दीपावली पर नवनिर्मित घाटों तक पहुंची गंगा की धारा, कुंभ की तैयारियों को मिला नया विस्तार

कुंभ-2027 में श्रद्धालुओं को उपलब्ध होंगे करीब सोलह किलोमीटर लंबाई के पक्के घाट

पहले से उपलब्ध साढ़े बारह किलोमीटर घाटों के साथ इस बार जुड़ेंगे सवा तीन किलोमीटर के नए घाट

गंग नहर की क्लोजर अवधि में घाटों के जलमग्न हिस्सों के निर्माण और मरम्मत का काम युद्धस्तर पर संपन्न

आगामी 30 नवंबर तक फिनिशिंग और सौंदर्यीकरण का कार्य पूरा करने का लक्ष्य, स्नान व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन को मिलेगी मजबूती

हरिद्वार,  दीपावली के उल्लास के बीच हरिद्वार में गंगा की धारा ने नवनिर्मित घाटों का स्पर्श किया तो कुंभ-2027 की तैयारियों को एक नया और सुखद आयाम मिल गया। गंगा नहर की क्लोजर अवधि पूरी होने के बाद बीती रात से नहर में पानी छोड़ा जाना शुरू हो गया है। धीरे-धीरे बढ़ता जलस्तर अब उन घाटों तक पहुंच रहा है, जहां पिछले कई दिनों से दिन-रात निर्माण कार्य चल रहा था। गंगा की जलधारा के साथ इन घाटों का स्वरूप भी निखरने लगा है। आगामी कुंभ में श्रद्धालुओं को हरिद्वार में करीब 16 किलोमीटर लंबाई के पक्के और सुव्यवस्थित घाटों पर स्नान की सुविधा उपलब्ध होगी।

दिव्य एवं भव्य कुंभ-2027 के आयोजन के लिए राज्य सरकार की प्रतिबद्धता तथा मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के क्रम में हरिद्वार में बड़े पैमाने पर आधारभूत सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। इसी कड़ी में कुंभ नगरी में गंगा स्नान के लिए पक्के घाटों के विकास व विस्तार की महत्वपूर्ण व चुनौतीपूर्ण मुहिम भी अब साकार हो गई है।

हरिद्वार में गंगा तट पर पहले से लगभग साढ़े बारह किलोमीटर लंबाई के घाट उपलब्ध हैं। कुंभ-2027 की तैयारियों के तहत इस बार सिंचाई विभाग द्वारा गंगा नहर और एस्केप चैनल पर करीब सवा तीन किलोमीटर लंबाई के 10 नए घाटों का निर्माण कराया जा रहा है। इसके अतिरिक्त यूआईआईडीबी की ओर से यूपीडीसीसी के माध्यम से हरकी पैड़ी के निकट शोल क्षेत्र में धनुष पुल और सीसीआर के मध्य 82 मीटर लंबा एक अन्य घाट भी बनाया जा रहा है। इस तरह पुराने घाटों के साथ नए घाटों का विस्तार कुंभ के दौरान गंगा तट पर स्नान के लिए उपलब्ध स्थान को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाएगा।

क्लोजर के सीमित समय में पूरा हुआ चुनौतीपूर्ण काम

नए घाटों का निर्माण जितना महत्वपूर्ण था, उतना ही चुनौतीपूर्ण उनका जलमग्न रहने वाला हिस्सा तैयार करना भी था। गंगा नहर में पानी का प्रवाह बंद रहने की सीमित अवधि ही ऐसे निर्माण कार्यों के लिए उपलब्ध होती है। पानी रहने पर ये हिस्से जलमग्न रहते हैं, जिससे वहां निर्माण और मरम्मत संभव नहीं हो पाती। इसी समय का पूरा उपयोग करते हुए नए घाटों के डूब क्षेत्र में निर्माण कार्य पूरा किया गया। साथ ही पुराने घाटों के जलमग्न हिस्सों की मरम्मत भी की गई। मेलाधिकारी श्रीमती सोनिका के निर्देशन में निर्धारित समयसीमा को ध्यान में रखते हुए निर्माण कार्य दिन-रात जारी रहे, ताकि नहर में पानी छोड़े जाने से पहले जरूरी काम पूरे किए जा सकें।

इस दौरान अपर गंगा नहर पर पूर्व निर्मित 34 घाटों और एस्केप चैनल पर स्थित 22 पुराने घाटों के जलमग्न रहने वाले हिस्सों की मरम्मत भी सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई है। इससे नए घाटों के साथ पुराने घाटों को भी कुंभ के लिए बेहतर स्थिति में तैयार करने का रास्ता साफ हुआ है।

30 नवंबर तक पूरा होगा फिनिशिंग और सौंदर्यीकरण

जलमग्न हिस्सों का निर्माण पूरा होने के बाद अब नए घाटों पर फिनिशिंग, साज-सज्जा और सौंदर्यीकरण के कार्य किए जा रहे हैं। इन कार्यों को आगामी 30 नवंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। घाटों को ऐसा स्वरूप देने पर ध्यान दिया जा रहा है, जिससे श्रद्धालुओं को स्नान के दौरान सुविधा मिले और घाट सुरक्षित एवं व्यवस्थित बने रहें। गंगा की धारा पहुंचने के साथ अब इन स्थलों पर घाटों का अंतिम स्वरूप भी धीरे-धीरे सामने आने लगा है।

अधिक घाट, बेहतर स्नान व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन में सुविधा

कुंभ जैसे विशाल आयोजन में घाटों की उपलब्धता केवल स्नान के लिए स्थान बढ़ाने तक सीमित नहीं होती, बल्कि इसका सीधा संबंध श्रद्धालुओं की सुविधा और भीड़ प्रबंधन से भी है। प्रमुख स्नान पर्वों पर हरकी पैड़ी सहित पारंपरिक स्नान स्थलों पर श्रद्धालुओं का भारी दबाव रहता है। ऐसे में अतिरिक्त घाट उपलब्ध होने से स्नानार्थियों को गंगा तट पर अधिक विकल्प मिलेंगे। श्रद्धालुओं को अलग-अलग घाटों पर स्नान की सुविधा मिलने से प्रमुख स्थलों पर भीड़ का दबाव कम करने और स्नानार्थियों की आवाजाही को व्यवस्थित बनाने में मदद मिलेगी। इससे स्नान पर्वों के दौरान भीड़ प्रबंधन और व्यवस्थाओं के संचालन हेतु अधिक विकल्प उपलब्ध होंगे।

कुंभ-2027 के पावन पर्व के लिए कुंभ नगरी हरिद्वार को सजाया-संवारा जा रहा है। दीपावली पर नवनिर्मित घाटों तक पहुंचती गंगा की धारा इस बदलते स्वरूप की सुखद झलक प्रस्तुत कर रही है। करीब 16 किलोमीटर लंबाई के पक्के घाट आगामी कुंभ में श्रद्धालुओं की आस्था के साथ उनकी सुविधा, सुरक्षित स्नान और बेहतर व्यवस्थाओं का मजबूत आधार बनेंगे।


By Shashi Sharma

Shashi Sharma – Senior Woman Journalist Shashi Sharma has been active in journalism since 1985, holding the distinction of being Uttarakhand's first female journalist. For 36 years, starting in 1989, she rendered distinguished service to India's premier news agency, PTI. During this long tenure, she demonstrated the power of her writing on numerous significant occasions; notably, she spent two months in Tehri reporting positively on the Tehri Dam—which was then mired in controversy—and used her pen to help pave the way for its construction. Currently, Mrs. Shashi Sharma runs the news portal *Newsok24.com* and serves as the editor of the weekly newspaper *Desh Nirdesh*; she is also a registered anchor and commentator for Delhi Doordarshan. शशि शर्मा वरिष्ठ महिला पत्रकार शशि शर्मा उत्तराखंड की पहली महिला पत्रकार के तौर पर 1985 से पत्रकारिता में कार्यरत हैं। 1989 से 36 वर्षों तक उन्होंने भारत की शीर्ष समाचार एजेंसी पीटीआई के लिए अपनी सशक्त सेवाएं दीं। छत्तीस वर्षों की लंबी अवधि तक पीटीआई के लिए काम करते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण मौकों पर अपनी कलम का लोहा मनवाया, जिसमें दो महीने तक टिहरी में रहकर विवादों के संकट में रहे टिहरी बांध पर सकारात्मक रिपोर्टिंग कर अपनी कलम की ताकत से निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया। वर्तमान में श्रीमती शशि शर्मा Newsok24 com न्यूज पोर्टल को चला रहीं हैं और साप्ताहिक समाचार पत्र देश निर्देश की सम्पादक होने के साथ ही दिल्ली दूरदर्शन की रजिस्टर्ड एंकर और कमेंटेटर भी हैं।

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