गुरुकुल कांगड़ी के पेंशनर्स भुखमरी के कगार पर- भारत भूषण विद्यालंकार

 

यूजीसी से आने वाले अनुदान को शिक्षा मंत्रालय ही रोके हुए था- वित्ताधिकारी

शिक्षा मंत्रालय ने कई वर्षों से यूजीसी से आने वाला अनुदान रोका हुआ है जिससे गुरुकुल कांगड़ी के कई पेंशनर्स भुखमरी के कगार तक पहुंच गये हैं।
इतना ही नहीं पेंशनर्स को मिलने वाली चिकित्सा सुविधा भी नहीं मिल रही है जिससे गुरुकुल के पेंशनर्स की हालत काफी खस्ता हो चली है।

अपनी इन गम्भीर समस्याओं को लेकर गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के पेंशनर्स की एक आम सभा आयोजित की गई।

पिछले कई वर्षों से विश्वविद्यालय के पेंशनर्स को पेंशन समय पर न मिलने के कारण सभी पेंशनर्स परेशान हैं, और कुछ लोग तो दो जून की रोटी के लिए भी मोहताज हो गये हैं। आम सभा को संबोधित करते हुए एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ भारत भूषण विद्यालंकार ने यह बात कही।

आम सभा में समस्या के समाधान के रास्ते पर चलने हेतु कुलपति प्रो सोमदेव शतांशु तथा वित्ताधिकारी प्रोफेसर देवेंद्र गुप्ता को बुलाया गया था। सभा को संबोधित करते हुए कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन सभी पेंशनर्स की समास्याओं के समाधान हेतु तत्पर है।

वित्ताधिकारी ने सूचना दी कि यूजीसी से आने वाले अनुदान को शिक्षा मंत्रालय ही रोके हुए था, परंतु अब संभवतः कुछ अनुदान शीघ्र ही प्राप्त हो जाएगा। लेकिन पूर्ण समाधान के लिए प्रयास निरंतर जारी रहेंगे।

एसोसिएशन के सचिव गिरीश सुन्दरियाल ने कुलपति से कहा कि हमें मिलने वाली मेडिकल सुविधा को भी तुरंत लागू किया जाए। पेंशनर्स ने एकमत से यह निर्णय किया कि सभी समस्याओं का समाधान नहीं किया जाता तो धरना प्रदर्शन से भी गुरेज नहीं करना चाहिए। सभा कोप्रोफेसर बीडी जोशी,ए के चोपड़ा,गिरीश सुन्दरियाल, भारत भूषण विद्यालंकार,वीर सिंह, महावीर यादव, मुकेश रंजन वर्मा, त्रिलोक चंद, महेंद्र सिंह नेगी, यशपाल सिंह राणा, हेमंत आत्रेय, जगदीश विद्यालंकार, द्विजेंद्र पंत, एसके श्रीवास्तव,जीपी गुप्ता, डॉ प्रदीप कुमार जोशी आदि ने भी संबोधित किया।

By Shashi Sharma

Working in journalism since 1985 as the first woman journalist of Uttarakhand. From 1989 for 36 years, he provided his strong services for India's top news agency PTI. Working for a long period of thirty-six years for PTI, he got his pen ironed on many important occasions, in which, by staying in Tehri for two months, positive reporting on Tehri Dam, which was in crisis of controversies, paved the way for construction with the power of his pen. Delivered.

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