In The Cellular Jail, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को सेलुलर जेल में दी गईं यातनाएं अमानवीयता की पराकाष्ठा थीं- जितेन्द्र रघुवंशी

In The Cellular Jail,The torture inflicted on freedom fighters in the Cellular Jail was the height of inhumanity – Jitendra Raghuvanshi

संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के आमंत्रण पर श्री विजय पुरम अंडमान निकोबार में आयोजित पराक्रम दिवस में शामिल होकर वापस लौटे जितेन्द्र रघुवंशी

सरकार स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का जीवन परिचय विद्यालय के पाठ्यक्रम में शामिल करे- अरुण पाठक।

बिखरे हुए मोतीयों को एक माला में पिरोने का काम कर रहे हैं रघुवंशी- शशि शर्मा

जनपद के दिवंगत स्वतंत्रता सेनानी उतराधिकारीयों को, मौन रख दी गई श्रद्धांजलि

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा लाल किले की प्राचीर से की गई घोषणा *”स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के सपनों का भारत बनाएंगे* को 2047 तक यदि धरातल पर उतारना है तो विधायिका के समस्त जन प्रतिनिधियों, कार्यपालिका के समस्त अधिकारियों, न्यायपालिका के समस्त न्यायाधीशों तथा पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत सभी पत्रकारों को एक बार सेलुलर जेल देखने के लिए अवश्य भेजना चाहिए- रघुवंशी 

In The Cellular Jail, हरिद्वार 1 फरवरी। स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी परिवार समिति द्वारा संचालित *हर महीने प्रथम रविवार दस बजे दस मिनट स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों शहीदों के नाम* अभियान के अन्तर्गत देश के विभिन्न प्रान्तों में आज 38 वें रविवार में ध्वजारोहण, राष्ट्रगीत का गायन, स्मारकों, शहीद स्थलों, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, शहीदों की प्रतिमाओं पर पुष्पांजलि समर्पित करने के साथ ही आजादी के दीवानों की जीवन गाथाएँ सुनाई गईं।

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इसी क्रम में अमर शहीद जगदीश वत्स पार्क निकट जटवाड़ा पुल ज्वालापुर हरिद्वार में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भारत भूषण विद्यालंकार ने ध्वजारोहण किया, शहीद जगदीश वत्स की प्रतिमा पर विद्यालंकार के साथ जितेन्द्र रघुवंशी तथा पत्रकार शशि शर्मा द्वारा माल्यार्पण किया गया तथा सभी उपस्थित स्वतंत्रता सेनानी शहीद परिवारों, गणमान्य नागरिकों द्वारा पुष्पांजलियां समर्पित की गईं।
इस अवसर पर संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के आमंत्रण पर श्री विजय पुरम अंडमान निकोबार में आयोजित पराक्रम दिवस में शामिल होकर वापस लौटे स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों शहीदों के सम्मान, उनके सपनों का भारत बनाने तथा उत्तराधिकारियों के अस्तित्व की रक्षा के लिए संघर्षरत स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी परिवार समिति के राष्ट्रीय महासचिव जितेन्द्र रघुवंशी ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को कालापानी की सजा दिए जाने के वाद पोर्ट ब्लेयर (अब श्री विजय पुरम) अंडमान निकोबार की सेलुलर जेल में दी गई सजा के विभिन्न तरीकों का सजीव उल्लेख करते हुए बताया कि आज हम जिस खुली हवा में सांस ले रहे हैं, उसके लिए भारत माता को पराधीनता की बेड़ियों से मुक्त कराने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को जिस तरह की यातनाएं सेलुलर जेल में दी जाती थीं, उसे देखकर हृदय विदीर्ण हो जाता है, उन्होंने कहा कि वे भारत सरकार से अनुरोध करेंगे कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा लाल किले की प्राचीर से की गई घोषणा *”स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के सपनों का भारत बनाएंगे* को 2047 तक यदि धरातल पर उतारना है तो विधायिका के समस्त जन प्रतिनिधियों, कार्यपालिका के समस्त अधिकारियों, न्यायपालिका के समस्त न्यायाधीशों तथा पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत सभी पत्रकारों को एक बार सेलुलर जेल देखने के लिए अवश्य भेजना चाहिए, ताकि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, शहीदों के प्रति जो उपेक्षा प्रदर्शित की जा रही है, उनके अन्दर सम्मान का भाव पैदा किया जा सके जिन्होंने देश को आजाद कराया और अपने माता पिता की अनुपस्थिति में उनकी सन्तानों ने किस तरह की पीड़ा झेली होगी, इसकी अनुभूति करके स्वतंत्रता सेनानी शहीद परिवारों के प्रति अपना दृष्टिकोण बदल सकें। रघुवंशी ने बताया कि श्री विजय पुरम में जो देखा उससे हमारा संकल्प और भी अधिक दृढ़ हुआ है और अब तो झंझावातों को चीरते हुए भी जब तक स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों शहीदों को वह सम्मान नहीं मिल जाता जिसके वे सच्चे अर्थों में अधिकारी हैं और उनके उत्तराधिकारियों के अस्तित्व की रक्षा के लिए सरकारों द्वारा सार्थक कदम नहीं उठाया जाता है, हम निरन्तर संघर्ष करते रहेंगे।
महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी श्री नन्दलाल धींगरा की पुत्री पत्रकार शशि शर्मा ने स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी परिवार समिति द्वारा देशभर के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी शहीद परिवारों को एक सूत्र में पिरोने के अभियान की भूरि भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि मुझे एक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की पुत्री होने पर गौरव की अनुभूति हो रही है, हम आज जिस स्थिति में हैं वह बाबूजी के आशीर्वाद का ही प्रतिफल है, उन्होंने कहा बाऊ जी के स्वप्न को जितेन्द्र रघुवंशी जी जिस तरह जी जान से सींच रहे हैं वो काबिले तारीफ है बिखरे हुए मोतीयों को एक माला में पिरोने का काम कर रहे हैं रघुवंशी जी ,हमें संगठित होकर अपने पूर्वजों के सम्मान के लिए संघर्ष करना चाहिए।
चेतना पथ के सम्पादक और साहित्यकार अरुण पाठक ने स्वतंत्रता सेनानी शहीद परिवारों को सम्बोधित करते हुए कहा कि संगठन द्वारा देशभर में जो देशभक्ति की धारा प्रवाहित की जा रही है वह निश्चित रूप से सराहनीय है, किन्तु हमें सरकार से अनुरोध करना चाहिए कि प्रत्येक जिले में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, गुमनाम शहीदों के जीवन परिचय को प्रकाशित करे और माध्यमिक विद्यालय तक के पाठ्यक्रम में उसे शामिल करे ताकि देश की आजादी का इतिहास उन्हें देशभक्ति से सराबोर कर सके।
कार्यक्रम के समापन पर इस बीच स्वतंत्रता सेनानी परिवारों की दिवंगत हुई स्वतंत्रता संग्राम सेनानी श्री बलवंत सिंह के पुत्र सुभाष घई, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी श्री दिनेश शर्मा की पुत्री रश्मि शर्मा तथा स्वतंत्रता संग्राम सेनानी श्री रघुनाथ सैनी की पुत्रवधु लीलावती जी की महान आत्माओं की निर्विघ्न विकास यात्रा के लिए 2 मिनट मौन रखकर सामूहिक प्रार्थना की गई।
इस देशभक्ति से परिपूर्ण कार्यक्रम में सर्व श्री कैलाश वैष्णव, ललित कुमार चौहान, अनुराग सिंह गौतम, आदित्य गहलोत, शिवेंद्र गहलोत, परमेश चौधरी, सुभाष धींगरा, बालकिशन शर्मा, शीश राम सिंह, कमल छाबड़ा, सिद्धार्थ सिंह, जोगिंद्र तनेजा, डॉ. वेद प्रकाश आर्य, राहुल कौशिक, सुनील कुमार चौहान, नरेन्द्र कुमार वर्मा, अशोक कुमार दिवाकर, अशोक चौहान, कर्ण सिंह राण, श्रीमती मनीषा चौहान, मधुबाला सिंह तथा पद्मा देवी सहित स्थानीय गणमान्य नागरिकों की भी उपस्थिति रही।

By Shashi Sharma

Shashi Sharma – Senior Woman Journalist

Shashi Sharma has been active in journalism since 1985, holding the distinction of being Uttarakhand's first female journalist.

For 36 years, starting in 1989, she rendered distinguished service to India's premier news agency, PTI. During this long tenure, she demonstrated the power of her writing on numerous significant occasions; notably, she spent two months in Tehri reporting positively on the Tehri Dam—which was then mired in controversy—and used her pen to help pave the way for its construction.

Currently, Mrs. Shashi Sharma runs the news portal *Newsok24.com* and serves as the editor of the weekly newspaper *Desh Nirdesh*; she is also a registered anchor and commentator for Delhi Doordarshan.

शशि शर्मा वरिष्ठ महिला पत्रकार शशि शर्मा उत्तराखंड की पहली महिला पत्रकार के तौर पर 1985 से पत्रकारिता में कार्यरत हैं। 1989 से 36 वर्षों तक उन्होंने भारत की शीर्ष समाचार एजेंसी पीटीआई के लिए अपनी सशक्त सेवाएं दीं। छत्तीस वर्षों की लंबी अवधि तक पीटीआई के लिए काम करते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण मौकों पर अपनी कलम का लोहा मनवाया, जिसमें दो महीने तक टिहरी में रहकर विवादों के संकट में रहे टिहरी बांध पर सकारात्मक रिपोर्टिंग कर अपनी कलम की ताकत से निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया। वर्तमान में श्रीमती शशि शर्मा Newsok24 com न्यूज पोर्टल को चला रहीं हैं और साप्ताहिक समाचार पत्र देश निर्देश की सम्पादक होने के साथ ही दिल्ली दूरदर्शन की रजिस्टर्ड एंकर और कमेंटेटर भी हैं।

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