100 वर्ष की संघ यात्रा
चेतना सुरभि सनातन की- लाला सीताराम गोयल स्मृति सेमिनार 75.0
प्रायोजक एस आर चेरिटेबल ट्रस्ट
पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी का पावन सान्निध्य
डॉ बजरंग लाल गुप्ता जी, श्री संजीव गोयल जी, श्री सुनील विश्वनाथ देवधर जी, लोक गायिका, पद्मश्री मालिनी अवस्थी जी, कवि योगेन्द्र शर्मा जी आदि अनेक विशिष्ट अतिथियों की गरिममयी उपस्थिति
दिल्ली। भारत की सनातन चेतना, सांस्कृतिक अस्मिता और राष्ट्रबोध को समर्पित “100 वर्ष की संघ यात्रा – चेतना सुरभि सनातन की” विषय पर आयोजित लाला सीताराम गोयल स्मृति सेमिनार अत्यंत गरिमामय, प्रेरणादायक एवं वैचारिक ऊंचाई से परिपूर्ण दृष्टि से आयोजित किया गया। इस अवसर पर देश के प्रतिष्ठित संतों, विद्वानों, विचारकों एवं समाजसेवियों की गरिममायी उपस्थिति ने आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया।
कार्यक्रम का आयोजन एस. आर. चेरिटेबल ट्रस्ट के तत्वावधान में किया गया, जिसका उद्देश्य सनातन संस्कृति, राष्ट्रीय चेतना तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की 100 वर्षों की प्रेरणादायक यात्रा को जनमानस तक पहुंचाना है।
सेमिनार में परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी का पावन सान्निध्य, आशीर्वाद एवं उद्बोधन प्राप्त हुआ। इस अवसर पर डॉ. बजरंग लाल गुप्ता जी, श्री संजीव गोयल जी, श्री सुनील विश्वनाथ देवधर जी तथा सुप्रसिद्ध कवि योगेन्द्र शर्मा जी की गरिमामयी उपस्थिति रही। सभी वक्ताओं ने संघ की 100 वर्ष की यात्रा को सेवा, त्याग, तपस्या और राष्ट्रनिष्ठा का अनुपम उदाहरण बताया।
पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि “सनातन है तो भारत है, भारत है तो सनातन है और संघ है तो सनातन है।” उन्होंने कहा कि संघ के कार्यकर्ताओं ने स्वयं अपमान झेलकर भी देश के स्वाभिमान को जीवित रखा। संघ ने सदैव समाज में संस्कार निर्माण का कार्य किया। संघ की शक्ति उसके अनुशासन, समर्पण और राष्ट्रभक्ति में निहित है।उन्होंने कहा कि श्रीराम और रामायण हमारे जीवन की मर्यादा हैं। श्रीराम केवल एक ऐतिहासिक पुरुष नहीं, बल्कि आदर्श जीवन के प्रतीक हैं। रामायण भारतीय समाज के लिए नैतिक, सामाजिक और आध्यात्मिक मार्गदर्शक ग्रंथ है। आज जब विश्व मूल्य संकट से गुजर रहा है, तब रामायण मानवता के लिए प्रकाशस्तंभ बन सकती है।
वक्ताओं ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की 100 वर्षों की यात्रा सामाजिक पुनर्जागरण की यात्रा है। संघ ने देश के कोने-कोने में सेवा कार्यों के माध्यम से समाज को जोड़ा, संस्कारों को जीवित रखा और राष्ट्रभक्ति की भावना को प्रज्वलित किया।
संघ ने विपरीत परिस्थितियों में भी अपने मूल सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया। उन्होंने आलोचना, उपेक्षा और अपमान सहते हुए भी राष्ट्रहित को सर्वाेपरि रखा। यही कारण है कि आज संघ विश्व का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन बनकर खड़ा है।
सेमिनार में लाला सीताराम गोयल जी के योगदान को विशेष रूप से स्मरण किया गया। वक्ताओं ने कहा कि लाला जी ने इतिहास को सत्य के प्रकाश में प्रस्तुत करने का साहस किया। उन्होंने राष्ट्रवादी चिंतन को बौद्धिक आधार प्रदान किया और वैचारिक स्वाधीनता की रक्षा की।
उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि विचारों की शक्ति तलवार से अधिक प्रभावशाली होती है। यह सेमिनार उनके विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बना।
डॉ. बजरंग लाल गुप्ता जी ने संघ के बौद्धिक और सांस्कृतिक योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संघ ने समाज को आत्मगौरव दिया।
श्री संजीव गोयल जी ने कहा कि संघ ने समाज को जोड़ने का कार्य किया।
श्री सुनील विश्वनाथ देवधर जी ने संघ की वैश्विक छवि और उसकी राष्ट्रसेवा की भूमिका पर प्रकाश डाला।
वक्ताओं ने विशेष रूप से युवाओं से आह्वान करते हुये कहा कि वे आधुनिकता के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहें। उन्होंने कहा कि भारत का भविष्य तभी सुरक्षित है जब युवा पीढ़ी अपने सनातन मूल्यों को आत्मसात करेगी।
इस सेमिनार का मुख्य उद्देश्य यह संदेश देना है कि भारत की शक्ति उसकी संस्कृति, परंपरा और मूल्यों में निहित है। संघ इस सनातन चेतना का वाहक बनकर समाज में निरंतर कार्य कर रहा है।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्र, संस्कृति और सनातन चेतना के प्रति समर्पण के संकल्प के साथ हुआ।
इस अवसर पर श्री जगदीश मित्तल जी, श्री नंद किशोर गर्ग जी, श्री सुभाष गोयल जी और अनके विभूतियों का पावन सान्निध्य प्राप्त हुआ।


By Shashi Sharma

Shashi Sharma – Senior Woman Journalist

Shashi Sharma has been active in journalism since 1985, holding the distinction of being Uttarakhand's first female journalist.

For 36 years, starting in 1989, she rendered distinguished service to India's premier news agency, PTI. During this long tenure, she demonstrated the power of her writing on numerous significant occasions; notably, she spent two months in Tehri reporting positively on the Tehri Dam—which was then mired in controversy—and used her pen to help pave the way for its construction.

Currently, Mrs. Shashi Sharma runs the news portal *Newsok24.com* and serves as the editor of the weekly newspaper *Desh Nirdesh*; she is also a registered anchor and commentator for Delhi Doordarshan.

शशि शर्मा वरिष्ठ महिला पत्रकार शशि शर्मा उत्तराखंड की पहली महिला पत्रकार के तौर पर 1985 से पत्रकारिता में कार्यरत हैं। 1989 से 36 वर्षों तक उन्होंने भारत की शीर्ष समाचार एजेंसी पीटीआई के लिए अपनी सशक्त सेवाएं दीं। छत्तीस वर्षों की लंबी अवधि तक पीटीआई के लिए काम करते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण मौकों पर अपनी कलम का लोहा मनवाया, जिसमें दो महीने तक टिहरी में रहकर विवादों के संकट में रहे टिहरी बांध पर सकारात्मक रिपोर्टिंग कर अपनी कलम की ताकत से निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया। वर्तमान में श्रीमती शशि शर्मा Newsok24 com न्यूज पोर्टल को चला रहीं हैं और साप्ताहिक समाचार पत्र देश निर्देश की सम्पादक होने के साथ ही दिल्ली दूरदर्शन की रजिस्टर्ड एंकर और कमेंटेटर भी हैं।

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