*भारत मंडपम में वैश्विक श्रीराम कथा का आयोजन*

*इतिहास में पहली बार जैनाचार्य द्वारा श्रीराम कथा का आयोजन*

*मानस मर्मज्ञ, संत श्री मोरारी बापू जी के श्रीमुख से आचार्य लोकेश मुनि जी के आज श्रीराम कथा का शुभारम्भ*

*उपराष्ट्रपति भारत श्री सी पी राधाकृष्णन जी, भारत के 14 वें राष्ट्रपति श्रीरामनाथ कोविंद जी और विशिष्ट विभूतियों की गरिमामयी उपस्थिति*

*पूज्य महामण्डलेश्वर स्वामी गुरूशरणानन्द जी महाराज, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, पूज्य स्वामी ज्ञानानन्द जी महाराज और अनेक पूज्य संतों का पावन सान्निध्य*

*अहिंसा विश्व भारती एवं विश्व शान्ति केन्द्र के संस्थापक आचार्य लोकेश मुनि जी ने सभी पूज्य संतों व विभूतियों का किया अभिनन्दन*

*अहिंसा, करुणा और राष्ट्रचेतना का विराट संगम*

*नई पीढ़ी को सोच देने का कार्य करती है कथा*

*स्वामी चिदानन्द सरस्वती*

नई दिल्ली, 17 जनवरी। भारत मंडपम आज इतिहास का साक्षी बना, जब पहली बार एक जैनाचार्य के पावन संकल्प से वैश्विक श्रीराम कथा का भव्य आयोजन हुआ। यह श्रीराम कथा भारतीय आत्मा, सनातन मूल्यों और सार्वभौमिक मानवीय चेतना का उत्सव है। अहिंसा, करुणा, मर्यादा, त्याग और सत्य के प्रतीक भगवान श्रीराम की कथा आज एक ऐसे मंच से प्रवाहित हो रही है, जहाँ जैन, वैदिक और सनातन परंपराएँ एक-दूसरे में विलीन होकर विश्व शांति का संदेश दे रही है।

आज के इस ऐतिहासिक अवसर पर अहिंसा विश्व भारती एवं विश्व शान्ति केन्द्र के संस्थापक, जैनाचार्य आचार्य लोकेश मुनि जी के दिव्य मार्गदर्शन में श्रीराम कथा का शुभारम्भ हुआ। मानस मर्मज्ञ, संत शिरोमणि श्री मोरारी बापू जी के श्रीमुख से प्रवाहित श्रीराम कथा ने उपस्थित जनसमूह को भाव-विभोर कर दिया। उनके शब्द, चेतना के दीप हैं, जो हृदयों में रामत्व का प्रकाश जगाते है।

कार्यक्रम की गरिमा को ऊँचाई प्रदान की माननीय उपराष्ट्रपति भारत श्री सी. पी. राधाकृष्णन जी, भारत के 14वें राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद जी तथा अनेक विशिष्ट विभूतियों की गरिमामयी उपस्थिति ने, उनके उद्बोधनों में राष्ट्र के प्रति समर्पण, संविधानिक मूल्यों की मर्यादा और भारतीय संस्कृति की आत्मिक शक्ति स्पष्ट रूप से झलक रही थी।

कार्ष्णि पीठाधीश्वर, पूज्य महामण्डलेश्वर स्वामी गुरूशरणानन्द जी महाराज, परमार्थ निकेेतन के अध्यक्ष, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, गीता मनीषि, पूज्य स्वामी ज्ञानानन्द जी महाराज सहित अनेक पूज्य संतों के पावन सान्निध्य इस आयोजन को आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर कर दिया।

आचार्य लोकेश मुनि जी ने सभी पूज्य संतों, राष्ट्रनेताओं और विशिष्ट अतिथियों का आत्मीय अभिनन्दन करते हुए कहा कि “श्रीराम जी मानवता की सर्वाेच्च संभावना हैं। वे चेतना हैं, शक्ति हैं, करुण हैं, विजय हैं, विनम्रता हैं, धर्म है और सेवा भी है।” उन्होंने कहा कि जैन दर्शन की अहिंसा और श्रीराम जी के मर्यादा पुरुषोत्तम स्वरूप में कोई विरोध नहीं। पूज्य मोरारी बापू जी श्रीराम कथा मर्मज्ञ हैं, उनके श्री मुख से निकला एक एक शब्द शान्ति का शंखनाद है।

श्री मोरारी बापू जी ने अपनी ओजस्वी वाणी में कहा कि श्रीराम कथा सुनने का विषय नहीं, बल्कि जीने का संकल्प है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे श्रीराम को मंदिरों में ही नहीं, अपने चरित्र, व्यवहार और राष्ट्रसेवा में प्रतिष्ठित करें। उन्होंने कहा, “श्रभ्राम वह दीप हैं जो भीतर जले, तभी बाहर उजाला होगा।”

माननीय राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि श्रीराम भारतीय संविधान की आत्मा के भी प्रतीक हैं, मर्यादा, न्याय, करुणा और कर्तव्य के स्तंभ है।

उपराष्ट्रपति, भारत श्री सी. पी. राधाकृष्णन जी ने कहा कि भारत केवल भूगोल नहीं, विचार है। भारत केवल सीमाओं में बँधा राष्ट्र नहीं, बल्कि मूल्यों, संस्कृति और चेतना का अनन्त प्रवाह है।”

उन्होंने आगे कहा कि भारत की पहचान उसके पर्वतों, नदियों और नगरों से अधिक उसके संस्कारों, आदर्शों और आध्यात्मिक दृष्टि में निहित है। भारत वह भूमि है जहाँ विविधता विरोध नहीं, बल्कि सौंदर्य बन जाती है; जहाँ आस्था विज्ञान से टकराती नहीं, उसे दिशा देती है; और जहाँ धर्म पूजा तक सीमित नहीं, बल्कि मानवता की सेवा में प्रकट होता है।

पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि श्रीराम कथा आज पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता और वैश्विक शांति का दिव्य मंत्र है। भारत मंडपम में आयोजित इस कथा ने यह सिद्ध कर दिया कि भारत की शक्ति उसकी विविधता में है, और उसकी विविधता की आत्मा उसका सनातन भाव है। जब जैनाचार्य द्वारा श्रीराम कथा का आयोजन होता है, तब यह संदेश विश्व को जाता है कि भारत की आध्यात्मिक परंपराएँ प्रतिस्पर्धा नहीं, समन्वय का संदेश देती हैं। भारत सदैव से जोड़ने में विश्वास रखता है।

स्वामी जी ने कहा कि गूगल हमें पूरी दुनिया से जोेड़ता है परन्तु गुरू हमें स्वयं से जोड़ते हैं। बापू जैसे संत का होना ही यज्ञ है। जीवन में जब अपना कोई हेतु न हो तभी सेतु बनते हैं।

पूज्य स्वामी ज्ञानानन्द जी महाराज ने श्रीराम जी को आत्मानुशासन का सर्वाेच्च आदर्श बताते हुए कहा कि आज के युग में श्रीराम जी का यही संदेश है कि अधिकार से पहले कर्तव्य और भोग से पहले त्याग को चुनना ही सच्ची साधना है। उन्होंने कहा कि सनातन की सोच मानवता की सोच है, समन्वयवादी सोच है।

आज श्रीराम कथा के शुभारम्भ के प्रत्येक क्षण में यह अनुभूति हो रही थी कि यह एक चेतना क्रांति का प्रारम्भ है। भारत मंडपम की दीवारें भी मानो राम नाम से स्पंदित हो रही थीं।

यह वैश्विक श्रीराम कथा आयोजन भारत के लिए एक सांस्कृतिक मील का पत्थर है जो आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देगा कि हमारी परंपराएँ जीवित हैं, जागृत हैं और विश्व को दिशा देने में सक्षम हैं।

भारत मंडपम में आयोजित यह वैश्विक श्रीराम कथा भारत की आत्मा का उत्सव है जहाँ राम कथा ने राष्ट्र को जोड़ा, संतों ने दिशा दी, और भारत ने विश्व को संदेश दिया कि राम केवल हमारे आराध्य नहीं, हमारी पहचान हैं।


By Shashi Sharma

Shashi Sharma Working in journalism since 1985 as the first woman journalist of Uttarakhand. From 1989 for 36 years, she provided her strong services for India's top news agency PTI. Working for a long period of thirty-six years for PTI, he got her pen ironed on many important occasions, in which, by staying in Tehri for two months, positive reporting on Tehri Dam, which was in crisis of controversies, paved the way for construction with the power of her pen. Delivered.

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