मकर संक्रान्ति की अनेकानेक शुभकामनायें*

परमार्थ गंगा तट पर विश्व के अनेक देशों से आये श्रद्धालुओं, पर्यटकों, योग जिज्ञासुओं ने स्वामी चिदानन्द सरस्वती के पावन सान्निध्य में गंगा जी में डुबकी लगकर मनायी मकर संक्रान्ति*

गंगा स्नान कर गद्गद हुये विदेशी सैलानी*

मकर संक्रांति, बदलाव के स्वागत का पर्व*

मकर संक्रान्ति पर तिल गुड़ खाना केवल परंपरा नहीं, सामाजिक सौहार्द का आध्यात्मिक सूत्र*

सूर्य, भारतीय संस्कृति में केवल एक ग्रह नहीं जीवनदाता व ऊर्जा का स्रोत*

स्वामी चिदानन्द सरस्वती*

ऋषिकेश। मकर संक्रान्ति भारतीय संस्कृति का एक अत्यंत पावन पर्व है, जो सूर्य के मकर राशि में प्रवेश और उत्तरायण की शुभ शुरुआत का प्रतीक है। इस अवसर पर पवित्र नदियों में स्नान को विशेष महत्व है। आज परमार्थ निकेतन गंगा तट पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी, ऋषिकुमारोंऔर विश्व के अनेक देशों से आये श्रद्धालुओं ने वैदिक मंत्रोपचार के साथ गंगा जी में डुबकी लगायी।

शास्त्रों के अनुसार, मकर संक्रान्ति पर गंगा, यमुना, सरस्वती, गोदावरी, नर्मदा एवं अन्य पवित्र नदियों में स्नान करने से पापों का क्षय होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है। यह स्नान केवल शरीर की नहीं, बल्कि मन, विचार और संस्कारों की भी शुद्धि का माध्यम भी है। उत्तरायण काल को देवताओं का मार्ग कहा गया है, इसलिए इस समय किया गया स्नान, दान और जप विशेष फलदायी होता है।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि मकर संक्रान्ति का स्नान जीवन में नए संकल्प और नई ऊर्जा का आह्वान करता है। मकर संक्रान्ति के समय सूर्य की स्थिति और पृथ्वी के झुकाव में परिवर्तन से वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। ठंडे जल में स्नान करने से रक्तसंचार बेहतर होता है, प्रतिरक्षा प्रणाली सुदृढ़ होती है और शरीर में नवस्फूर्ति का संचार होता है। यही कारण है कि प्राचीन ऋषियों ने इस दिन स्नान को स्वास्थ्य और संतुलन से जोड़ा है।

यह पर्व जीवन में परिवर्तन को पवित्रता और सकारात्मकता के साथ स्वीकार करने का संदेश देता है। सूर्य जब अपनी दिशा बदलता है, तो ऐसे समय हमें भी अपने जीवन की दिशा को प्रकाश, सेवा और सद्भाव की ओर मोड़ने का संकल्प लेना चाहिए।

स्वामी जी ने कहा कि जीवन में जब दिशा बदलती है, तो उसे भय नहीं, बल्कि विश्वास, आनंद और कृतज्ञता के साथ स्वीकार करना चाहिए। जिस प्रकार सूर्य मकर राशि में प्रवेश कर उत्तरायण की ओर अग्रसर होता है, उसी प्रकार हम भी जीवन भी अंधकार से प्रकाश, जड़ता से जागृति और निराशा से नव आशा की ओर बढ़ने का संकल्प लें।

सूर्य भारतीय संस्कृति में केवल एक ग्रह नहीं, बल्कि जीवनदाता व ऊर्जा का स्रोत का प्रतीक है। मकर संक्रांति पर सूर्य का उत्तरायण होना इस बात का संकेत है कि अब प्रकाश की अवधि बढ़ेगी, उष्मा बढ़ेगी और प्रकृति नवजीवन की ओर बढ़ेगी।

मकर संक्रांति का संदेश है बदलाव का स्वागत। जब ऋतुएँ बदलती हैं, तो हम उन्हें रोकते नहीं, बल्कि उनके साथ स्वयं को ढालते हैं। यही दर्शन जीवन में भी लागू होता है। परिवर्तन अनिवार्य है, लेकिन उसका अनुभव हमारे दृष्टिकोण पर निर्भर करता है। यदि हम उसे संघर्ष मानें, तो वह बोझ बन जाता है; यदि हम उसे उत्सव मानें, तो वही परिवर्तन हमें विकास की ओर ले जाता है।

इस पर्व से जुड़े तिल और गुड़ भी गहरे प्रतीक हैं। तिल कठोरता का, और गुड़ मिठास का प्रतीक है। संदेश स्पष्ट है जीवन में चाहे कितनी ही कठोर परिस्थितियाँ क्यों न हों, वाणी और व्यवहार में मिठास बनी रहनी चाहिए। तिल गुड़ खाना परंपरा नहीं, बल्कि सामाजिक सौहार्द का आध्यात्मिक सूत्र है।

खिचड़ी, जो विभिन्न अन्न और दालों के संगम से बनती है, हमें एकता का पाठ पढ़ाती है। अलग-अलग तत्व मिलकर जब एक रूप में पकते हैं, तभी वह पूर्ण और पोषक बनती है। यह हमें समाज, परिवार और राष्ट्र के प्रति भी यही संदेश देती है विविधता में एकता ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है।

इस अवसर पर पतंग उड़ाना भी केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि वह हमें संदेश देता है कि ऊँचाई पर पहुँचने के लिए संतुलन, धैर्य और सही दिशा आवश्यक है। यदि डोर ढीली हो, तो पतंग गिर जाती है; यदि अत्यधिक खिंचाव हो, तो टूट जाती है। जीवन भी इसी संतुलन का नाम है।

आज के आधुनिक युग में, जब तकनीक, संबंध, जीवनशैली में परिवर्तन तीव्र गति से हो रहा है तब मकर संक्रांति हमें परिवर्तन से डरने के बजाय उसे चेतना के साथ अपनाने और परिवर्तन ही प्रगति का द्वार है का संदेश देती है। जीवन रुकने व थकने का नहीं बल्कि सूर्य की तरह आगे बढ़ते रहने व प्रकाश देने का संदेश देती है।


By Shashi Sharma

Shashi Sharma Working in journalism since 1985 as the first woman journalist of Uttarakhand. From 1989 for 36 years, she provided her strong services for India's top news agency PTI. Working for a long period of thirty-six years for PTI, he got her pen ironed on many important occasions, in which, by staying in Tehri for two months, positive reporting on Tehri Dam, which was in crisis of controversies, paved the way for construction with the power of her pen. Delivered.

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