*मातृशक्ति भारतीय संस्क्रति की आधारशिला : शैफाली पंड्या*

-पँचपरिवर्तन के माध्यम से समाज मे क्रांति ला सकती है नारी : डॉ. तृप्ता

हरिद्वार।राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सम्पर्क विभाग द्वारा होटल पार्क ग्रांट में मातृशक्ति गोष्ठी आयोजित की गई। गोष्ठी में महिला वक्ताओं ने मातृशक्ति की भूमिका और समाज में उनके योगदान पर चर्चा की।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि गायत्री परिवार की श्रीमती शैफाली पंड्या ने कहा कि भारतीय संस्क्रति की आधारशिला नारी है। भारत मे नारी को देवी स्वरूप माना जाता है। जब कोई कन्या विवाह के बाद आती है उसे लक्ष्मी मानते है। किसी भी पूजा आराधना में देवी ही सर्वोपरि है। दूसरी ओर कन्याओं की भुणहत्या हो रही है। उन्होंने कहा कि आज महिलाओं को और अधिक सशक्त होने की आवश्यकता है। देवी अनुसुईया की कहानी का स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय नारियों में इतनी संकल्प शक्ति होनी चाहिए कि वह अपने धर्म का पालन भी करे और समाज का सामना भी। नारियों को अपनी सीमाओं में रहकर अपने अधिकार,कर्तव्यों का निर्वहन करना चाहिए।

मुख्य वक्ता प्रौघोगिकी विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ.तृप्ता ठाकुर ने संघ शताब्दी वर्ष में पंच परिवर्तन संकल्प को दोहराते हुए कहा की भारतीय नारियों को पँचपरिवर्तन को अपने जीवन मे उतारते हुए कुटुंब प्रबोधन के माध्यम से परिवार के मूल्यों और संस्कारों का संरक्षण करना होगा। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार आज भारतीय परिवार टूट रहे है। जिन्हें बचाये रखना होगा। नागरिक कर्तव्य के जरिये नागरिकों की जिम्मेदारियों और कर्तव्यों का पालन करना चाहिए। स्वबोध के माध्यम से आत्म-जागरूकता और स्वदेशी मूल्यों को बढ़ावा देना,सामाजिक समरसता के माध्यम से सामाजिक एकता और जाति-विहीन समाज का निर्माण तथा पर्यावरण संरक्षण के जरिये पर्यावरण की रक्षा और संवर्धन करने का संकल्प लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि इन पहलुओं के माध्यम से, आरएसएस समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने और भारत को एक मजबूत और समृद्ध राष्ट्र बनाने का प्रयास कर रहा है।

डॉ.तृप्ता ने कहा कि मातृशक्ति हमारी संस्कृति की आधारशिला के साथ ही परिवार, समाज और राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। माताएँ अपने बच्चों को संस्कार, मूल्य और जीवन के आदर्श सिखाती हैं। वे समाज को एक मजबूत और स्वस्थ दिशा में ले जाने में मदद करती हैं। उन्होंने कहा कि मातृशक्ति का सम्मान और समर्थन करना चाहिए। हमें उन्हें समाज में सम्मानजनक स्थान देना चाहिए और उनके योगदान को पहचानना चाहिए।

समाजसेवी अर्चना जैन ने मातृशक्ति के महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डाला। गोष्ठी के प्रारम्भ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत सम्पर्क प्रमुख सीए अनिल वर्मा ने संघ की 100 वर्षो की यात्रा संघर्ष पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का सञ्चालन संचालन डॉ. कल्पना चौधरी ने किया।

इस मौके पर राष्ट्र सेविका समिति से वंदना जी,ममता जी,अंजली माहेश्वरी,डॉ.अश्वनी चौहान,डॉ. प्रितशिखा शर्मा,विजय लक्ष्मी,नीलिमा,पदमनी,डॉ. करुणा,डॉ.असीमा,सरला कुमारी,डॉ. मधु,सविता,नेहा मालिक,शिवानी गौड़, कमला जोशी,विजेता जी,विभाग सम्पर्क प्रमुख कुँवर रोहिताश,विशेष श्रेणी सम्पर्क प्रमुख संजय पंवार,जिला सम्पर्क प्रमुख अमित चौहान,नगर सम्पर्क प्रमुख सुशील सैनी आदि मुख्य थे।

By Shashi Sharma

Shashi Sharma Working in journalism since 1985 as the first woman journalist of Uttarakhand. From 1989 for 36 years, she provided her strong services for India's top news agency PTI. Working for a long period of thirty-six years for PTI, he got her pen ironed on many important occasions, in which, by staying in Tehri for two months, positive reporting on Tehri Dam, which was in crisis of controversies, paved the way for construction with the power of her pen. Delivered.

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