*राज्य स्तरीय हितधारक परामर्श : “किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 : क्रियान्वयन के एक दशक की समीक्षा एवं भावी दिशा”*

*हरिद्वार ।  माननीय मुख्य न्यायाधीश श्री मनोज कुमार गुप्ता के मार्गदर्शन में किशोर न्याय समिति, उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय द्वारा महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग, उत्तराखण्ड सरकार के सहयोग से आज हयात प्लेस, बहादराबाद, हरिद्वार में राज्य स्तरीय हितधारक परामर्श का सफल आयोजन किया गया।

कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में माननीय मुख्य न्यायाधीश श्री मनोज कुमार गुप्ता के साथ माननीय न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी, माननीय न्यायमूर्ति रवीन्द्र मैठाणी, माननीय न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल (अध्यक्ष, किशोर न्याय समिति), माननीय न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित, माननीय न्यायमूर्ति आलोक महरा, माननीय न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय तथा माननीय न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का शुभारम्भ माननीय मुख्य न्यायाधीश एवं सभी माननीय न्यायाधीशों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। दीप प्रज्ज्वलन के अवसर पर मातृ आँचल कन्या विद्यालय, राजागार्डन, हरिद्वार की छात्राओं तथा राजकीय बाल देखरेख गृह, रोशनाबाद, हरिद्वार के बालिकाओं ने सामूहिक रूप से भावपूर्ण सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। उद्घाटन सत्र में इन सभी बच्चों को माननीय न्यायाधीशों की धर्मपत्नीगण द्वारा उपहार प्रदान कर सम्मानित किया गया।

अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में माननीय मुख्य न्यायाधीश श्री मनोज कुमार गुप्ता ने इस महत्वपूर्ण परामर्श के आयोजन हेतु किशोर न्याय समिति एवं महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग को बधाई दी। उन्होंने नोबेल पुरस्कार विजेता गैब्रिएला मिस्ट्राल के प्रसिद्ध कथन—“बच्चे का विकास कभी स्थगित नहीं किया जा सकता”—का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रभावी क्रियान्वयन के बिना कोई भी उत्कृष्ट कानून केवल एक अधूरा वादा बनकर रह जाता है। उन्होंने सभी हितधारकों से अधिनियम के उद्देश्यों को धरातल पर उतारने हेतु व्यावहारिक एवं क्रियान्वयन-उन्मुख दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया।

मुख्य वक्तव्य देते हुए माननीय न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल, अध्यक्ष, किशोर न्याय समिति ने अधिनियम के दस वर्षों की यात्रा की समीक्षा करते हुए कहा कि “जो बच्चा विधि के साथ संघर्ष की स्थिति में है अथवा जिसे देखरेख एवं संरक्षण की आवश्यकता है, वह सबसे पहले एक बच्चा है—जो दण्ड नहीं, बल्कि पुनर्वास; और अलगाव नहीं, बल्कि समाज में पुनः एकीकरण का अधिकारी है।”

उन्होंने कहा कि “कोई भी कानून उतना ही प्रभावी होता है जितनी प्रभावी उसे लागू करने वाली संस्थाएँ तथा उनके मध्य समन्वय होता है।”

अपने प्रस्तावना वक्तव्य में माननीय न्यायमूर्ति आलोक महरा ने कहा कि “न्याय में विलम्ब किसी बच्चे के जीवन और भविष्य को गहराई से प्रभावित कर सकता है” तथा समयबद्ध एवं बाल-केंद्रित न्यायिक प्रक्रिया को अत्यंत आवश्यक बताया।

स्वागत भाषण देते हुए माननीय न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय ने सभी विशिष्ट अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया तथा बाल संरक्षण के क्षेत्र में सभी संस्थाओं के समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने उत्तराखण्ड में किशोर न्याय व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने पर बल देते हुए कहा कि राज्य के दूरस्थ एवं दुर्गम क्षेत्रों सहित प्रत्येक बच्चे को गरिमा, देखरेख, संरक्षण एवं समुचित सहयोग सुनिश्चित किया जाना चाहिए

इस परामर्श में 180 से अधिक प्रतिभागियों ने सहभागिता की, जिनमें उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल एवं अन्य रजिस्ट्रार, निदेशक उजाला, सचिव (विधि एवं विधिक परामर्शदाता), सचिव महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास, राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष, सभी जनपदों के जिला एवं सत्र न्यायाधीश, पॉक्सो एवं एफटीएससी न्यायालयों के न्यायाधीश, सभी किशोर न्याय बोर्डों के प्रधान मजिस्ट्रेट तथा पुलिस, शिक्षा, स्वास्थ्य, समाज कल्याण एवं पंचायती राज विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे।

उद्घाटन सत्र का समापन श्री योगेश कुमार गुप्ता, रजिस्ट्रार जनरल, उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से आह्वान किया कि“आइए, हम सब मिलकर प्रत्येक बच्चे के लिए सुरक्षित, स्नेहपूर्ण और पोषणकारी वातावरण के निर्माण हेतु एकजुट होकर कार्य करें।”

दिनभर चले इस परामर्श में पाँच तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया, जिनमें दत्तक ग्रहण, देखरेख एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चे, विधि के साथ संघर्षरत बच्चे, प्रारम्भिक मूल्यांकन तथा किशोर न्याय अधिनियम, 2015 का समग्र अवलोकन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। श्री प्रदीप पंत, निदेशक उजाला, श्री चंद्रेश यादव, सचिव महिला कल्याण एवं वाल विकास, सुश्री भावना सक्सेना, CEO कारा, भारत सरकार, सुश्री निवेदिता कुकरेती, आईजी कुमाऊं, राजीव भल्ला, अनाथ शिशु पालन ट्रस्ट, संगीता गौड़ इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन, सुश्री स्नेहा सिंह, एडवोकेट, श्री विक्रम श्रीवास्तव , एडवोकेट एंड फाउंडर इंडिपेंडेंट थॉट, श्री विजय दीक्षित, सुपरिंटेंडेंट स्पेशल होम्स, रोशनाबाद, हरिद्वार एवं श्री रघुवरदत्त तिवारी पूर्व चेयरपर्सन एचडब्ल्यूसी, देहरादून ने विशेषज्ञ/ वक्ता के रूप में विभिन्न तकनीकी सत्रों में योगदान दिया l

जिला न्यायाधीश हरिद्वार श्री नरेन्द्र दत्त एवं रजिस्ट्रार/ सचिव किशोर न्याय समिति उच्च न्यायालय नैनीताल श्री विक्रम एवं जिलाधिकारी श्री मयूर दीक्षित के नेतृत्व में जिला न्यायालय एवं जिला प्रशासन की सक्रिय भागीदारी ने कार्यक्रम के सफल आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी l


By Shashi Sharma

Shashi Sharma – Senior Woman Journalist

Shashi Sharma has been active in journalism since 1985, holding the distinction of being Uttarakhand's first female journalist.

For 36 years, starting in 1989, she rendered distinguished service to India's premier news agency, PTI. During this long tenure, she demonstrated the power of her writing on numerous significant occasions; notably, she spent two months in Tehri reporting positively on the Tehri Dam—which was then mired in controversy—and used her pen to help pave the way for its construction.

Currently, Mrs. Shashi Sharma runs the news portal *Newsok24.com* and serves as the editor of the weekly newspaper *Desh Nirdesh*; she is also a registered anchor and commentator for Delhi Doordarshan.

शशि शर्मा वरिष्ठ महिला पत्रकार शशि शर्मा उत्तराखंड की पहली महिला पत्रकार के तौर पर 1985 से पत्रकारिता में कार्यरत हैं। 1989 से 36 वर्षों तक उन्होंने भारत की शीर्ष समाचार एजेंसी पीटीआई के लिए अपनी सशक्त सेवाएं दीं। छत्तीस वर्षों की लंबी अवधि तक पीटीआई के लिए काम करते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण मौकों पर अपनी कलम का लोहा मनवाया, जिसमें दो महीने तक टिहरी में रहकर विवादों के संकट में रहे टिहरी बांध पर सकारात्मक रिपोर्टिंग कर अपनी कलम की ताकत से निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया। वर्तमान में श्रीमती शशि शर्मा Newsok24 com न्यूज पोर्टल को चला रहीं हैं और साप्ताहिक समाचार पत्र देश निर्देश की सम्पादक होने के साथ ही दिल्ली दूरदर्शन की रजिस्टर्ड एंकर और कमेंटेटर भी हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *