भगवान श्री जगन्नाथ मन्दिर, प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव, परमार्थ त्रिवेणी पुष्प, प्रयागराज*
पांच दिवसीय महोत्सव के आज तीसरे दिन प्रातः वेदमंत्रों के साथ निकाली कलश यात्रा*
*उड़िशा, बनारस, प्रयागराज, ऋषिकेश, मध्यप्रदेश से आये आचार्यों व पुरोहितों के मार्गदर्शन व नेतृत्व में वेदमंत्रों के साथ विधिविधान से पूजन*
*पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज का परमार्थ त्रिवेणी पुष्प, प्रयागराज में आगमन*
माननीय मुख्यमंत्री, ओडिशा, आदरणीय श्री मोहन चरण माझी जी की गरिमामयी उपस्थिति रहेगी
भगवान श्री जगन्नाथ मन्दिर, प्रयागराज परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज के पावन सान्निध्य एवं प्रेरणा से पूज्य संतों के दिव्य सान्निध्य एवं आभा बागरोडिया चैरिटेबल ट्रस्ट सौजन्य से आयोजित
प्रयागराज। भक्ति, श्रद्धा, सनातन संस्कृति और वैदिक परंपराओं के दिव्य संगम में आज भगवान जगन्नाथ मन्दिर के प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के अंतर्गत आयोजित पांच दिवसीय भव्य कार्यक्रम का तृतीय दिवस अत्यंत श्रद्धा, उत्साह और आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ संपन्न हुआ। परमार्थ त्रिवेणी पुष्प, प्रयागराज स्थित इस पावन परिसर में प्रातःकाल वेदमंत्रों की मंगलध्वनि, शंखनाद और भक्ति गीतों के साथ भव्य कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं, मातृशक्ति और ऋषिकुमारों ने सहभाग कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
कलश यात्रा में तेलंगानाा से आयी ऋषिकन्याओं ने पारंपरिक वेशभूषा में सिर पर कलश धारण कर वेदमंत्रों और ‘जय जगन्नाथ’ के उद्घोष के साथ संगम का जल भरकर परिक्रमा की।
इस पावन अवसर पर उड़ीसा से पधारे विद्वान आचार्यों एवं पुरोहितों के मार्गदर्शन में वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार विधिविधान से पूजन, यज्ञ, अनुष्ठान और अभिषेक संपन्न कराया गया। शास्त्रोक्त मंत्रोच्चार, हवन की पवित्र अग्नि और वैदिक स्वर लहरियों ने पूरे वातावरण को दिव्यता से आलोकित कर दिया। प्राण प्रतिष्ठा की प्रत्येक विधि अत्यंत शुद्धता और परंपरा के अनुरूप सम्पन्न की।
महोत्सव के तृतीय दिवस पर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज का परमार्थ त्रिवेणी पुष्प में आगमन हुआ। वेदमंत्र, शंखध्वनि और पुष्पवर्षा कर ऋषिकुमारों व ऋषिकन्याओं ने अभिनन्दन किया।
स्वामी जी ने कहा कि भगवान जगन्नाथ का यह दिव्य मन्दिर समरसता, करुणा और लोककल्याण की जीवंत प्रेरणा हैं। मंदिर, संस्कार, सेवा और समाज निर्माण का केंद्र बन कर उभरेगा। यहां से निकलने वाली आध्यात्मिक चेतना आने वाली पीढ़ियों को मार्गदर्शन प्रदान करेगी।
स्वामी जी ने संगम के तट से आह्वान किया कि आज आवश्यकता है कि हम अपनी संस्कृति, परंपरा और आध्यात्मिक मूल्यों को जीवन में उतारें तथा नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ें। जब श्रद्धा और सेवा का संगम होता है, तभी समाज में सकारात्मक परिवर्तन संभव होता है।
प्रयागराज में स्थित भगवान जगन्नाथ का यह भव्य मंदिर की स्थापना उत्तर और पूर्व भारत की सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बन कर उभरेगा और राष्ट्रीय एकात्मता को नई ऊर्जा प्रदान करेगा।
महोत्सव के दौरान सांस्कृतिक भजन संध्या, कीर्तन, प्रवचन और आध्यात्मिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जा रहा है। यह पांच दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव सनातन संस्कृति के पुनर्जागरण, राष्ट्रीय एकता और आध्यात्मिक जागरण का महापर्व बनकर उभरेगा।
नोट-इस पावन महोत्सव की गरिमा को और अधिक दिव्यता प्रदान करने हेतु मोहन चरण माझी, माननीय मुख्यमंत्री, ओडिशा दिनांक 25 फरवरी को परमार्थ त्रिवेणी पुष्प, प्रयागराज पधार रहे हैं।

माननीय मुख्यमंत्री जी दोपहर 02:00 बजे परिसर में आगमन करेंगे। तत्पश्चात 03:30 बजे से 07:00 बजे तक भगवान जगन्नाथ जी के पूजन-अर्चन एवं वैदिक अनुष्ठानों में सहभाग करेंगे तथा सायंकाल न्यू अरैल घाट, नैनी में पावन माँ गंगा की भव्य आरती में सम्मिलित होकर राष्ट्र एवं जनकल्याण की प्रार्थना करेंगे।

इस पवित्र और ऐतिहासिक अवसर पर प्रयागराज के समस्त मीडिया बंधुओं, श्रद्धालु नागरिकों एवं धर्मप्रेमी जनों को सादर आमंत्रण है कि वे सपरिवार उपस्थित होकर भगवान जगन्नाथ जी के पूजन एवं माँ गंगा की आरती में सहभाग करें तथा इस दिव्य आध्यात्मिक उत्सव के साक्षी बनें।


By Shashi Sharma

Shashi Sharma Working in journalism since 1985 as the first woman journalist of Uttarakhand. From 1989 for 36 years, she provided her strong services for India's top news agency PTI. Working for a long period of thirty-six years for PTI, he got her pen ironed on many important occasions, in which, by staying in Tehri for two months, positive reporting on Tehri Dam, which was in crisis of controversies, paved the way for construction with the power of her pen. Delivered.

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