महात्मा गांधी जी की पुण्यतिथि पर परमार्थ निकेतन की ओर से भावभीनी श्रद्धांजलि*

आज की परमार्थ गंगा आरती पूज्य बापू को की समर्पित*

महात्मा गांधी जी का जीवन मानवता के लिये दीपस्तंभ*

स्वामी चिदानन्द सरस्वती*

ऋषिकेश। सत्य और अहिंसा की ज्योति से संपूर्ण विश्व को आलोकित करने वाले ‘राष्ट्रपिता’ महात्मा गांधी जी की पुण्यतिथि पर आज परमार्थ निकेतन से श्रद्धा, कृतज्ञता और संकल्प के साथ उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। आज की गंगा जी की आरती पूज्य बापू को समर्पित की।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि महात्मा गांधी जी का जीवन त्याग, तप, सेवा और सादगी की अद्भुत गाथा है। उन्होंने सिद्ध किया कि सत्य की शक्ति तलवार से अधिक प्रखर होती है और अहिंसा का बल किसी भी साम्राज्य को झुका सकता है। उनके नेतृत्व में भारत ने राजनीतिक स्वतंत्रता, नैतिक और आध्यात्मिक स्वतंत्रता का मार्ग भी खोजा। बापू ने विश्व को संदेेश दिया कि वास्तविक क्रांति बाहरी संघर्ष से नहीं, बल्कि आंतरिक परिवर्तन से आती है।

स्वामी जी ने कहा कि गांधी जी का प्रत्येक विचार मानवता के उत्थान का संदेश देता है। सत्य उनके जीवन का प्राण था, अहिंसा उनका शस्त्र, स्वच्छता उनकी साधना और राष्ट्रसेवा उनका धर्म। उन्होंने स्वच्छता को केवल बाहरी सफाई नहीं, बल्कि मन, वचन और कर्म की पवित्रता से जोड़ा। उनका मानना था कि स्वच्छ भारत ही सशक्त भारत का आधार है। आज जब हम स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जिम्मेदारी की बात करते हैं, तब बापू के विचार पहले से अधिक प्रासंगिक प्रतीत होते हैं।

युवाओं को संबोधित करते हुए कहा गया कि आज का भारत नई ऊर्जा, नई संभावनाओं और नई चुनौतियों के दौर से गुजर रहा है। ऐसे समय में गांधी जी के नैतिक मूल्य, सत्यनिष्ठा, अनुशासन, संयम, आत्मनिर्भरता और राष्ट्रप्रेम हमारे मार्गदर्शक बन सकते हैं। बापू का जीवन हमें यह प्रेरणा देता है कि राष्ट्रसेवा ही सर्वाेच्च साधना है।

गांधी जी ने सदा प्रेम, करुणा और समरसता का संदेश दिया। उन्होंने किसी भी प्रकार के भेदभाव, हिंसा और घृणा को मानवता के लिए घातक बताया। उनका स्वप्न ऐसा भारत था, जहाँ हर व्यक्ति को समान अवसर मिले, जहाँ स्त्री-पुरुष, गरीब-अमीर, जाति-धर्म के भेद से ऊपर उठकर सब एक परिवार की भांति रहें। आज उनकी पुण्यतिथि हमें उसी समरस, स्वावलंबी और संस्कारित भारत के निर्माण का संकल्प लेने का अवसर प्रदान करती है।

महात्मा गांधी जी का जीवन एक दीपस्तंभ है, जो युगों-युगों तक मानवता को दिशा देता रहेगा। उनके आदर्श हमें निरंतर स्मरण कराते हैं कि जब व्यक्ति अपने भीतर सत्य और प्रेम की ज्योति प्रज्वलित करता है, तब सम्पूर्ण राष्ट्र प्रकाशमान हो उठता है। आइए, हम सब मिलकर बापू के सपनों के स्वच्छ, सशक्त, नैतिक और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का संकल्प लें।


By Shashi Sharma

Shashi Sharma Working in journalism since 1985 as the first woman journalist of Uttarakhand. From 1989 for 36 years, she provided her strong services for India's top news agency PTI. Working for a long period of thirty-six years for PTI, he got her pen ironed on many important occasions, in which, by staying in Tehri for two months, positive reporting on Tehri Dam, which was in crisis of controversies, paved the way for construction with the power of her pen. Delivered.

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