*बीरों देवल में आयोजित मां चंडिका महावन्याथ देवरा यात्रा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी हुए शामिल*

*मां चंडिका महावन्याथ में सीएम धामी ने की पूजा-अर्चना, क्षेत्रीय विकास हेतु की महत्वपूर्ण घोषणाएं*

*दिवारा यात्रा पर उमड़ा जनसैलाब, मुख्यमंत्री ने सांस्कृतिक विरासत संरक्षण का दोहराया संकल्प*

*महत्वपूर्ण घोषणाएं—*

*1. मां चंडिका मंदिर प्रांगण एवं मंदिर समूह का पुरातत्व विभाग के माध्यम से पुनर्निर्माण कराया जाएगा।*

*2. तहसील बसुकेदार में नवीन तहसील भवन निर्माण की घोषणा की गई।*

जनपद रुद्रप्रयाग के विकासखंड अगस्त्यमुनि अंतर्गत ग्राम बीरों देवल में आयोजित मां चंडिका महावन्याथ देवरा यात्रा में आज प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सम्मिलित हुए।

मुख्यमंत्री ने सर्वप्रथम मां चंडिका मंदिर पहुंचकर महायज्ञ में भाग लिया तथा वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच पूर्ण विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर मां चंडिका का आशीर्वाद प्राप्त किया। तत्पश्चात मंदिर समिति, जनप्रतिनिधियों एवं स्थानीय ग्रामीणों द्वारा उनका माल्यार्पण कर अंगवस्त्र एवं स्मृति चिह्न भेंट कर स्वागत किया गया।

मुख्यमंत्री के आगमन के अवसर पर विभिन्न विभागों द्वारा क्षेत्र में स्टॉल स्थापित कर आमजन को राज्य एवं केंद्र सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी प्रदान की गई तथा लाभान्वित किया गया।

*जनसमूह को किया संबोधित*

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए क्षेत्र की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक परंपराओं की सराहना की तथा प्रदेश सरकार की विकास योजनाओं के बारे में जानकारी दी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उपस्थित सभी श्रद्धालुओं का अभिनंदन करते हुए कहा कि इस महायज्ञ में सम्मिलित होकर वे स्वयं को अत्यंत सौभाग्यशाली महसूस कर रहे हैं। उन्होंने मां चंडिका से सभी की कुशलता तथा उत्तराखंड राज्य की सुख-समृद्धि की प्रार्थना की। मुख्यमंत्री ने आयोजन स्थल को धार्मिक एवं आध्यात्मिक संगम का प्रतीक बताते हुए कहा कि 20 वर्षों के बाद आयोजित यह महायज्ञ केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पुनर्जागरण का भी प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि किसी भी देवस्थान पर जाना मात्र संयोग नहीं होता, बल्कि इसे ईश्वरीय आह्वान और आशीर्वाद के रूप में देखना चाहिए। मुख्यमंत्री ने आयोजन में जनसहभागिता को अनुपम उदाहरण बताते हुए कहा कि ऐसे धार्मिक एवं सामाजिक आयोजन ही उत्तराखंड की विशिष्ट पहचान हैं। ये आयोजन न केवल समाज में समरसता और एकता को सुदृढ़ करते हैं, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं और मूल जड़ों से जुड़ने का अवसर भी प्रदान करते हैं।

ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी पर आभार व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री भावुक हो उठे। उन्होंने अपने बचपन की स्मृतियों को साझा करते हुए कहा कि वे भी बड़े-बुजुर्गों के साथ ऐसे आयोजनों में सम्मिलित होते थे, जहां सभी एक-दूसरे की खुशहाली की कामना करते थे। उन्होंने सामाजिक सद्भाव और सांस्कृतिक संरक्षण के लिए सामूहिक सहभागिता की आवश्यकता पर बल दिया।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश निरंतर विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है। सनातन संस्कृति की रक्षा और संवर्धन के लिए महत्वपूर्ण प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने वर्तमान समय को सांस्कृतिक, सामाजिक और सहयोग की दृष्टि से स्वर्णिम काल बताते हुए कहा कि भारत को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी बनाने की दिशा में कार्य हो रहा है तथा वैश्विक स्तर पर भारतीय संस्कृति को विशेष सम्मान प्राप्त हो रहा है।

वर्ष 2013 की आपदा के बाद केदारनाथ मंदिर में हुए व्यापक पुनर्निर्माण कार्यों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आज ‘दिव्य एवं भव्य केदार’ का स्वरूप सभी के सामने है। उन्होंने आश्वस्त किया कि राज्य सरकार धार्मिक आयोजनों की सफलता और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए सदैव प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड को समृद्ध राज्य बनाने हेतु सरकार निरंतर प्रयासरत है और युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए पूर्णतः संकल्पित है। देवभूमि के मूल स्वरूप से छेड़छाड़ करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा धर्मांतरण विरोधी कानून, दंगा-निरोधक प्रावधानों सहित विभिन्न सख्त कानूनी उपाय लागू किए गए हैं। राज्यभर में 12 हजार से अधिक भूमि अतिक्रमण से मुक्त कराई गई है, जिसे उन्होंने देवभूमि की पवित्रता की रक्षा का अभियान बताया।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड समूचे राष्ट्र में (समान नागरिक संहिता) समान कानून लागू करने वाला अग्रणी राज्य बनकर उभरा है और राज्य सरकार प्रदेश के सर्वांगीण विकास तथा सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

*मुख्यमंत्री घोषणाएं*

मुख्यमंत्री द्वारा क्षेत्र के विकास हेतु निम्न महत्वपूर्ण घोषणाएं की गईं—

1. मां चंडिका मंदिर प्रांगण एवं मंदिर समूह का पुरातत्व विभाग के माध्यम से पुनर्निर्माण कराया जाएगा।

2. तहसील बसुकेदार में नवीन तहसील भवन निर्माण की घोषणा की गई।

इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री ने लाटा बाबा विद्यालय को इंटरमीडिएट स्तर तक उच्चीकृत किए जाने हेतु परीक्षण कराकर नियमावली के अनुसार आवश्यक कार्यवाही करने का आश्वासन दिया। इसके साथ ही इस अवसर पर आशा नौटियाल, विधायक केदारनाथ, द्वारा क्षेत्र की विभिन्न मांगों के संबंध में मुख्यमंत्री को पत्र भी सौंपा गया। मुख्यमंत्री ने उक्त मांगों पर परीक्षण कर आवश्यक कार्यवाही करने का आश्वासन प्रदान किया।

*20 वर्षों बाद आयोजित हो रही है दिवारा यात्रा*

मां चंडिका की दिवारा यात्रा 21 नवम्बर 2025 से प्रारंभ होकर लगभग 26 गांवों के भ्रमण पर रही। यह यात्रा 20 वर्षों के अंतराल के बाद आयोजित की जा रही है। यात्रा के दौरान वीरों देवल, संगूड़, नैणी पौण्डार, क्यार्क बरसूड़ी, पाली, बष्टी, डुंगर, बड़ेथ, पाटियू, भटवाड़ी, जोला, उच्छोला, मथ्यागांव, बक्सीर, भुनालगांव, डांगी, खोड, स्यूर, डडोली, खाटली किमाणा, दानकोट, कौशलपुर, अरखण्ड, डालसिंगी, हाट, नैली कुंड, रयांसू सहित विभिन्न गांवों का भ्रमण किया गया।

यात्रा के अंतर्गत बीरों देवल में 15 फरवरी से 9 दिवसीय महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। 22 फरवरी 2026 को विशाल जलयात्रा आयोजित होगी तथा 24 फरवरी 2026 को पूर्णाहुति के साथ यह महावन्याथ यात्रा सम्पन्न होगी और मां अपने दिव्य स्थल पर विराजमान होंगी।

कार्यक्रम में विधायक केदारनाथ आशा नौटियाल, विधायक रुद्रप्रयाग भरत चौधरी, जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम कठैत, उपाध्यक्ष रितु नेगी, ब्लॉक प्रमुख अगस्त्यमुनि भुवनेश्वरी देवी, बीकेटीसी उपाध्यक्ष विजय कप्रवान, महिला आयोग उपाध्यक्ष ऐश्वर्या रावत, भाजपा जिलाध्यक्ष भारत भूषण भट्ट, महायज्ञ समिति अध्यक्ष डॉ. आशुतोष भंडारी, महासचिव मदन मोहन डिमरी सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।

इसके अतिरिक्त जिलाधिकारी विशाल मिश्रा, पुलिस अधीक्षक नीहारिका तोमर, उप वन संरक्षक रजत सुमन, मुख्य विकास अधिकारी राजेंद्र सिंह रावत सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।


By Shashi Sharma

Shashi Sharma Working in journalism since 1985 as the first woman journalist of Uttarakhand. From 1989 for 36 years, she provided her strong services for India's top news agency PTI. Working for a long period of thirty-six years for PTI, he got her pen ironed on many important occasions, in which, by staying in Tehri for two months, positive reporting on Tehri Dam, which was in crisis of controversies, paved the way for construction with the power of her pen. Delivered.

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