परमार्थ निकेतन में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा का विराम*

पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी का पावन सान्निध्य, आशीर्वाद व उद्बोधन*

भागवत कथा व्यास श्री मृदुल कृष्ण शास्त्री जी के मुखारबिंद से सात दिनों से प्रवाहित हो रही भागवत ज्ञान गंगा*

ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का आज भावपूर्ण, प्रेरक और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत वातावरण में विराम हुआ। यह दिव्य आयोजन पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के पावन सान्निध्य, आशीर्वाद एवं मार्गदर्शक उद्बोधन से और भी अधिक अनुप्राणित रहा। कथा व्यास श्री मृदुल कृष्ण शास्त्री जी के श्रीमुख से सात दिनों तक निरंतर प्रवाहित हुई यह भागवत ज्ञान गंगा कथा आयोजक माहेश्वरी परिवार व श्रोताओं के हृदय, चिंतन और जीवन को गहराई से स्पर्श किया।

पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि “हमारे शास्त्रों में हमारी संस्कृति समाहित है। भागवत कथा केवल ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है। यह हमें यह स्मरण कराती है कि हम कौन हैं, हमारा उद्देश्य क्या है और हमें किस दिशा में आगे बढ़ना है।” उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत भारतीय संस्कृति का दर्पण है, जिसमें भक्ति, ज्ञान, कर्म, करुणा और सेवा, सभी का अद्भुत समन्वय है।

आज के समय में, जब समाज तनाव, अवसाद, हिंसा, असहिष्णुता और मूल्यहीनता से जूझ रहा है, तब कथाओं की प्रासंगिकता और भी अधिक बढ़ जाती है। पूज्य स्वामी जी ने कहा कि “कथाएँ केवल अतीत की स्मृति नहीं, वर्तमान की आवश्यकता और भविष्य का मार्गदर्शन हैं। जब मन भटकता है, तब कथा दिशा देती है, जब जीवन सूना लगता है, तब कथा आशा जगाती है, और जब समाज टूटता है, तब कथा जोड़ने का कार्य करती है।”

श्रीमद् भागवत कथा हमें संदेश देती है कि भक्ति पलायन नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है, प्रेम दुर्बलता नहीं, बल्कि सबसे बड़ी शक्ति है और सेवा ही सच्ची साधना है। श्रीकृष्ण का जीवन स्वयं इस बात का प्रमाण है कि कैसे उन्होंने लोककल्याण, धर्मरक्षा और मानवता की स्थापना के लिए सक्रिय भूमिका निभायी।

पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि “कथा हमें संस्कार देती है, संस्कार से चरित्र बनता है और चरित्र से राष्ट्र का निर्माण होता है।” उन्होंने यह भी कहा कि आज आवश्यकता है कि हम कथाओं को केवल सुनें नहीं, बल्कि अपने जीवन में उतारें तभी कथाओं का वास्तविक उद्देश्य सिद्ध होगा। उन्होंने हरित कथाओं और पर्यावरण अनुकुल सिंगल यूज प्लास्टिक फ्री भंडारे आयोजित करने का संदेश दिया।

भागवत कथा व्यास श्री मृदुल कृष्ण शास्त्री जी ने अपनी सरल, सरस और हृदयस्पर्शी वाणी में श्रीकृष्ण की लीलाओं के माध्यम से जीवन के गूढ़ सत्य से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि भागवत कथा हमें ‘स्व’ से जोड़ती है, अपने अंतर्मन, आत्मा और चेतना से, ‘समाज’ से जोड़ती है, कर्तव्य, संवेदना और सेवा भाव के माध्यम से ‘समष्टि’ से जोड़ती है, संपूर्ण सृष्टि के साथ सामंजस्य और सह-अस्तित्व का बोध हमें कथाओं के प्रसंगों से प्राप्त होते हैं।

श्री भागवत कथा के समापन अवसर पर परमार्थ गंगा तट का पूरा वातावरण भक्ति, कृतज्ञता और करुणा से सराबोर रहा। श्रद्धालुओं की आँखों में भाव, हृदय में संतोष और जीवन में नई ऊर्जा का संचार स्पष्ट दिखाई दिया।

परमार्थ निकेतन में आयोजित यह श्रीमद् भागवत कथा यह संदेश देकर संपन्न हुई कि कथाएँ आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं, जितनी युगों पहले थीं, क्योंकि मानव का संघर्ष, प्रश्न और समाधान आज भी वही हैं। जब तक मानव है, तब तक कथा है और जब तक कथा है, तब तक जीवन में प्रकाश, जागृति और आशा बनी रहेगी।?

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कथा व्यास श्री मृदुल कृष्ण शास्त्री जी और कथा आयोजक माहेश्वरी परिवार को रूद्राक्ष का दिव्य पौधा भेंट कर अपने पर्वों, त्यौहारों, जन्मदिवस, विवाहदिवस व उत्सवों पर पौधा रोपण का सभी संकल्प कराया।


By Shashi Sharma

Shashi Sharma Working in journalism since 1985 as the first woman journalist of Uttarakhand. From 1989 for 36 years, she provided her strong services for India's top news agency PTI. Working for a long period of thirty-six years for PTI, he got her pen ironed on many important occasions, in which, by staying in Tehri for two months, positive reporting on Tehri Dam, which was in crisis of controversies, paved the way for construction with the power of her pen. Delivered.

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