पुलवामा में हुए कायरतापूर्ण आतंकी हमले में मातृभूमि की रक्षा करते हुए सर्वाेच्च बलिदान देने वाले केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के 40 अमर वीर सपूतों को परमार्थ निकेतन से भावभीनी श्रद्धांजलि*

आज की परमार्थ गंगा आरती केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के वीर जवानों को समर्पित*

भारतीय सैनिक, भारत माँ की ढाल, भारतीयों की साँसों के प्रहरी*

स्वामी चिदानन्द सरस्वती*

ऋषिकेश, 14 फरवरी। पुलवामा में हुए कायरतापूर्ण आतंकी हमले में मातृभूमि की रक्षा करते हुए सर्वाेच्च बलिदान देने वाले केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के 40 अमर वीर सपूतों को परमार्थ निकेतन से भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

आज से सात वर्ष पूर्व भारत की पवित्र धरती हृदय पुलवामा, जम्मू कश्मीर, अचानक शौर्य, वेदना और अमरत्व का तीर्थ बन गया था। वह दिन भारत की आत्मा को झकझोर देने वाला क्षण था। माँ भारती के 40 वीर सपूत, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जांबाज़ जवान, कायरतापूर्ण षड्यंत्र का शिकार हुए।

परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष, मेनेजिंग ट्रस्टी, स्वामी शुकदेवानन्द ट्रष्ट, स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि पुलवामा में हुये कायरतापूर्ण आतंकी हमले में शहीद हुये केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जांबाज़ जवानों का बलिदान राष्ट्रधर्म की सर्वाेच्च साधना थी। उन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर अपने कर्तव्य, संकल्प, सेवा और समर्पण का अद्भुत परिचय दिया। जब उस दिन विस्फोट की गूंज उठी थी, तो वह केवल बारूद की आवाज नहीं थी, वह पूरे भारत के हृदय में उठी एक हुंकार थी। हर भारतीय की आंख नम थी, परंतु हर सीना गर्व से भी तना हुआ था।

भारत ने उस दिन यह स्पष्ट कर दिया कि यह नया भारत है, जो शांति चाहता है, परंतु कायरता नहीं; जो प्रेम में विश्वास करता है, परंतु अन्याय सहन नहीं करता; जो करुणा रखता है, परंतु राष्ट्र की अस्मिता पर आघात करने वालों को क्षमा नहीं करता।

आज जब पूरा विश्व प्रेम का उत्सव मना रहा है, तब हमें स्मरण रखना चाहिए कि प्रेम का सबसे पवित्र स्वरूप ‘देशप्रेम’ है। वह प्रेम जो सीमा पर खड़े जवान के हृदय में धड़कता है; वह प्रेम जो घर-परिवार से दूर रहकर भी राष्ट्र को परिवार मानता है; वह प्रेम जो अपनी खुशियों को त्यागकर हमारे भविष्य को सुरक्षित करता है।

स्वामी जी ने कहा कि सेना का हर वीर जवान, भारत माता का सपूत जानता है कि शायद वे लौटकर घर न आ पायेंग, फिर भी वे मुस्कुराते हुए निकलते हैं क्योंकि उनके लिए भारत ही उनका घर है, भारत ही उनका परिवार है, उनकी माताएँ, बहनों, बच्चों, परिवार जनों सबने अपने हृदय को पत्थर बनाकर उन्हें राष्ट्र को समर्पित किया। पुलवामा में हुअय बलिदान केवल उन 40 वीरों का नहीं, उन 40 परिवारों का भी है जिन्होंने अपनी संतानों को खोया है।

उनके रक्त की हर बूंद इस मिट्टी में मिलकर तिरंगे को और अधिक गाढ़ा रंग दे गई है। उनकी स्मृतियाँ हमारे राष्ट्रीय स्वाभिमान की नींव हैं। उनका बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा; पूरा भारत एकजुट होकर राष्ट्रीय अखंडता और सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। आइए, हम सभी उनके आदर्शों को आत्मसात कर राष्ट्रसेवा, एकता और कर्तव्यनिष्ठा का संकल्प लें।


By Shashi Sharma

Shashi Sharma – Senior Woman Journalist

Shashi Sharma has been active in journalism since 1985, holding the distinction of being Uttarakhand's first female journalist.

For 36 years, starting in 1989, she rendered distinguished service to India's premier news agency, PTI. During this long tenure, she demonstrated the power of her writing on numerous significant occasions; notably, she spent two months in Tehri reporting positively on the Tehri Dam—which was then mired in controversy—and used her pen to help pave the way for its construction.

Currently, Mrs. Shashi Sharma runs the news portal *Newsok24.com* and serves as the editor of the weekly newspaper *Desh Nirdesh*; she is also a registered anchor and commentator for Delhi Doordarshan.

शशि शर्मा वरिष्ठ महिला पत्रकार शशि शर्मा उत्तराखंड की पहली महिला पत्रकार के तौर पर 1985 से पत्रकारिता में कार्यरत हैं। 1989 से 36 वर्षों तक उन्होंने भारत की शीर्ष समाचार एजेंसी पीटीआई के लिए अपनी सशक्त सेवाएं दीं। छत्तीस वर्षों की लंबी अवधि तक पीटीआई के लिए काम करते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण मौकों पर अपनी कलम का लोहा मनवाया, जिसमें दो महीने तक टिहरी में रहकर विवादों के संकट में रहे टिहरी बांध पर सकारात्मक रिपोर्टिंग कर अपनी कलम की ताकत से निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया। वर्तमान में श्रीमती शशि शर्मा Newsok24 com न्यूज पोर्टल को चला रहीं हैं और साप्ताहिक समाचार पत्र देश निर्देश की सम्पादक होने के साथ ही दिल्ली दूरदर्शन की रजिस्टर्ड एंकर और कमेंटेटर भी हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *