमीत सिंह जी ने अपने संबोधन में सैनिकों के साहस और बलिदान को राष्ट्र की आधारशिला बताते हुए कहा कि भारत की सीमाओं की सुरक्षा केवल सैन्य शक्ति से नहीं, बल्कि सैनिकों की निष्ठा और समर्पण से सुनिश्चित होती है। उन्होंने कहा, “हमारे सैनिक कठिनतम परिस्थितियों में भी राष्ट्रधर्म का पालन करते हैं। उनका त्याग हमें कर्तव्य, अनुशासन और देशप्रेम का वास्तविक अर्थ सिखाता है।
माननीय राज्यपाल जी ने शहीद परिवारों को राष्ट्र की अमूल्य धरोहर बताते हुए उनके सम्मान और कल्याण की प्रतिबद्धता दोहरायी।
अधिवेशन के दौरान शहीद सैनिकों के परिजनों और वीरांगनाओं का विशेष सम्मान किया गया। यह सम्मान समारोह अत्यंत भावुक एवं प्रेरणादायी रहा, जहाँ उपस्थित सभी लोगों ने खड़े होकर वीर परिवारों के प्रति कृतज्ञता प्रकट की। इस अवसर पर सैनिकों के योगदान पर आधारित सांस्कृतिक एवं प्रेरक प्रस्तुतियाँ भी आयोजित की गईं। नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जीवन, त्याग और बलिदान पर आधारित एकल नाट्य प्रस्तुति विशेष आकर्षण का केंद्र रही, जिसने देशभक्ति की भावना को और प्रबल किया।

कार्यक्रम में सेना के वरिष्ठ अधिकारियों एवं विशिष्ट वक्ताओं ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि सैनिकों का सम्मान केवल समारोहों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक को उनके परिवारों के साथ खड़े होकर उनके योगदान को स्मरण करना चाहिए। वक्ताओं ने युवाओं को सेना और राष्ट्रसेवा के प्रति प्रेरित करने पर भी समवेत रूप से बल दिया।
अंत में प्रस्ताव वाचन, धन्यवाद ज्ञापन तथा राष्ट्रगान के साथ अधिवेशन का समापन हुआ। समूचा वातावरण देशभक्ति, अनुशासन और एकता के संकल्प से गूंज उठा।
यह अधिवेशन सैनिक सम्मान, राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक मूल्यों और महान भारत के निर्माण की दिशा में एक सशक्त एवं प्रेरणादायी कदम है।
इस अवसर पर श्री ई.एस.एम. पी. पी. सिंह जी, कोषाध्यक्षय कर्नल मुकेश त्यागी जी, अध्यक्ष, उत्तर क्षेत्रय राजीव जॉली खोसला जी, संयोजक, उत्तर क्षेत्रय उषा राणा जी, अध्यक्ष, महिला प्रकोष्ठ (उत्तर क्षेत्र), अधिवक्ता सुधीर कुमार जी, अध्यक्ष, युवा प्रकोष्ठ (उत्तर क्षेत्र)य उर्वशी वालिया जी, अध्यक्ष, महिला प्रकोष्ठ (दिल्ली), ई.एस.एम. ज्ञान सिंह जी, अध्यक्ष, गाजियाबादय सुनील बंसल जी, अध्यक्ष, युवा प्रकोष्ठ (दिल्ली), राज शर्मा जी, अध्यक्ष, महिला प्रकोष्ठ (गाजियाबाद), नमिता भल्ला जी, अध्यक्ष, द्रांगय पुष्कर सिंह जी, अध्यक्ष, युवा प्रकोष्ठ, लेफ्टिनेंट वी. पी. शर्मा जी, उपाध्यक्षय अंजू शर्मा जी, संयुक्त सचिव, अधिवक्ता सुनील कुमार जी, विधिक सलाहकार, स्वाति बंसल जी, सदस्य, राष्ट्रीय सैनिक संस्था आदि अनेक विशिष्ट विभूतियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।


By Shashi Sharma

Shashi Sharma Working in journalism since 1985 as the first woman journalist of Uttarakhand. From 1989 for 36 years, she provided her strong services for India's top news agency PTI. Working for a long period of thirty-six years for PTI, he got her pen ironed on many important occasions, in which, by staying in Tehri for two months, positive reporting on Tehri Dam, which was in crisis of controversies, paved the way for construction with the power of her pen. Delivered.

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