*भारत हो हिन्दू राष्ट्र घोषित : डॉ. उमाकान्तानन्द*
हरिद्वार।राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ शताब्दी वर्ष कार्यक्रम श्रंखला में हरिद्वार नगर की गुरुकुल बस्ती में विराट हिन्दू सम्मेलन आयोजित हुआ।
गुरुकुल बस्ती के सिंहद्वार स्थित शक्ति भवन में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि महामंडलेश्वर डॉ. स्वामी उमाकान्तानन्द गिरी ने कहा कि भारत को हिन्दू राष्ट्र घोषित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश शासन से जब राष्ट्र को आजादी मिली तब भारत दो टुकड़ों में बांट दिया गया। धर्म-सम्प्रदाय के नाम पर इस्लामिक राष्ट्र पाकिस्तान बना, लेकिन भारत को हिन्दू राष्ट्र घोषित नही किया गया, जबकि भारत इस्लाम को मानने वाले पाकिस्तान चले गए उन्होंने अपने लिए अलग राष्ट्र ले लिया लेकिन हिन्दू ठगे रह गए। पाकिस्तान में रहने वाले हिंदुओ को खदेड़ कर भगा दिया और भारत धर्मशाला बन गया। यहाँ पर जो आया वह बस गया। पूरे विश्व के हिंदुओं को चिंता करने वाला एक मात्र भारत ही है बावजूद इसके हम अपने ही देश में षड्यंत्रो का शिकार।हो रहे है। मुख्य वक्ता विहिप के प्रांत सन्गठन मंत्री अजय कुमार ने कहा कि उत्तराखंड देवभूमि है यहां से स्वर्ग का रास्ता है। हिमालयी राज्य देवताओं का घर है बावजूद इसके यहां पर षड्यंत्र के तहत डोमोग्राफी चेंज की ज रही है। देवभूमि को लैंड जिहाद कर कब्जाया जा रहा है, दूर दराज गांवों में मज्जिद-मदरसे बनाये जा रहे है। गांवों से उत्तराखंड का मूल निवासी पलायन कर रहा है, वही मुस्लिमों को देश भर से यहाँ लाकर बसा दिया जा रहा है। दुर्गा वाहिनी की प्रान्त सह संयोजिका प्रीति शुक्ला ने कहा कि मातृ शक्ति को जाग्रत होना पड़ेगा, बच्चों को संस्कारवान बनाये, हिन्दू सनातन धर्म के प्रति बचपन से ही शिक्षा देनी चाहिए। कार्यक्रम में संघ शताब्दी वर्ष में चल रहे पंच परिवर्तन संकल्प को प्रत्येक हिन्दू परिवार में ग्रहण करने का आह्वान किया गया। कार्यक्रम का सञ्चालन कार्यक्रम संयोजक विमल कुमार ने किया। इस अवसर पर सैकड़ो की संख्या ने हिन्दू मातृ शक्ति शामिल रही। 

*जब-जब कुरीतियां बढ़ीं, तब संतों ने आगे आकर नेतृत्व संभाला: ऋतुराज*
हरिद्वार।राष्ट्रीय स्वयं सेवा संघ की दयानंद बस्ती के रामनगर में आयोजित विशाल हिंदु सम्मेलन में आरएसएस धर्म जागरण के प्रांत कार्यकारिणी सदस्य ऋतुराज ने कहा कि देश पर जब-जब संकट आया, संतों और महापुरुषों ने जन्म लेकर समाज को नई दिशा दी।
उन्होंने कहा कि समाज में जब-जब कुरीतियां बढ़ीं, तब संतों ने आगे आकर नेतृत्व संभाला। इसी क्रम में दयानंद सरस्वती ने सनातन धर्म में व्याप्त कुरीतियों पर प्रहार करते हुए समाज सुधार का व्यापक अभियान चलाया और हिंदू समाज को नई दिशा दी। आगे जब देश में संस्कारों का क्षरण दिखाई दिया, तब एक सामान्य परिवार में जन्मे नरेंद्र ने संन्यास लेकर स्वामी विवेकानंद के रूप में विश्व मंच पर भारतीय संस्कृति का परचम लहराया और युवा शक्ति को आत्मगौरव का संदेश दिया। वक्त डॉ. आशिमा शर्मा ने कहा कि वक्ता ने कहा कि राष्ट्र निर्माण का मार्ग हमारी संस्कृति से होकर गुजरता है। हिंदू धर्म सम्मेलन केवल आयोजन नहीं, बल्कि अपनी जड़ों की ओर लौटने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि आज पश्चिमी प्रभाव के कारण हम अपनी ही परंपराओं को भूलते जा रहे हैं। राजनीतिक आजादी तो मिल गई, लेकिन विचारों की आजादी अभी अधूरी है। उन्होंने पांच परिवर्तन को भारत के पुनरुत्थान का संकल्प बताया। कहा कि सबसे बड़ा संकट बाहरी नहीं, बल्कि घर के भीतर है। तकनीक और सुविधाएं बढ़ीं, पर संस्कार कमजोर हुए। संयुक्त परिवार टूट रहे हैं, संवाद की जगह आभासी दुनिया ने ले ली है। वक्ता ने आह्वान किया कि हर घर को संस्कारों का गुरुकुल बनाया जाए और स्वतंत्रता की सही परिभाषा समझी जाए। वक्ता डॉ. दयाशंकर विद्यालंकार ने विचार रखे। संचालन अधिवक्ता राजकुमार और संजीव बाली ने संयुक्त रूप से किया।
इस अवसर पर गुलशन शर्मा, श्रीपाल, कार्यक्रम के मुख्य संयोजक शिवम ब्रह्म, राजेश पार्षद, सचिन पार्षद, संघ के नगर कार्यवाह अनुराग शर्मा, सहनगर कार्यवाह बलदेव रावत, मनोज पाल, प्रीतम, बस्ती प्रमुख सुनील, अमित शर्मा, मोनू त्यागी, कुलदीप, अनिल आदि मौजूद थे।