*माघ मेले का शास्त्रोक्त, आध्यात्मिक महत्व*

*💫पूज्य स्वामी जी व ऋषिकुमारों के साथ माघ मेला में स्नान, ध्यान, पूजा-अर्चना*

*🌟परमार्थ त्रिवेणी पुष्प, प्रयागराज, अध्यात्म व संस्कृति का अद्भुत संगम*

*✨पूज्य स्वामी जी परमार्थ त्रिवेणी पुष्प व अरैल, संगम घाटों का किया निरिक्षण*

*💫अपर नगर आयुक्त प्रयागराज श्री दीपेंद्र यादव जी, नगरनिगम के अधिकारियों ने पूज्य स्वामी जी से की भेंटवार्ता-घाटों को और सुन्दर बनाने तथा काशीविश्वनाथ और अयोध्या की तरह प्रयागराज में श्रद्धालुओं को आकर्षित करने हेतु हुई चर्चा*

ऋषिकेश। प्रयागराज की पावन धरती पर स्थित परमार्थ त्रिवेणी पुष्प, जहाँ गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का संगम है। माघ मेला, भारत की शाश्वत आध्यात्मिक परंपरा, ऋषि-संस्कृति और लोक-आस्था का जीवंत प्रतीक है। शास्त्रों में माघ मास को “सर्वश्रेष्ठ मास” कहा गया है, जिसमें संगम स्नान को मोक्षदायी और पुण्यवर्धक माना गया है।

स्कंद पुराण, पद्म पुराण एवं मत्स्य पुराण में माघ स्नान की महिमा विस्तार से वर्णित है। शास्त्रों के अनुसार, माघ मास में संगम पर स्नान करने से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट होते हैं, मन शुद्ध होता है और दिव्य चेतना का संचार होता है। यह स्नान केवल शरीर की स्वच्छता नहीं, बल्कि विचारों, संस्कारों और कर्मों की शुद्धि का प्रतीक है। माघ मेला हमें स्मरण कराता है कि भारतीय संस्कृति में तीर्थ केवल स्थल नहीं, बल्कि चेतना की यात्रा है।

परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज के मार्गदर्शन में, ऋषिकुमारों, साधकों, संन्यासियों और श्रद्धालुओं ने संगम तट पर सामूहिक रूप से स्नान, ध्यान और पूजा-अर्चना का पुण्य लाभ प्राप्त किया। इस अवसर पर पूज्य स्वामी जी ने कहा,“माघ मेला हमें आत्ममंथन का अवसर देता है। संगम में डुबकी लगाना तभी सार्थक है, जब हम अपने अहंकार, क्रोध, लोभ और आसक्ति को भी त्यागने का संकल्प लें।”

पूज्य स्वामी जी के साथ ऋषिकुमारों ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ अरैल घाट संगम तट पर गंगा जी की आरती कर आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित कर दिया। माघ मेला हमें स्मरण कराता है कि जीवन की वास्तविक शुद्धि भीतर से आरंभ होती है।

ऋषिकुमारों ने गीता, उपनिषद और वेदों के मंत्रों का पाठ करते हुए युवाओं को यह संदेश दिया कि आधुनिक जीवन की दौड़ में भी अपनी आध्यात्मिक जड़ों से जुड़ना अत्यंत आवश्यक है। माघ मेला नई पीढ़ी को संस्कृति, संयम और सेवा के मूल्यों से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है।

पूज्य स्वामी जी ने कहा, “त्रिवेणी संगम हमें संदेश देता है कि जैसे तीन नदियाँ एक होकर बहती हैं, वैसे ही विचार, कर्म और भावना जब एक हो जाते हैं, तब मानव जीवन दिव्यता को प्राप्त करता है।”

माघ मेला केवल साधुओं और संतों का ही नहीं, बल्कि जन-जन का पर्व है। यहाँ सभी एक ही भाव से संगम में उतरते हैं। यह समरसता ही भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी शक्ति है। माघ मेला हमें यह स्मरण कराता है कि भारत केवल भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि एक जीवंत आध्यात्मिक चेतना है।

अयोध्या व बनारस के मध्य स्थित प्रयागराज सनातन संस्कृति का एक अद्वितीय एवं दिव्य तीर्थ स्थल है, जहाँ गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का पावन संगम भारतीय आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक है। माघ मेला के पावन अवसर पर परमार्थ त्रिवेणी पुष्प में श्रद्धालुओं व तीर्थ यात्रियों को आकर्षित करने हेतु विविध आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं सेवा-आधारित कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।

यहाँ प्रतिदिन योग, ध्यान, सत्संग, भजन-संकीर्तन, गंगा आरती, वैदिक मंत्रोच्चारण, कथा-वाचन, संगम आरती तथा पर्यावरण जागरूकता से जुड़े विशेष सत्र आयोजित हो रहे हैं, जिनमें देश-विदेश से आए हजारों श्रद्धालु भाग लेकर आध्यात्मिक शांति व ऊर्जा का अनुभव कर रहे हैं।

परमार्थ त्रिवेणी पुष्प, साधना, सेवा और संस्कृति का जीवंत केंद्र बन गया है, जहाँ श्रद्धालु बाह्य यात्रा के साथ-साथ अंतर्यात्रा का भी अनुभव कर रहे हैं। प्रयागराज वास्तव में अध्यात्म, आस्था और भारतीय संस्कृति का दिव्य संगम है।

माघ मेला वास्तव में भारत की आत्मा का उत्सव है, जहाँ हर डुबकी, हर मंत्र और हर प्रार्थना हमें अपने वास्तविक स्वरूप की ओर ले जाती है।


By Shashi Sharma

Shashi Sharma Working in journalism since 1985 as the first woman journalist of Uttarakhand. From 1989 for 36 years, she provided her strong services for India's top news agency PTI. Working for a long period of thirty-six years for PTI, he got her pen ironed on many important occasions, in which, by staying in Tehri for two months, positive reporting on Tehri Dam, which was in crisis of controversies, paved the way for construction with the power of her pen. Delivered.

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