*प्रकाश, प्रेम और प्रगति” का पर्व लोहड़ी की परमार्थ त्रिवेणी पुष्प से वैश्विक परिवार को अनेकानेक शुभकामनायें*

*लोहड़ी पर्व पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के पावन सान्निध्य में विश्व के अनेक देशों से आये श्रद्धालुओं ने किया विश्व शान्ति यज्ञ*

*माघ मेले की दिव्यता को आत्मसात करने हेतु परमार्थ त्रिवेणी पुष्प से आमंत्रण*

*विकास का अर्थ अपने मूल्यों से विमुख होना नहीं, बल्कि उन्हें और ऊँचाई देना*

*स्वामी चिदानन्द सरस्वती*

प्रयागराज, 13 जनवरी। माघ मेले के पावन अवसर पर, परमार्थ निकेतन की नई शाखा परमार्थ त्रिवेणी पुष्प प्रयागराज से “लोहड़ी” पर्व की वैश्विक परिवार के अनेकानेक शुभकामनायें। यह पर्व एक सांस्कृतिक उत्सव के साथ प्रकाश, प्रेम और प्रगति का दिव्य संगम है।

पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के नेतृत्व एवं साध्वी भगवती सरस्वती जी के मार्गदर्शन में परमार्थ निकेतन ने सदैव सेवा, साधना और समाज कल्याण को अपने जीवन का संकल्प बनाया है।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा जीवन केवल उत्सव का नाम नहीं, बल्कि उत्साह के साथ उद्देश्य का भी होना आवश्यक है। प्रकाश केवल दीपक में नहीं, विचारों में भी जलना चाहिए। परमार्थ निकेतन ने वर्षों से अपनी सेवाओं द्वारा विश्व में एक अलग पहचान बनाई है, जहाँ अध्यात्म जीवन का केंद्र है, वहीं सेवा उसका विस्तार है।

स्वामी जी के मार्गदर्शन में निकेतन ने समानता, सद्भावना और शाश्वत शान्ति के लिए अनेक अंतरराष्ट्रीय संवादों का संचालन किया है। वैश्विक स्तर पर इंटरफेथ संवाद, विश्व शान्ति डायलॉग और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में परमार्थ निकेतन की भूमिका अद्भुत है।

इसी प्रेरणा से प्रयागराज में स्थापित परमार्थ त्रिवेणी पुष्प आज सेवा, शिक्षा और सशक्तिकरण की नई त्रिवेणी के रूप में कार्य कर रहा है। माघ मेला के स्नान तट, गंगा आरती से लेकर विद्यालयों तक त्रिवेणी पुष्प की टीमें समाज के हर वर्ग तक सेवा का संदेश पहुँचा रही हैं चाहे वह पर्यावरण जागरूकता हो, जल संरक्षण अभियान, नारी सशक्तिकरण, स्वच्छता या छात्रों के लिए वैदिक-वैज्ञानिक कार्यशालाएँ प्रतिदिन परमार्थ त्रिवेणी पुष्प से संचालित हो रहे हैं।

स्वामी जी ने कहा “वर्तमान समय में ऐसे केन्द्रों की अति आवश्यकता है जहाँ वेद और विज्ञान, शिक्षा और संस्कार, स्पिरिचुअलिटी और ह्यूमेनिटी, सनातन और शान्ति, सब एक साथ विकसित हो सकें। जब तक हम केवल जानेंगे नहीं, तब तक जीवन में परिवर्तन नहीं ला पाएंगे।

परमार्थ त्रिवेणी पुष्प, प्रयागराज में स्वामी जी द्वारा चारों धामों के प्रतिरूप, अनेक मंदिरों एवं अमर जवान ज्योति, भारत माता मंदिर तथा चारों वेदों की स्थापना ने न केवल देवभक्ति बल्कि देशभक्ति का भी अमर संदेश दिया है। यह भारत की अस्मिता और आध्यात्मिकता का अपूर्व संगम है। यह स्थान केवल धर्म का केन्द्र नहीं, बल्कि राष्ट्र चेतना का तीर्थ बन चुका है।

यहां पर गुरूकुल की स्थापना के माध्यम से वैदिक शिक्षा का पुनर्जागरण हो रहा है। जो हमें संदेश देता है कि विकास का अर्थ अपने मूल्यों से विमुख होना नहीं, बल्कि उन्हें और ऊँचाई देना है।

आज के समय में जब दुनिया भौतिक प्रगति में तो आगे बढ़ रही है, पर मानसिक और आध्यात्मिक रूप से थकान महसूस कर रही है, ऐसे में परमार्थ की यह त्रिवेणी पुष्प एक ऊर्जा-केन्द्र, चिंतन-धारा और आत्मिक प्रेरणा बन कर उभर रहा है।

लोहड़ी का यह पर्व केवल आग जलाने का नहीं, बल्कि अज्ञान के अंधकार को जलाने का पर्व बने।


By Shashi Sharma

Shashi Sharma Working in journalism since 1985 as the first woman journalist of Uttarakhand. From 1989 for 36 years, she provided her strong services for India's top news agency PTI. Working for a long period of thirty-six years for PTI, he got her pen ironed on many important occasions, in which, by staying in Tehri for two months, positive reporting on Tehri Dam, which was in crisis of controversies, paved the way for construction with the power of her pen. Delivered.

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