श्रीमद् जगद्गुरू रामानन्दाचार्य जी के 726 वां प्राकट्य महोत्सव का आयोजन*
श्री जगद्गुरू महामण्डलेश्वर संतोषदास जी (सतुआ बाबा) के शिविर में मनाया श्री जगद्गुरू रामानन्दाचार्य भगवान के 726वां जन्मोत्सव समारोह*
उत्तरप्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी, परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी एवं अनेक पूज्य संतों का पावन सान्निध्य, आशीर्वाद व उद्बोधन*
प्रयागराज संगम तट पर दिव्य व भव्य माघ मेला*
विश्व हिन्दी दिवस की शुभकामनायें*
प्रयागराज, उत्तर प्रदेश, 10 जनवरी। सनातन संस्कृति, भक्ति परम्परा और राष्ट्रीय चेतना के अद्वितीय संगम के रूप में प्रयागराज संगम तट पर श्रीमद् जगद्गुरू रामानन्दाचार्य जी के 726वें प्राकट्य महोत्सव का आयोजन अत्यंत दिव्य, भव्य एवं गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया। यह ऐतिहासिक आयोजन श्री जगद्गुरू महामण्डलेश्वर संतोषदास जी महाराज (सतुआ बाबा) के पावन शिविर में सम्पन्न हुआ, जहाँ श्रद्धा, साधना, सेवा और समर्पण की त्रिवेणी प्रवाहित होती रही।
इस पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी, परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी तथा देश-विदेश से पधारे अनेक पूज्य संत-महात्माओं की गरिमामयी उपस्थिति ने समारोह को आध्यात्मिक ऊँचाइयों तक पहुँचाया। संगम तट पर आयोजित माघ मेले की दिव्यता और संत-सान्निध्य ने सम्पूर्ण वातावरण को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम का शुभारम्भ वैदिक मंत्रोच्चार, दीप प्रज्वलन एवं संगम तट की पवित्र धरा पर पुष्पांजलि अर्पण के साथ हुआ। इसके उपरान्त संतों के मंगल उद्बोधनों ने उपस्थित श्रद्धालुओं को श्री रामानन्दाचार्य जी के जीवन, दर्शन और भक्ति परम्परा की अमूल्य विरासत से परिचित कराया।
माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी ने अपने प्रेरक संबोधन में कहा कि श्रीमद् जगद्गुरू रामानन्दाचार्य जी ने भक्ति को जन-जन तक पहुँचाकर सामाजिक समरसता, आध्यात्मिक चेतना और राष्ट्रबोध की अलख जगाई। उन्होंने भक्तों को मार्गदर्शन देकर भक्ति आन्दोलन को जनआन्दोलन का स्वरूप प्रदान किया। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आज का भारत, अपने सांस्कृतिक पुनर्जागरण के पथ पर अग्रसर है और इस यात्रा में संत परम्परा की भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने अपने ओजस्वी एवं करुणामयी उद्बोधन में कहा कि श्री रामानन्दाचार्य जी केवल एक सामाजिक क्रांति के अग्रदूत थे। उन्होंने जाति, वर्ग और भेदभाव से ऊपर उठकर भक्ति, प्रेम और मानवता का संदेश दिया। स्वामी जी ने कहा कि आज आवश्यकता है कि हम श्री रामानन्दाचार्य जी की शिक्षाओं को अपने जीवन में उतारें और सेवा, सद्भाव तथा समर्पण को अपना मूल मंत्र बनाएं।
“जात-पात पूछे नहीं कोई, हरि का भजे सो हरि का होई” यह पंक्ति केवल एक दोहा नहीं, बल्कि भारतीय चेतना का उद्घोष है, सनातन एकता का शंखनाद है। जो हमें स्मरण कराता है कि कोई ऊँचा नहीं कोई नीचा नहीं, सब समान है इसलिये सब का सम्मान हो। हमें इन ऊँचा-नीचा दीवारों को तोड़ना होगा, दरारों को भरना होगा और दिलों को जोड़ना होगा। दिलों को जोड़ने के ये मंत्र हमें श्री रामानुजाचार्य जी ने बताये। प्रभु को पाने के लिये कुल नहीं करूणा चाहिये, वंश नहीं विश्वास चाहिये।
स्वामी जी ने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री जी ने उत्तर प्रदेश को विकास की नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया है। अब उत्तरप्रदेश उपद्रव प्रदेश नहीं उत्सव प्रदेश बन चुका है। आज उत्तर प्रदेश दंगा-मुक्त, माफिया-मुक्त और अपराध-मुक्त प्रदेश बन चुका है। कभी बीमारू कहे जाने वाला राज्य अब रेवेन्यू प्लस राज्य की ओर तेज़ी से अग्रसर है। अब ये नये भारत का नया उत्तरप्रदेश है, ये उत्तरप्रदेश है, उत्सव प्रदेश है, उत्तमप्रदेश है जो अपनी संस्कृति व संस्कारों को जीवंत बनाने, विकास व विरासत को साथ लेकर चलने वाला प्रदेश है। उत्तरप्रदेश ने दिशा भी दी व दशा भी बदली, भय को भगाया और भाव को जगाया। आज उत्तरप्रदेश विकास व विश्वास की अद्भुत मिसाल बन चुका है।
श्री जगद्गुरू महामण्डलेश्वर संतोषदास जी महाराज (सतुआ बाबा) ने अपने भावपूर्ण उद्बोधन में कहा कि यह महोत्सव केवल उत्सव नहीं, बल्कि आत्मचिन्तन, आत्मशुद्धि और आत्मजागरण का पर्व है। उन्होंने कहा कि श्री रामानन्दाचार्य जी की परम्परा आज भी हमें यह संदेश देते है कि भक्ति में ही शक्ति है और सेवा में ही सच्ची साधना है।
संगम तट पर उपस्थित हजारों श्रद्धालु इस दिव्य आयोजन के साक्षी बनकर स्वयं को सौभाग्यशाली अनुभव कर रहे थे। चारों ओर “जय श्री रामानन्दाचार्य”, “हर हर गंगे” और “भारत माता की जय” के गगनभेदी उद्घोष गूँजते रहे।
माघ मेले की पावन भूमि पर आयोजित यह आयोजन न केवल धार्मिक, बल्कि सांस्कृतिक और राष्ट्रीय चेतना का भी प्रतीक है। यह महोत्सव सनातन परम्परा की अखण्डता, संत संस्कृति की गरिमा और भारतीय संस्कृति की दिव्यता का जीवंत उदाहरण है।
समारोह के अंत में संगम आरती, राष्ट्रगान एवं विश्व शांति प्रार्थना के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
श्रीमद् जगद्गुरू रामानन्दाचार्य जी का 726वाँ प्राकट्य महोत्सव प्रयागराज संगम तट पर एक ऐसे ऐतिहासिक अध्याय के रूप में अंकित है, जिसने न केवल श्रद्धालुओं के हृदयों को आलोकित किया, बल्कि सम्पूर्ण राष्ट्र को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से पुनः जोड़ने का प्रेरणास्रोत भी प्रदान किया।
आज विश्व हिन्दी दिवस के अवसर पर स्वामी जी ने कहा कि हिन्दी, शब्दों से संस्कार तक की यात्रा है। हिन्दी केवल भाषा नहीं, भाव है, जो हृदय से हृदय को जोड़ती है। यह हमारी संस्कृति, संस्कार और संवेदना की जीवंत अभिव्यक्ति है। हिन्दी में हमारी आत्मा बसती है, हमारी पहचान झलकती है।


By Shashi Sharma

Shashi Sharma – Senior Woman Journalist

Shashi Sharma has been active in journalism since 1985, holding the distinction of being Uttarakhand's first female journalist.

For 36 years, starting in 1989, she rendered distinguished service to India's premier news agency, PTI. During this long tenure, she demonstrated the power of her writing on numerous significant occasions; notably, she spent two months in Tehri reporting positively on the Tehri Dam—which was then mired in controversy—and used her pen to help pave the way for its construction.

Currently, Mrs. Shashi Sharma runs the news portal *Newsok24.com* and serves as the editor of the weekly newspaper *Desh Nirdesh*; she is also a registered anchor and commentator for Delhi Doordarshan.

शशि शर्मा वरिष्ठ महिला पत्रकार शशि शर्मा उत्तराखंड की पहली महिला पत्रकार के तौर पर 1985 से पत्रकारिता में कार्यरत हैं। 1989 से 36 वर्षों तक उन्होंने भारत की शीर्ष समाचार एजेंसी पीटीआई के लिए अपनी सशक्त सेवाएं दीं। छत्तीस वर्षों की लंबी अवधि तक पीटीआई के लिए काम करते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण मौकों पर अपनी कलम का लोहा मनवाया, जिसमें दो महीने तक टिहरी में रहकर विवादों के संकट में रहे टिहरी बांध पर सकारात्मक रिपोर्टिंग कर अपनी कलम की ताकत से निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया। वर्तमान में श्रीमती शशि शर्मा Newsok24 com न्यूज पोर्टल को चला रहीं हैं और साप्ताहिक समाचार पत्र देश निर्देश की सम्पादक होने के साथ ही दिल्ली दूरदर्शन की रजिस्टर्ड एंकर और कमेंटेटर भी हैं।

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