ऑपरेशन सिंदूर की प्रथम वर्षगाँठ पर परमार्थ निकेतन में वीर जवानों को भावभीनी श्रद्धांजलि
परमार्थ निकेतन गंगा आरती ऑपरेशन सिंदूर को समर्पित
“ऑपरेशन सिंदूर केवल सैन्य अभियान नहीं, राष्ट्र की आत्मा, साहस और संकल्प का प्रतीक”
स्वामी चिदानन्द सरस्वती

ऋषिकेश, 7 मई। परमार्थ निकेतन में ऑपरेशन सिंदूर की प्रथम वर्षगाँठ के अवसर पर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने भारत माँ के वीर सपूतों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुये भारतीय सेना के अदम्य साहस, अद्वितीय पराक्रम, राष्ट्रभक्ति और बलिदान को नमन करते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर भारत की राष्ट्रीय चेतना, आत्मसम्मान और आतंकवाद के विरुद्ध अडिग संकल्प का ऐतिहासिक प्रतीक है।
पूज्य स्वामी जी ने कहा कि एक वर्ष पूर्व पहलगाम में हुआ आतंकी हमला केवल कुछ निर्दोष लोगों पर नहीं था, बल्कि भारत की शांति, हमारी संस्कृति, मानवता और राष्ट्रीय अस्मिता पर किया गया कायराना प्रहार था। आतंकवादियों ने यह समझने की भूल की कि भारत की सहनशीलता उसकी कमजोरी है, परंतु भारतीय सेना ने अपने साहस, अनुशासन और रणनीतिक क्षमता से यह स्पष्ट कर दिया कि नया भारत अन्याय और आतंक को सहन नहीं करता, बल्कि उसका दृढ़ और निर्णायक उत्तर देता है।
उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि सम्पूर्ण राष्ट्र की सामूहिक चेतना और राष्ट्रीय संकल्प की अभिव्यक्ति था। इस अभियान ने यह सिद्ध कर दिया कि भारत अपनी संप्रभुता, सीमाओं और नागरिकों की सुरक्षा के प्रति पूर्णतः सजग, सक्षम और प्रतिबद्ध है। भारत सदैव शांति और मानवता का समर्थक रहा है, परंतु जब भी राष्ट्र की सुरक्षा और सम्मान को चुनौती दी जाएगी, तब भारत पूरी शक्ति और दृढ़ता के साथ उत्तर देगा।
भारत के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के दूरदर्शी मार्गदर्शन, माननीय गृहमंत्री श्री अमित शाह जी के दृढ़ नेतृत्व एवं रक्षामंत्री श्री राजनाथ सिंह जी के कुशल संचालन में भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से अदम्य साहस, अप्रतिम शौर्य और राष्ट्रभक्ति का ऐसा स्वर्णिम इतिहास रचा, जिसने सम्पूर्ण राष्ट्र का मस्तक गर्व से ऊँचा कर दिया।
हमारे वीर जवानों ने मातृभूमि की रक्षा हेतु अपने प्राणों की परवाह किये बिना यह सिद्ध कर दिया कि भारत की संप्रभुता, अखंडता और नागरिकों की सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता संभव नहीं है।
पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि भारतीय सेना केवल देश की सीमाओं की रक्षा नहीं करती, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों के विश्वास, सम्मान और भविष्य की रक्षा भी करती है। देश के वीर जवान कठिन से कठिन परिस्थितियों में, चाहे वह बर्फीली चोटियाँ हों, तपते रेगिस्तान हों या दुर्गम सीमाएँ, हर समय राष्ट्रसेवा में समर्पित रहते हैं। उनका त्याग, तपस्या और बलिदान केवल इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का अमर प्रकाश है।
उन्होंने कहा कि “सिंदूर” भारतीय संस्कृति में केवल सुहाग का प्रतीक नहीं, बल्कि शक्ति, सम्मान, समर्पण और सनातन परंपरा की पहचान है। ऑपरेशन सिंदूर ने यह संदेश दिया कि भारत की सांस्कृतिक अस्मिता और राष्ट्रीय गौरव को कोई भी शक्ति कभी मिटा नहीं सकती। यह अभियान आतंकवाद के विरुद्ध भारत की दृढ़ इच्छाशक्ति और राष्ट्रीय एकता का जीवंत उदाहरण है।
पूज्य स्वामी जी ने कहा कि आज आवश्यकता केवल अपने सैनिकों का सम्मान करने की नहीं, बल्कि राष्ट्रहित और राष्ट्रप्रथम को सर्वोपरि रखने की भी है। प्रत्येक नागरिक को अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए देश की एकता, अखंडता और सामाजिक समरसता को मजबूत बनाने का संकल्प लेना चाहिए। उन्होंने युवाओं से विशेष आह्वान करते हुए कहा कि वे राष्ट्रप्रेम, अनुशासन, सेवा और संस्कारों को अपने जीवन का आधार बनाएं।
उन्होंने कहा कि आतंकवाद केवल किसी देश पर हमला नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानवता और शांति के विरुद्ध युद्ध है। इसलिए विश्व समुदाय को एकजुट होकर आतंकवाद के विरुद्ध कठोर और प्रभावी कदम उठाने होंगे। भारत ने सदैव “वसुधैव कुटुम्बकम्” का संदेश दिया है, परंतु साथ ही यह भी सिद्ध किया है कि शांति की रक्षा के लिए शक्ति और साहस दोनों आवश्यक हैं।
पूज्य स्वामी जी ने भारत माँ के वीर सपूतों को नमन करते हुए कहा कि राष्ट्र सदैव उनके बलिदान, समर्पण और शौर्य का ऋणी रहेगा।

By Shashi Sharma

Shashi Sharma – Senior Woman Journalist

Shashi Sharma has been active in journalism since 1985, holding the distinction of being Uttarakhand's first female journalist.

For 36 years, starting in 1989, she rendered distinguished service to India's premier news agency, PTI. During this long tenure, she demonstrated the power of her writing on numerous significant occasions; notably, she spent two months in Tehri reporting positively on the Tehri Dam—which was then mired in controversy—and used her pen to help pave the way for its construction.

Currently, Mrs. Shashi Sharma runs the news portal *Newsok24.com* and serves as the editor of the weekly newspaper *Desh Nirdesh*; she is also a registered anchor and commentator for Delhi Doordarshan.

शशि शर्मा वरिष्ठ महिला पत्रकार शशि शर्मा उत्तराखंड की पहली महिला पत्रकार के तौर पर 1985 से पत्रकारिता में कार्यरत हैं। 1989 से 36 वर्षों तक उन्होंने भारत की शीर्ष समाचार एजेंसी पीटीआई के लिए अपनी सशक्त सेवाएं दीं। छत्तीस वर्षों की लंबी अवधि तक पीटीआई के लिए काम करते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण मौकों पर अपनी कलम का लोहा मनवाया, जिसमें दो महीने तक टिहरी में रहकर विवादों के संकट में रहे टिहरी बांध पर सकारात्मक रिपोर्टिंग कर अपनी कलम की ताकत से निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया। वर्तमान में श्रीमती शशि शर्मा Newsok24 com न्यूज पोर्टल को चला रहीं हैं और साप्ताहिक समाचार पत्र देश निर्देश की सम्पादक होने के साथ ही दिल्ली दूरदर्शन की रजिस्टर्ड एंकर और कमेंटेटर भी हैं।

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