माघ पूर्णिमा की शुभकामनायें*

संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की जयंती पर उनकी राष्ट्र साधना को नमन*

माघ पूर्णिमा केवल अनुष्ठानों का पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और अंतर्मन के जागरण का पर्व*

स्वामी चिदानन्द सरस्वती*

ऋषिकेश, 1 फरवरी। पवित्र माघ पूर्णिमा के पुण्य अवसर पर समस्त देशवासियों, श्रद्धालुओं और कल्पवासियों को परमार्थ निकेतन से शुभकामनाएँ। माघ मास अत्यंत पवित्र होने के साथ तप, साधना, दान तथा स्नान का महीना है। इस मास में किए गए जप, तप, व्रत और तीर्थस्नान का फल अनेक गुना बढ़ जाता है, और माघ पूर्णिमा इसका परम मंगलमय समापन पर्व है।

माघ पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों विशेषकर गंगा, यमुना और संगम में स्नान करने से समस्त पापों का क्षय होता है तथा मन, वचन और कर्म की शुद्धि प्राप्त होती है। यह तिथि भगवान विष्णु एवं चंद्रदेव की आराधना के लिए विशेष है। इस दिन दान, हवन, सत्संग, कथा-श्रवण और भजन-कीर्तन के माध्यम से ईश्वर के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करे।

माघ पूर्णिमा केवल बाहरी अनुष्ठानों का पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और अंतर्मन के जागरण का भी संदेश देती है। यह हमें संयम, सेवा, करुणा और परोपकार की भावना से जीवन जीने की प्रेरणा प्रदान करती है। सनातन परंपरा में ‘दान’ और ‘स्नान’ के साथ ‘ज्ञान’ का विशेष महत्व है, जो आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर करती है।

आइए, हम सभी इस शुभ अवसर पर अपने जीवन में पवित्रता, सदाचार और धर्म के आदर्शों को अपनाने का संकल्प लें तथा राष्ट्र और समाज के कल्याण के लिए समर्पित हों। माघ पूर्णिमा की इस दिव्य बेला पर सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की परमार्थ निकेतन से मंगलमय शुभकामनाएँ।

आज संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की जयंती है, यह एक महान संत की स्मृति के साथ ही समता, भक्ति, मानवता और सामाजिक न्याय के आदर्शों को आत्मसात करने का प्रेरक अवसर भी है।

संत रविदास जी ने अपने जीवन और वाणी से समाज को आध्यात्मिक चेतना के साथ-साथ सामाजिक जागरण का मार्ग दिखाया। उन्होंने भक्ति आंदोलन को नई दिशा देते हुए ईश्वर-प्रेम को जाति, वर्ग और भेदभाव से ऊपर रखा। उनकी रचनाएँ सरल भाषा में मानवता, करुणा और समरसता का संदेश देती हैं। एक कवि और संत के रूप में उन्होंने जन-जन के हृदय में भक्ति की ज्योति प्रज्वलित की, वहीं एक समाज सुधारक के रूप में छुआछूत, ऊँच-नीच और सामाजिक असमानता के विरुद्ध सशक्त आवाज़ उठाई।

उनका प्रसिद्ध संदेश “मन चंगा तो कठौती में गंगा” संदेश देता है कि भक्ति बाहरी आडंबरों में नहीं, बल्कि निर्मल मन और शुद्ध आचरण में निहित है। आज भी उनके विचार सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता की दिशा में मार्गदर्शन करते हैं।

संत रविदास जी का जीवन प्रेरित करता है कि हम प्रेम, समानता और सेवा के मूल्यों को अपनाकर एक न्यायपूर्ण और समावेशी समाज के निर्माण में योगदान दें। उनकी शिक्षाएँ वर्तमान समय में और भी प्रासंगिक हैं, जब समाज को आपसी सद्भाव और आध्यात्मिक जागृति की आवश्यकता है।

इस पावन अवसर पर हम संत रविदास जी की साधना को नमन करते हुये उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लें।


By Shashi Sharma

Shashi Sharma – Senior Woman Journalist

Shashi Sharma has been active in journalism since 1985, holding the distinction of being Uttarakhand's first female journalist.

For 36 years, starting in 1989, she rendered distinguished service to India's premier news agency, PTI. During this long tenure, she demonstrated the power of her writing on numerous significant occasions; notably, she spent two months in Tehri reporting positively on the Tehri Dam—which was then mired in controversy—and used her pen to help pave the way for its construction.

Currently, Mrs. Shashi Sharma runs the news portal *Newsok24.com* and serves as the editor of the weekly newspaper *Desh Nirdesh*; she is also a registered anchor and commentator for Delhi Doordarshan.

शशि शर्मा वरिष्ठ महिला पत्रकार शशि शर्मा उत्तराखंड की पहली महिला पत्रकार के तौर पर 1985 से पत्रकारिता में कार्यरत हैं। 1989 से 36 वर्षों तक उन्होंने भारत की शीर्ष समाचार एजेंसी पीटीआई के लिए अपनी सशक्त सेवाएं दीं। छत्तीस वर्षों की लंबी अवधि तक पीटीआई के लिए काम करते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण मौकों पर अपनी कलम का लोहा मनवाया, जिसमें दो महीने तक टिहरी में रहकर विवादों के संकट में रहे टिहरी बांध पर सकारात्मक रिपोर्टिंग कर अपनी कलम की ताकत से निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया। वर्तमान में श्रीमती शशि शर्मा Newsok24 com न्यूज पोर्टल को चला रहीं हैं और साप्ताहिक समाचार पत्र देश निर्देश की सम्पादक होने के साथ ही दिल्ली दूरदर्शन की रजिस्टर्ड एंकर और कमेंटेटर भी हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *