योगधर्म से युगधर्म, अभ्युदय 2026, पतंजलि विश्वविद्यालय, हरिद्वार
परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने योग धर्म से युग धर्म, अभ्युदय 2026 कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में सहभाग कर कार्यक्रम की अध्यक्षता की
पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलाधिपति, योगऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज तथा कुलपति आचार्य बालकृष्ण जी के कुशल नेतृत्व में आयोजित ‘योग धर्म से युग धर्म अभ्युदय 2026’ कार्यक्रम
इस पावन अवसर पर महामंडलेश्वर स्वामी हरिचेतनानन्द जी महाराज, साध्वी साध्वी भगवती सरस्वती जी, कुलपति केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय श्री श्रीनिवास जी, संगीत नाटक अकादमी, नई दिल्ली की डॉ. संध्या जी, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के संस्कृत के आचार्य श्री बृजभूषण जी, श्री ओझा जी, डा शिवानी जी, कुलपति श्री दिनेश जी शास्त्री जी, प्रशांत राय जी तथा अन्य विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति
आचार्य बालकृष्ण जी ने सभी अतिथियों को पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्र, व स्मृतिचिन्ह भेंट कर किया स्वागत अभिनन्दन
नालंदा व तक्षशिला विश्वविद्यालय का साक्षात स्वरूप पतंजलि विश्वविद्यालय
स्वामी चिदानन्द सरस्वती
ऋषिकेश। पतंजलि विश्वविद्यालय, हरिद्वार में आयोजित ‘योग धर्म से युग धर्म, अभ्युदय 2026’ कार्यक्रम योग, आयुर्वेद, अध्यात्म, संस्कृति और राष्ट्र चेतना का अद्भुत संगम है। यह भारत की प्राचीन ऋषि परंपरा, योग विज्ञान और सनातन मूल्यों के पुनर्जागरण का सशक्त संकल्प है। इस कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि योग केवल शरीर साधना नहीं, बल्कि व्यक्ति, समाज और राष्ट्र निर्माण का आधार है।
परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सहभाग कर कार्यक्रम की अध्यक्षता की। अपने प्रेरक उद्बोधन में उन्होंने कहा कि “योग धर्म ही युग धर्म है। आज मानवता जिन चुनौतियों से जूझ रही है, तनाव, हिंसा, पर्यावरण संकट और नैतिक पतन, उनका समाधान केवल योग, ध्यान और संस्कारों से ही संभव है। योग हमें स्वयं से जोड़ता है, और स्वयं से जुड़कर ही हम समाज व प्रकृति से जुड़ पाते हैं।
कार्यक्रम का आयोजन पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलाधिपति, योगऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज तथा कुलपति आचार्य बालकृष्ण जी के कुशल नेतृत्व में हुआ। उनके मार्गदर्शन में विश्वविद्यालय योग, आयुर्वेद, संस्कृत और भारतीय ज्ञान परंपरा के माध्यम से राष्ट्र के नव निर्माण की दिशा में निरंतर अग्रसर है।
योगऋषि स्वामी रामदेव जी ने योग को जन-जन तक पहुँचाने का जो महाअभियान प्रारंभ किया, वह आज वैश्विक स्तर पर भारत की पहचान बन चुका है। वहीं आचार्य बालकृष्ण जी का आयुर्वेद और स्वदेशी के प्रति समर्पण आत्मनिर्भर भारत के स्वप्न को साकार कर रहा है।
इस पावन अवसर पर महामंडलेश्वर स्वामी हरिचेतनानन्द जी महाराज, साध्वी भगवती सरस्वती जी, केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति श्री श्रीनिवासन जी, संगीत नाटक अकादमी, नई दिल्ली की डॉ. संध्या जी, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के संस्कृत आचार्य श्री बृजभूषण जी सहित अनेक संत, विद्वान एवं विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। सभी वक्ताओं ने एक स्वर में योग, संस्कृति और शिक्षा के समन्वय को वर्तमान समय की आवश्यकता बताया।
‘योग धर्म से युग धर्म’ की भावना इस तथ्य को प्रतिपादित करती है कि जब योग जीवन का धर्म बनता है, तब वह पूरे युग की दिशा बदल देता है। योग से शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक शांति, आध्यात्मिक संतुलन और सामाजिक सद्भाव का निर्माण होता है। यह हमें संयम, सेवा और समर्पण का संदेश देता है। आज की युवा पीढ़ी के लिए योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है, एक ऐसा मार्ग जो उन्हें लक्ष्य, अनुशासन और आत्मविश्वास प्रदान करता है।
कार्यक्रम में भक्ति और ज्ञान का सुंदर समन्वय देखने को मिला। मंत्रोच्चारण, योग प्रदर्शन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रेरक संबोधनों ने उपस्थित विद्यार्थियों और सभी के अंतर्मन को स्पर्श किया। वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा और राष्ट्र गौरव की भावना स्पष्ट अनुभव की जा सकती थी। यह आयोजन सनातन संस्कृति की जीवंतता और भारत की आध्यात्मिक शक्ति का प्रमाण बना।
इस अवसर पर योगऋषि स्वामी रामदेव जी ने कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति योग को अपने जीवन में अपनाए, तो परिवार स्वस्थ होगा, समाज संस्कारित होगा और राष्ट्र सशक्त बनेगा। यही ‘अभ्युदय’ है, व्यक्ति से राष्ट्र तक उन्नति की यात्रा।
महामण्डलेश्वर स्वामी हरिचेतनानन्द जी ने कहा कि ‘योग धर्म से युग धर्म अभ्युदय 2026’ वास्तव में एक युगांतरकारी पहल है, जो आने वाली पीढ़ियों को स्वस्थ, जागरूक और संस्कारित भारत की ओर अग्रसर करने का मार्ग प्रशस्त कर रही है।


By Shashi Sharma

Shashi Sharma Working in journalism since 1985 as the first woman journalist of Uttarakhand. From 1989 for 36 years, she provided her strong services for India's top news agency PTI. Working for a long period of thirty-six years for PTI, he got her pen ironed on many important occasions, in which, by staying in Tehri for two months, positive reporting on Tehri Dam, which was in crisis of controversies, paved the way for construction with the power of her pen. Delivered.

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